{"_id":"62d2cbee2a1d9b33aa54c8aa","slug":"the-court-sentenced-to-life-imprisonment-the-accused-of-killing-the-lineman","type":"story","status":"publish","title_hn":"Muzaffarnagar Murder Case: लाइनमैन की हत्या के आरोपी को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Muzaffarnagar Murder Case: लाइनमैन की हत्या के आरोपी को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
Sat, 16 Jul 2022 08:02 PM IST
कपिल kapil
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Published by: कपिल kapil
Updated Sat, 16 Jul 2022 08:02 PM IST
सार
हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 19 साल पहले गड्ढा खोदने के विवाद में हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था।
विज्ञापन
अदालत ने सुनाई सजा
विस्तार
मुजफ्फरनगर में खतौली के छछरपुर गांव में 19 साल पहले टेलीफोन की लाइन ठीक करने गए लाइनमैन मिंटू की हत्या के मामले में आरोपी को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। गड्ढा खोदने के विवाद में हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था। न्यायालय विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति जनजाति के पीठासीन अधिकारी जमेशद अली ने फैसला सुनाया।
विज्ञापन
विशेष लोक अभियोजक यशपाल सिंह और सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सहदेव सिंह ने बताया कि खतौली क्षेत्र के गदनपुर गांव निवासी मिंटू बीएसएनएल की लाइन ठीक करता था। नौ अक्तूबर 2003 को छछरपुर गांव से कॉल आने के बाद सुबह 10 बजे वह टेलीफोन की लाइन ठीक करने चला गया।, लाइन ठीक करने के दौरान गांव के सतेंद्र पक्ष से झगड़ा हुआ। मामला बढ़ने पर फावड़ा मारकर मिंटू की हत्या कर दी गई थी।
विज्ञापन
इसके बाद मृतक के पिता ने सतेंद्र और अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपी सतेंद्र के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। प्रकरण की सुनवाई न्यायालय विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति जनजाति के पीठासीन अधिकारी जमेशद अली ने की। धारा 302 में आरोपी को आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: PHOTOS: इश्क में ऐसी वारदात, खौफनाक कहानी सुनकर अफसर भी हैरान, प्रेमिका के शव से लिपटकर खूब रोया था आशिक
मानसिक अस्पताल में हुआ आरोपी का उपचार
वारदात के बाद हत्या के अभियुक्त सतेंद्र का उपचार वाराणसी के मानसिक अस्पताल में भी कराया गया। इसी वजह से अदालत में लंबे समय तक सुनवाई नहीं हो सकी। मानसिक चिकित्सालय के निदेशक ने 24 मई को पत्र भेजकर जानकारी दी कि सतेंद्र मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है। इसके बाद दोबारा प्रकरण की सुनवाई हुई।