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Muzaffarnagar News: अयोध्या के नर-नारी, पशु-पक्षी हुए व्याकुल
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मुजफ्फरनगर। संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम के वनगमन के बाद अयोध्या में चारों ओर शोक छा गया। नर-नारी, पशु-पक्षी समेत सभी जीव अचेत अवस्था में पड़े हुए हैं। गंगा के किनारे सुमंत रथ के पास मूर्छित पड़े हैं। वापस जाने की हिम्मत नहीं है। अयोध्या नगरी के इस हाल को सुनकर पंडाल में सभी श्रद्धालु भावुक हुए।
नई मंडी के रामलीला भवन में कथा के पांचवें दिन कथा व्यास संत ने राजा दशरथ के राम वियोग में प्राण त्यागना, ननिहाल से भरत और शत्रुघ्न की अयोध्या में वापसी और चित्रकूट में श्रीराम और भरत के मिलन के लिए पूरी अयोध्या के प्रस्थान का प्रसंग सुनाया।
कथा में राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र सम्पर्क प्रमुख आनंद, सह प्रांत कार्यवाह सेवादास, विभाग प्रचारकभू पेंद्र कुमार, भाजपा नेता कुलदीप कुमार गर्ग, आयुष बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. सुभाष शर्मा, मास्टर विजय सिंह, राजेंद्र गर्ग, नरेश गर्ग, सुरेश कुमार, रामावतार, विजय मोहन, अशोक कुमार, अतुल कुमार, नानूराम जिंदल, पूर्व विधायक अशोक कंसल मौजूद रहे।
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संत बोले, भरत जैसा हो भाई का प्रेम
संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि भाइयों का प्रेम भरत जैसा होना चाहिए। एक भाई ने दूसरे भाई के प्रति प्रेम के लिए राज्य का मोह त्याग दिया। वचन के अनुसार महर्षि वशिष्ठ ने भी भरत पर अयोध्या का राज संभालने का दबाव डाला। माता कौशल्या ने भी मनाया लेकिन भरत जी तैयार नहीं हुए और श्रीराम को चित्रकूट से लाने के लिए प्रस्थान करने की घोषणा की।
श्रद्धालुओं की आंखें नम हुई
संत ने कहा कि अयोध्याकांड में कई प्रसंग करूणा से भरे हुए हैं। उन्होंने भाव के साथ श्रीराम के साथ लक्ष्मण, जानकी के वनगमन की तैयारी, राजा दशरथ का प्राण छोड़ना, भरत को माता कैकई के वचनों की कहानी का पता चलना और अयोध्या के सूनापन का मार्मिक चित्रण सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हुईं।
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नई मंडी के रामलीला भवन में कथा के पांचवें दिन कथा व्यास संत ने राजा दशरथ के राम वियोग में प्राण त्यागना, ननिहाल से भरत और शत्रुघ्न की अयोध्या में वापसी और चित्रकूट में श्रीराम और भरत के मिलन के लिए पूरी अयोध्या के प्रस्थान का प्रसंग सुनाया।
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कथा में राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र सम्पर्क प्रमुख आनंद, सह प्रांत कार्यवाह सेवादास, विभाग प्रचारकभू पेंद्र कुमार, भाजपा नेता कुलदीप कुमार गर्ग, आयुष बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. सुभाष शर्मा, मास्टर विजय सिंह, राजेंद्र गर्ग, नरेश गर्ग, सुरेश कुमार, रामावतार, विजय मोहन, अशोक कुमार, अतुल कुमार, नानूराम जिंदल, पूर्व विधायक अशोक कंसल मौजूद रहे।
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संत बोले, भरत जैसा हो भाई का प्रेम
संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि भाइयों का प्रेम भरत जैसा होना चाहिए। एक भाई ने दूसरे भाई के प्रति प्रेम के लिए राज्य का मोह त्याग दिया। वचन के अनुसार महर्षि वशिष्ठ ने भी भरत पर अयोध्या का राज संभालने का दबाव डाला। माता कौशल्या ने भी मनाया लेकिन भरत जी तैयार नहीं हुए और श्रीराम को चित्रकूट से लाने के लिए प्रस्थान करने की घोषणा की।
श्रद्धालुओं की आंखें नम हुई
संत ने कहा कि अयोध्याकांड में कई प्रसंग करूणा से भरे हुए हैं। उन्होंने भाव के साथ श्रीराम के साथ लक्ष्मण, जानकी के वनगमन की तैयारी, राजा दशरथ का प्राण छोड़ना, भरत को माता कैकई के वचनों की कहानी का पता चलना और अयोध्या के सूनापन का मार्मिक चित्रण सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हुईं।