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पहली बरसात में ही ढह गया 16 लाख रुपये से बना नाला
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लछेड़ा में गिरी नाले की दीवार।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। मंसूरपुर क्षेत्र के लछेड़ा गांव की जलनिकासी के लिए 16 लाख रुपये की लागत से बनाया गया नाला पहली बरसात में ही ढह गया। जिला पंचायत ने 15वें वित्त से इस नाले का निर्माण कराया था। अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने जांच शुरू करा दी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच की।
जिला पंचायत सदस्य सचिन करानिया के प्रस्ताव पर लछेड़ा गांव से सीमली-जड़ौदा संपर्क मार्ग की ओर करीब 200 मीटर नाले का प्रस्ताव पास हुआ था। गांव के पानी को नाले के जरिए काली नदी तक ले जाना था। करीब दो माह से निर्माण चल रहा था। चार दिन पहले ही नाले का कार्य पूरा हो गया। बुधवार को बरसात के बाद नाले की एक साइड की दीवार ढह गई। ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने मामले की जानकारी मिलते ही निर्माण विभाग के अभियंता पवन गोयल और अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच कराई। अध्यक्ष ने बताया कि जांच चल रही है, जिस स्तर से भी चूक हुई है, कार्रवाई की जाएगी।
200 मीटर में खर्च हुए थे 16 लाख
नाला निर्माण करीब दो सौ मीटर तक किया गया है। इस पर 16 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। पंचायत सदस्य सचिन करानिया ने बताया कि अभी मिट्टी भराव का कार्य चल रहा है।
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ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल
नाले की एक दीवार ढह जाने के बाद ग्रामीणों ने नाला निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। ग्राम प्रधान कुलदीप कुमार का कहना है कि नाले की चौड़ाई सिर्फ एक मीटर रखी गई है, जबकि दो मीटर किए जाने का प्रस्ताव ग्रामीणों ने दिया था। कम चौड़ाई और मानक के अनुरूप सामग्री का प्रयोग नहीं किए जाने के कारण नाले की दीवार जगह-जगह से टूट गई है।
चार दिन पहले ही लगाया गया था पत्थर
16 जुलाई को नाला निर्माण का पत्थर लगाया गया था, जिस पर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल के नाम भी अंकित कराए गए थे। हालांकि अभी तक उद्घाटन नहीं हुआ था, सिर्फ पत्थर लगाया गया था।
मिट्टी का भराव नहीं होने के कारण बैठ गई दीवार
जिला पंचायत सदस्य सचिन करानिया का कहना है कि नाले का निर्माण अभी शत-प्रतिशत नहीं हुआ है। नाले के दोनों ओर मिट्टी के भराव का कार्य होना है। निर्माण के दौरान एक साइड से कच्चा नाला बनाकर पानी निकाला गया था। बरसात का पानी इसी कच्चे नाले से निकल रहा था। एक तरफ गहराई अधिक होने के कारण नाले की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। दीवार को ठीक कराने का कार्य कराया जाएगा। नाला निर्माण में मानकों का पूरा ध्यान रखा गया है।
जिला पंचायत में बुलाई ठेकेदारों की बैठक
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने बताया कि गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। बृहस्पतिवार को जिला पंचायत में ठेकेदारों की बैठक बुलाई गई है। उधर, बुधवार को भी उन्होंने कर्मचारियों की कांवड़ और निर्माण कार्यों के मद्देनजर बैठक ली। अध्यक्ष ने निर्देश दिए हैं कि कार्य गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए।
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जिला पंचायत सदस्य सचिन करानिया के प्रस्ताव पर लछेड़ा गांव से सीमली-जड़ौदा संपर्क मार्ग की ओर करीब 200 मीटर नाले का प्रस्ताव पास हुआ था। गांव के पानी को नाले के जरिए काली नदी तक ले जाना था। करीब दो माह से निर्माण चल रहा था। चार दिन पहले ही नाले का कार्य पूरा हो गया। बुधवार को बरसात के बाद नाले की एक साइड की दीवार ढह गई। ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने मामले की जानकारी मिलते ही निर्माण विभाग के अभियंता पवन गोयल और अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच कराई। अध्यक्ष ने बताया कि जांच चल रही है, जिस स्तर से भी चूक हुई है, कार्रवाई की जाएगी।
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200 मीटर में खर्च हुए थे 16 लाख
नाला निर्माण करीब दो सौ मीटर तक किया गया है। इस पर 16 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। पंचायत सदस्य सचिन करानिया ने बताया कि अभी मिट्टी भराव का कार्य चल रहा है।
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ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल
नाले की एक दीवार ढह जाने के बाद ग्रामीणों ने नाला निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। ग्राम प्रधान कुलदीप कुमार का कहना है कि नाले की चौड़ाई सिर्फ एक मीटर रखी गई है, जबकि दो मीटर किए जाने का प्रस्ताव ग्रामीणों ने दिया था। कम चौड़ाई और मानक के अनुरूप सामग्री का प्रयोग नहीं किए जाने के कारण नाले की दीवार जगह-जगह से टूट गई है।
चार दिन पहले ही लगाया गया था पत्थर
16 जुलाई को नाला निर्माण का पत्थर लगाया गया था, जिस पर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल के नाम भी अंकित कराए गए थे। हालांकि अभी तक उद्घाटन नहीं हुआ था, सिर्फ पत्थर लगाया गया था।
मिट्टी का भराव नहीं होने के कारण बैठ गई दीवार
जिला पंचायत सदस्य सचिन करानिया का कहना है कि नाले का निर्माण अभी शत-प्रतिशत नहीं हुआ है। नाले के दोनों ओर मिट्टी के भराव का कार्य होना है। निर्माण के दौरान एक साइड से कच्चा नाला बनाकर पानी निकाला गया था। बरसात का पानी इसी कच्चे नाले से निकल रहा था। एक तरफ गहराई अधिक होने के कारण नाले की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। दीवार को ठीक कराने का कार्य कराया जाएगा। नाला निर्माण में मानकों का पूरा ध्यान रखा गया है।
जिला पंचायत में बुलाई ठेकेदारों की बैठक
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने बताया कि गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। बृहस्पतिवार को जिला पंचायत में ठेकेदारों की बैठक बुलाई गई है। उधर, बुधवार को भी उन्होंने कर्मचारियों की कांवड़ और निर्माण कार्यों के मद्देनजर बैठक ली। अध्यक्ष ने निर्देश दिए हैं कि कार्य गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए।