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सर्वे कंपनी ब्लैक लिस्ट, अधर में 45 हजार आवास

Sun, 28 Nov 2021 12:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 28 Nov 2021 12:36 AM IST
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Survey company black list, 45 thousand houses in Adhar
सिसौली के मुकेश का मकान, सर्वे हो चुका, किस्त् नहीं मिली। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
सर्वे कंपनी ब्लैक लिस्ट, अधर में 45 हजार आवास
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मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के सर्वे के लिए अधिकृत की गई स्पेस कंबाइन कंसल्टेंट समेत 11 कंपनियों को सूडा लखनऊ ने ब्लैक लिस्ट कर दिया है। सर्वे में निर्धारित से अधिक संख्या में अपात्र दर्शाने, समय पर सर्वे नहीं किए जाने और शुरूआती सर्वे में लापरवाही को इस कार्रवाई की वजह बताया गया है। अकेले मुजफ्फरनगर और शामली में ही 45 हजार आवासों का सर्वे प्रभावित होने का अनुमान है। डिबार किए जाने के विरोध में कंपनी हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।
स्पेस कंबाइन कंसल्टेंट मुजफ्फरनगर और शामली जिले सर्वे का कार्य कर रही थी। दोनों जिलों में अब तक 33 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं, जबकि करीब 12 हजार लोगों के नए आवेदन पर सर्वे का कार्य किया जाना था। कंपनी पर कार्रवाई से सर्वे और किस्त जारी करने का कार्य लटक जाएगा। लाभार्थियों को अब किस्त के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जिला विकास नगरीय अभिकरण (डूडा) के प्रभारी परियोजना निदेशक संजीव सैनी ने कंपनी को ब्लैक लिस्ट किए जाने की पुष्टि की है। मुजफ्फरनगर जिले में 18 हजार 145 और शामली जिले में 14 हजार 858 आवास स्वीकृत हो चुके हैं।
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मुजफ्फरनगर में योजना की स्थिति
किस्त लाभार्थी
प्रथम 16902
द्वितीय 15110
तृतीय 11776
शामली में योजना की स्थिति
किस्त लाभार्थी
प्रथम 4046
द्वितीय 12670
तृतीय 9065
प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है। 25 जून, 2015 को योजना की शुरूआत की गई थी। आर्थिक तौर पर कमजोर परिवारों को पक्की छत मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया था।
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सर्वे के लिए दी जाती है धनराशि
कंपनी को सरकार की ओर से सर्वे के लिए लगभग 10 हजार रुपये की धनराशि दी जा रही थी। सर्वे सूची में निर्धारित 25 फीसदी से अधिक लोगों को अपात्र दर्शाया गया है।
इस तरह किया जाता है सर्वे
आवास योजना में आवेदन के बाद सर्वे कंपनी का कार्य शुरू होता है। पात्रता दिलाने, पहली, दूसरी और तीसरी किस्त के बाद मकानों पर पहुंचकर कंपनी के कर्मचारी सर्वे करते हैं।
सालों से लटकी है आवास किस्त
कंपनी पर कार्रवाई की वजह सर्वे में दी भी बताई जा रही है। कई लाभार्थी ऐसे हैं, जिनकी किस्त लंबे समय से लटकी हुई है। लाभार्थी बार-बार अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे। जिला प्रशासन से लेकर लखनऊ तक किस्तों में देरी का मामला गूंजा।

भटक रहे लोग सर्वे पर उठा रहे सवाल
आवास के लिए भटक रहे लोग सर्वे पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कंपनी के कर्मचारी लापरवाही से सर्वे करते हैं। डीपीआर बनते ही सरकार को कंपनी के खाते में तीन हजार रुपये भेजने होते हैं। हालांकि अपात्र पाए जाने पर यह धनराशि वापस होती है। लेकिन इससे प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है।

पीएम आवास योजना के लिए आवेदन कर चुके व्यक्ति का मकान

पीएम आवास योजना के लिए आवेदन कर चुके व्यक्ति का मकान- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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