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कड़ाके की ठंड में जनजीवन ठहरा, पारा 3.1 डिग्री सेल्सियस पहुंचा

Mon, 25 Dec 2017 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Mon, 25 Dec 2017 12:17 AM IST
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Temperature reached 3.1 degrees Celsius
मुजफ्फरनगर में कोहरे के बीच गुजरते वाहन। - फोटो : अमर उजाला
शीतलहर और कोहरे ने रविवार को जिंदगी की रफ्तार पर रोक लगा दी। सुबह के समय घना कोहरा होने के कारण दिन में 11 बजे तक अंधेरे जैसी स्थिति रही। आमने-सामने के वाहन भी दिखाई नहीं दिए। शीतलहर और ठंड के चलते रविवार इस मौसम का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा। न्यूनतम तापमान 3.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। दोपहर बाद सूरज निकला, लेकिन ठंड के सामने सूरज की गर्मी बेअसर ही रही। 
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रविवार को ठंड अपने पूरे पीक पर रही। शीतलहर के चलते आम आदमी कांपता दिखाई दिया। इतनी अधिक ठंड थी कि आम जनमानस पूरी तरह प्रभावित हो गया। ठंड के साथ सुबह के समय आए घने कोहरे ने मानो जिंदगी थाम सी दी। सुबह पांच बजे से दिन में 11 बजे तक इतना घना कोहरा छाया कि चारों ओर अंधेरा सा दिखाई दिया।
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सड़कों पर हालात ये थे कि सामने के वाहनों की लाइट भी दिखाई नहीं दी। इसके चलते शहर में कई स्थानों पर वाहन आपस में टकराए भी, लेकिन गति धीमी होने के कारण ज्यादा हानि नहीं हुई, जिन लोगों को सुबह के समय अपने काम से जाना था उनके सामने समस्या पैदा हुई। वाहन चलाना तो अलग बात सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल रहा।
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दिन में दोपहर के बाद सूरज की रोशनी दिखाई दी, लेकिन ठंड के सामने सूर्य देवता की गर्मी भी बेअसर ही दिखाई दी। मौसम में ठंड इतनी अधिक थी कि शाम को तीन बजे के बाद ही लोग ठंड में कांपते नजर आए। रविवार का दिन इस मौसम का अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा। न्यूनतम तापमान यहां 3.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मौसम में आर्द्रता 97 प्रतिशत रही। ठंड में पशु-पक्षी भी आसरा ढूंढते नजर आए। 

दोपहर को खुले बाजार 
मुजफ्फरनगर। सुबह को घना कोहरा छाए रहने के कारण बाजार भी प्रभावित हुए। सुबह को नौ बजे खुलने वाले बाजार कोहरे के कारण 11 बजे के बाद ही खुले। अंधेरा और ठंड के कारण दुकानदार देर से दुकानों पर पहुंचे। आम जनता का आवागमन भी दोपहर बाद ही शुरु हो पाया। 

अटेंशन प्लीज! कोहरे में इस रूट की सभी ट्रेनें लेट हैं..
मुजफ्फरनगर। कोहरे की मार से रेलवे संचालन भी लड़खड़ा गया है। एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन घंटों की देरी से चल रही है। रविवार को भी ट्रेनों का बुरा हाल रहा है। वहीं, सड़क यातायात भी चरमरा गया है। रोडवेज बसें भी दिन ढलते ही डिपो का रुख कर रही है। इससे अधिक परेशानियां बढ़ गई। आम यात्रियों के साथ दूरदराज तक जाने वाले लोग हलकान हैं। 

दिसंबर के अंतिम दिनों में सर्दी अपने रौद्र रूप में आ गई है। कोहरा और धुंध ने हाल-बेहाल कर दिया है। बढ़ती धुंध और कोहरे से रेलवे संचालन भी बिगड़ गया है। कोहरे से बेपटरी हुई ट्रेनें लाख जतन के बाद भी पटरी पर नहीं लौट रही है। रविवार को एक्सप्रेस के साथ पैसेंजर अपने निर्धारित समय से लेट चल रही है। सबसे अधिक छत्तीसगढ़ ने रुलाया। यह ट्रेन रविवार को नौ घंटे से अधिक लेट रही है।

इसके अलावा भी देहरादून एक्सप्रेस, योग एक्सप्रेस, इंदौर एक्सप्रेस, कोच्चीवली, कटरा स्पेशल आदि ट्रेन भी अपने निर्धारित समय से एक घंटे से लेकर ढाई घंटे तक देरी से पहुंची है। जबकि अंबाला, दिल्ली, सहारनपुर पैसेंजर ट्रेन पर भी कोहरे की मार पड़ी है। यह सभी ट्रेन एक घंटे की देरी चली है।

ऐसे में आम यात्रियों के साथ आरक्षण वाले यात्रियों पर भी प्रभाव पड़ रहा है। उधर, रोडवेज की भी स्थिति बिगड़ रही है। दिन ढलते ही बसें डिपो में पहुंच रही है। ऐसे में आय भी गड़बड़ा रही है। जबकि सुबह भी बसों के टाइम में परिवर्तन हो गया है। अब डिपो से पहली बस छह बजे के बजाए साढ़े छह बजे छूट रही है। 

ख्याल रखें, टीबी रोगियों के लिए खतरा है ठंड
बढ़ती ठंड और कोहरा टीबी के मरीजों के लिए खतरे से कम नहीं है। अत्यधिक ठंड होने से मरीजों में खांसी का प्रभाव तेजी से बढ़ता है, जो उनके लिए नुकसानदायक है। कोहरे के कारण सांस लेने में भी दिक्कतें खड़ी होती है। क्योंकि कोहरे के साथ प्रदूषण अतिसूक्ष्म कण हवा में तैरते हैं, जो सांस के रास्ते शरीर में प्रवेश करती है। 

जनवरी माह से दिसंबर तक जनपद में करीब 4700 टीबी के मरीज मिले हैं। इनमें महिलाओं के साथ बच्चे भी शामिल है, जिन्हें टीबी ने जकड़ रखा है। एक नवंबर से टीबी की दवा में बदलाव किया गया है। यह दवा सप्ताह में दो दिन के बजाए रोजाना की गई है, जो कि वजन के हिसाब से दी जा रही है।

इस योजना से रोगियों को लाभ तो हुआ है, लेकिन बढ़ती ठंड रोगियों के लिए मुसीबत बन गई है। सुबह और शाम की सर्दी टीबी ग्रस्त रोगियों के लिए अधिक घातक है। क्योंकि इस समयावधि में खांसी तेजी से उठती है, जो कि कई-कई घंटे तक जारी रहती है। कोहरे और धुंध के चलते अधिक परेशानी है।


इस मौसम में सांस लेने में तकलीफ पैदा होती है। क्षय रोग विभाग के सीनियर सुपरवाइजर विपिन कुमार ने बताया कि टीबी के मरीजों पर सर्दी कोई खास प्रभाव नहीं डालती है, हालांकि सांस लेने में दिक्कत जरूर होती है। नई योजना से दी जा रही है दवा से रोगियों को काफी आराम मिल रहा है। सर्दी में मरीजों को डॉट्स केंद्रों पर सुबह के बजाए 10 बजे के बाद बुलाया जा रहा है। 
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