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नवीन की मौत के बाद सहम गए छात्र
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मांडला का आशीष परिवार के साथ
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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नवीन की मौत के बाद सहम गए छात्र
मुजफ्फरनगर। जीवना गांव की दिव्यांशी बालियान अपने घर लौट आई है। खारकीव में साथी छात्र नवीन शेखरप्पा की मौत और पोलैंड बॉर्डर से वतन वापसी के लिए लंबी जद्दोजहद से मानों नई जिंदगी मिली है। छात्रा ने कहा कि कई बार उम्मीद का सूरज डूबने लगा, लेकिन हिम्मत से वह बॉर्डर पर डटे रहे और स्वदेश लौटने में कामयाबी मिल गई।
शहर के देवपुरम में रह रहे प्रदीप बालियान की बेटी दिव्यांशी खारकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस चौथे वर्ष की छात्रा है। घर लौटी छात्रा ने बताया कि अमेरिका, सऊदी अरब, भारत, इजराइल और ओमान के 14 छात्र-छात्राओं का ग्रुप रूस के हमले के बाद एक मार्च को बंकरों की ओर बढ़ रहा था। लेकिन इसमें दो छात्र खाने का सामान ले चले गए। बाकी छात्र बंकर में थे, कर्नाटक के नवीन को गोली लगने की सूचना और फोटो व्हाट्सएप ग्रुप पर मिला तो छात्र बदहवास और असहाय स्थिति में थे। कई घंटे तक किसी को कुछ भी नहीं सूझ रहा था। लेकिन हिम्मत से रास्ते बनें। किसी तरह पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे।
बॉर्डर पर अब तक की जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर देखा। बर्फबारी में रातभर खड़े रहे। बॉर्डर पर खड़े-खड़े ही सूरज डूबा और यहीं खड़े-खड़े सूरज निकल भी आया। यह बेहद मुश्किलों भरा था। अपने गांव और घर पहुंचे तो जैसे जन्नत में लौट आए हैं। पिता प्रदीप बालियान और माता कविता ने खुशी जताई। प्रदीप का कहना है कि बेटी बेहद मुश्किल वक्ता से गुजरकर अपने घर लौटी है।
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पालिकाध्यक्ष ने की वापस लौटने वाले छात्र-छात्राओं से बात
मुजफ्फरनगर। यूक्रकन से हिंदुस्तान वापस आए छात्र-छात्राओं से चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने मुलाकात की। यूक्रेन से लौटी ईशा एवं मोहम्मद कैफ से मिलने पहुंची चेयरपर्सन ने कहा कि युवाओं ने हौसला दिखाया। चेयरपर्सन ने छात्रों के माता-पिता के हौसले की प्रशंसा की। लेकिन संकट के दिन खत्म हुए छात्र-छात्राएं परिवार में सुरक्षित है। इस दौरान अशोक अग्रवाल भी मौजूद रहे।
पुरकाजी। कीव में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया गांव मांडला निवासी आशीष पंवार अपने वतन लौट आया। उसके घर पहुंचते ही परिजनों के चेहरों पर खुशी छा गई।
माता ग्राम प्रधान सविता देवी की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। पिता सुनील गुर्जर का कहना है कि बेहद मुश्किल हालात से बेटा घर लौटा है। 24 फरवरी में युद्ध शुरू हो जाने पर वहीं फंस गया था। आशीष पंवार ने बताया कि उसने आसमान से आग बरसती हुई देखी है। आशीष ने बताया कि 10 घंटे खड़े होकर ट्रेन में सफर कर एयरपोर्ट पहुंचे। कीव में लाशें इधर-उधर पड़ी थी।
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मुजफ्फरनगर। जीवना गांव की दिव्यांशी बालियान अपने घर लौट आई है। खारकीव में साथी छात्र नवीन शेखरप्पा की मौत और पोलैंड बॉर्डर से वतन वापसी के लिए लंबी जद्दोजहद से मानों नई जिंदगी मिली है। छात्रा ने कहा कि कई बार उम्मीद का सूरज डूबने लगा, लेकिन हिम्मत से वह बॉर्डर पर डटे रहे और स्वदेश लौटने में कामयाबी मिल गई।
शहर के देवपुरम में रह रहे प्रदीप बालियान की बेटी दिव्यांशी खारकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस चौथे वर्ष की छात्रा है। घर लौटी छात्रा ने बताया कि अमेरिका, सऊदी अरब, भारत, इजराइल और ओमान के 14 छात्र-छात्राओं का ग्रुप रूस के हमले के बाद एक मार्च को बंकरों की ओर बढ़ रहा था। लेकिन इसमें दो छात्र खाने का सामान ले चले गए। बाकी छात्र बंकर में थे, कर्नाटक के नवीन को गोली लगने की सूचना और फोटो व्हाट्सएप ग्रुप पर मिला तो छात्र बदहवास और असहाय स्थिति में थे। कई घंटे तक किसी को कुछ भी नहीं सूझ रहा था। लेकिन हिम्मत से रास्ते बनें। किसी तरह पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे।
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बॉर्डर पर अब तक की जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर देखा। बर्फबारी में रातभर खड़े रहे। बॉर्डर पर खड़े-खड़े ही सूरज डूबा और यहीं खड़े-खड़े सूरज निकल भी आया। यह बेहद मुश्किलों भरा था। अपने गांव और घर पहुंचे तो जैसे जन्नत में लौट आए हैं। पिता प्रदीप बालियान और माता कविता ने खुशी जताई। प्रदीप का कहना है कि बेटी बेहद मुश्किल वक्ता से गुजरकर अपने घर लौटी है।
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पालिकाध्यक्ष ने की वापस लौटने वाले छात्र-छात्राओं से बात
मुजफ्फरनगर। यूक्रकन से हिंदुस्तान वापस आए छात्र-छात्राओं से चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने मुलाकात की। यूक्रेन से लौटी ईशा एवं मोहम्मद कैफ से मिलने पहुंची चेयरपर्सन ने कहा कि युवाओं ने हौसला दिखाया। चेयरपर्सन ने छात्रों के माता-पिता के हौसले की प्रशंसा की। लेकिन संकट के दिन खत्म हुए छात्र-छात्राएं परिवार में सुरक्षित है। इस दौरान अशोक अग्रवाल भी मौजूद रहे।
पुरकाजी। कीव में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया गांव मांडला निवासी आशीष पंवार अपने वतन लौट आया। उसके घर पहुंचते ही परिजनों के चेहरों पर खुशी छा गई।
माता ग्राम प्रधान सविता देवी की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। पिता सुनील गुर्जर का कहना है कि बेहद मुश्किल हालात से बेटा घर लौटा है। 24 फरवरी में युद्ध शुरू हो जाने पर वहीं फंस गया था। आशीष पंवार ने बताया कि उसने आसमान से आग बरसती हुई देखी है। आशीष ने बताया कि 10 घंटे खड़े होकर ट्रेन में सफर कर एयरपोर्ट पहुंचे। कीव में लाशें इधर-उधर पड़ी थी।

यूक्रेन से अपने गांव भंडूरा लौटा मुनीर आलम- फोटो : MUZAFFARNAGAR

यूक्रेन से लौटी ईशा से मिलने पहुंची पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल- फोटो : MUZAFFARNAGAR

यूक्रेन से लौटी दिव्यांशी बालियान अपने परिवार के साथ- फोटो : MUZAFFARNAGAR