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प्रयाग कुंभ में लिए संकल्प को पूरा कर गए शिक्षा ऋषि
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 12 Jul 2018 12:34 AM IST
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शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम।
- फोटो : अमर उजाला
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मोरना के शुकतीर्थ से निष्काम कर्मयोगी स्वामी कल्याण देव के तप, त्याग और अथक परिश्रम की अमिट यादें जुड़ी हैं। भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय से मंत्रणा के बाद वीतराग संत ने शुकदेव मंदिर का भूमि पूजन अलवर नरेश से कराया था।
रेत के टीलों से घिरा महाभारत कालीन तीर्थ उस वक्त लुप्तप्राय था। महामुनि श्री शुकदेव की श्रीमद्भागवत कथा के साक्षी अक्षय वट वृक्ष के टीले को दानवीर भक्तों से पक्का करा कर उन्होंने तीर्थ के जीर्णोद्धार की संकल्प यात्रा प्रारंभ की थी।
वीतराग स्वामी कल्याण देव की 14 वीं पुण्यतिथि पर उनके कर्मयोग की स्मृतियां ताजा हो गई है। स्वामी करपात्री और स्वामी कृष्णाबोधाश्रम जैसे देश के महान संतों ने वर्ष 1944 में प्रयाग कुंभ में स्वामी कल्याण देव को पौराणिक तीर्थ शुक्रताल के जीर्णोद्धार का संकल्प कराया था।
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संत ने श्री शुकदेव आश्रम सेवा समिति की स्थापना की और देश के दानवीरों से सहयोग मांगा। राम दरबार के संस्थापक पंडित रामानंद एवं शिवकुमार शर्मा बंधुओं की मदद से चंदा एकत्रित हुआ।
पावन टीले को पक्का बनाया गया। चढ़ाई को सीढ़ियां बनवाई गई। शुकदेव मंदिर भूमि पूजन के लिए शिक्षा ऋषि ने पंडित मदन मोहन मालवीय से सलाह ली। मालवीय ने कहा कि शुकदेव मंदिर का भूमि पूजन देश में सात्विक प्रवृत्ति के धर्मात्मा राजा से कराया जाए। विचार मंथन के बाद अलवर नरेश राजा तेज सिंह को चुना गया। 18 नवंबर, 1945 को शुक्रताल में महाराजा संवाई सर तेज सिंह पधारे।
पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते है कि उस समय एक करोड़ गायत्री मंत्र का अनुष्ठान कराया गया था, जिसमें काशी, वृंदावन और प्रयाग से आचार्य, पुरोहित जुटे थे। तीन वर्ष उपरांत तीन अक्तूबर 1948 को मंदिर का शिलान्यास संपन्न हुआ तथा 27 अप्रैल 1956 को वृंदावन के स्वामी अखंडानंद सरस्वती के सानिध्य में तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कराई। संत विभूति स्वामी कल्याण देव ने शुकतीर्थ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में अनेक मंदिर और भागवत भवन है।
14 जुलाई को श्रद्धांजलि समारोह में जुटेंगे श्रद्धालु
मोरना। शिक्षा ऋषि, पदम भूषण वीतराग स्वामी कल्याण देव के श्रद्धांजलि समारोह की तैयारी चल रही है। शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक की पावन स्मृति में देश भर से भागवत भक्त शुकतीर्थ पहुंचने लगे है।
पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने बताया कि शनिवार 14 जुलाई को समाधि मंदिर में चरणाभिषेक के बाद यज्ञ में पूर्णाहूति दी जाएगी। स्वामी कल्याण देव भागवत भवन का शिलान्यास होगा। श्री डोंगरे भागवत भवन में सुबह साढे दस बजे श्रद्धांजलि समारोह होगा। संत-महात्मा, शिक्षाविद्, राजनीतिज्ञ, समाजसेवी और श्रद्धालु जुटेंगे।
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रेत के टीलों से घिरा महाभारत कालीन तीर्थ उस वक्त लुप्तप्राय था। महामुनि श्री शुकदेव की श्रीमद्भागवत कथा के साक्षी अक्षय वट वृक्ष के टीले को दानवीर भक्तों से पक्का करा कर उन्होंने तीर्थ के जीर्णोद्धार की संकल्प यात्रा प्रारंभ की थी।
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वीतराग स्वामी कल्याण देव की 14 वीं पुण्यतिथि पर उनके कर्मयोग की स्मृतियां ताजा हो गई है। स्वामी करपात्री और स्वामी कृष्णाबोधाश्रम जैसे देश के महान संतों ने वर्ष 1944 में प्रयाग कुंभ में स्वामी कल्याण देव को पौराणिक तीर्थ शुक्रताल के जीर्णोद्धार का संकल्प कराया था।
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संत ने श्री शुकदेव आश्रम सेवा समिति की स्थापना की और देश के दानवीरों से सहयोग मांगा। राम दरबार के संस्थापक पंडित रामानंद एवं शिवकुमार शर्मा बंधुओं की मदद से चंदा एकत्रित हुआ।
पावन टीले को पक्का बनाया गया। चढ़ाई को सीढ़ियां बनवाई गई। शुकदेव मंदिर भूमि पूजन के लिए शिक्षा ऋषि ने पंडित मदन मोहन मालवीय से सलाह ली। मालवीय ने कहा कि शुकदेव मंदिर का भूमि पूजन देश में सात्विक प्रवृत्ति के धर्मात्मा राजा से कराया जाए। विचार मंथन के बाद अलवर नरेश राजा तेज सिंह को चुना गया। 18 नवंबर, 1945 को शुक्रताल में महाराजा संवाई सर तेज सिंह पधारे।
पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते है कि उस समय एक करोड़ गायत्री मंत्र का अनुष्ठान कराया गया था, जिसमें काशी, वृंदावन और प्रयाग से आचार्य, पुरोहित जुटे थे। तीन वर्ष उपरांत तीन अक्तूबर 1948 को मंदिर का शिलान्यास संपन्न हुआ तथा 27 अप्रैल 1956 को वृंदावन के स्वामी अखंडानंद सरस्वती के सानिध्य में तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कराई। संत विभूति स्वामी कल्याण देव ने शुकतीर्थ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में अनेक मंदिर और भागवत भवन है।
14 जुलाई को श्रद्धांजलि समारोह में जुटेंगे श्रद्धालु
मोरना। शिक्षा ऋषि, पदम भूषण वीतराग स्वामी कल्याण देव के श्रद्धांजलि समारोह की तैयारी चल रही है। शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक की पावन स्मृति में देश भर से भागवत भक्त शुकतीर्थ पहुंचने लगे है।
पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने बताया कि शनिवार 14 जुलाई को समाधि मंदिर में चरणाभिषेक के बाद यज्ञ में पूर्णाहूति दी जाएगी। स्वामी कल्याण देव भागवत भवन का शिलान्यास होगा। श्री डोंगरे भागवत भवन में सुबह साढे दस बजे श्रद्धांजलि समारोह होगा। संत-महात्मा, शिक्षाविद्, राजनीतिज्ञ, समाजसेवी और श्रद्धालु जुटेंगे।