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जांच समिति ने माना था 1.04 करोड़ का घोटाला
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मुजफ्फरनगर। प्राथमिक शिक्षक वेतन भोगी कर्मचारी ऋण समिति में विभागीय जांच समिति ने एक करोड़ चार लाख का घोटाला माना था। घोटाले में अगस्त 2017 में शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। कोतवाली पुलिस जब कोई कार्रवाई नहीं कर पाई तो मामला क्राइम ब्रांच में चला गया। क्राइम ब्रांच भी कुछ नहीं कर पाई। राजनीतिक प्रेशर के चलते आरोपी साफ बचे रहे।
शिक्षक ऋण समिति में हुए घोटाले पर लगातार पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है। समिति से 500 शिक्षकों ने ऋण लिया था, 274 शिक्षकों पर ऋण अभी भी बकाया है। सहकारी बैंक की शिवचौक शाखा का शिक्षकों पर पांच करोड़ बकाया है। समिति के सचिव संजय दहिया की 2016 में मौत होने के बाद आर्यपुरी में स्थित शिक्षक भवन में समिति के कार्यालय में रिकार्ड में आग लगा दी गई। समिति के लोगों ने शिक्षकों से नकद पैसा लेकर हजम कर लिया। इस मामले में शिकायत के बाद तत्कालीन एआर कॉपरेटिव ने एक जांच टीम गठित की। इस टीम का अध्यक्ष अपर जिला सहकारी अधिकारी शोभाराम शर्मा को बनाया गया। टीम ने अपनी जांच में पाया कि समिति में एक करोड़ चार लाख का घोटाला हुआ है। एआर कॉपरेटिव के निर्देश पर शोभाराम शर्मा की ओर से 15 अक्तूबर 2016 को शहर कोतवाली में तहरीर दी गई। आश्चर्य की बात यह रही कि तहरीर पर मुकदमा ही दर्ज नहीं हुआ।
इसी के चलते एडीजी मेरठ प्रशांत कुमार ने शासन को इस मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी को दिए जाने के लिए पत्र लिखा था। बाद में शासन ने सीबीसीआईडी को मामला सौंप दिया। जांच एजेंसी के इंस्पेक्टर राजीव चतुर्वेदी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना यह है कि सीबीसीआईडी को घोटालेबाजों तक पहुंचने में कितनी सफलता मिलती है।
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शिक्षक ऋण समिति में हुए घोटाले पर लगातार पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है। समिति से 500 शिक्षकों ने ऋण लिया था, 274 शिक्षकों पर ऋण अभी भी बकाया है। सहकारी बैंक की शिवचौक शाखा का शिक्षकों पर पांच करोड़ बकाया है। समिति के सचिव संजय दहिया की 2016 में मौत होने के बाद आर्यपुरी में स्थित शिक्षक भवन में समिति के कार्यालय में रिकार्ड में आग लगा दी गई। समिति के लोगों ने शिक्षकों से नकद पैसा लेकर हजम कर लिया। इस मामले में शिकायत के बाद तत्कालीन एआर कॉपरेटिव ने एक जांच टीम गठित की। इस टीम का अध्यक्ष अपर जिला सहकारी अधिकारी शोभाराम शर्मा को बनाया गया। टीम ने अपनी जांच में पाया कि समिति में एक करोड़ चार लाख का घोटाला हुआ है। एआर कॉपरेटिव के निर्देश पर शोभाराम शर्मा की ओर से 15 अक्तूबर 2016 को शहर कोतवाली में तहरीर दी गई। आश्चर्य की बात यह रही कि तहरीर पर मुकदमा ही दर्ज नहीं हुआ।
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इसी के चलते एडीजी मेरठ प्रशांत कुमार ने शासन को इस मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी को दिए जाने के लिए पत्र लिखा था। बाद में शासन ने सीबीसीआईडी को मामला सौंप दिया। जांच एजेंसी के इंस्पेक्टर राजीव चतुर्वेदी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना यह है कि सीबीसीआईडी को घोटालेबाजों तक पहुंचने में कितनी सफलता मिलती है।
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