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निरोग रहना है तो स्वाद को भूल जाओ
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मंगलवार को मुजफ्फरनगर जिले के शुकतीर्थ में श्रीराम कथा सुनाते कथावाचक मोरारी बापू।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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निरोग रहना है तो स्वाद को भूल जाओ
मोरना (मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में कथा मर्मज्ञ मोरारी बापू ने अमृत वर्षा करते हुए कहा कि निरोग रहना है तो स्वाद को भूल जाओ। जो कड़वा अन्न और वचनों को शांत मन से ग्रहण करेगा वो ही निरोगी रहेगा। अभिमान से गुणों का, शराब पीने से कुल का विनाश होता है। साधु जन को स्वाद नहीं भाता, वह तो हरिनाम को रस चखकर ही प्रभु भक्ति में लीन हो जाता है। श्रीराम कथा का श्रवण करो, सांसारिक व्यसन स्वयं दूर हो जाएंगे।
शुकतीर्थ में पतित पावनी मां गंगा के तट पर चल रही कथा में मोरारी बापू ने कहा कि भक्ति के प्रेम को अनपढ़ भी समझता है। भगवान से मांगने की इच्छा रखो। जब तक आप बिके नहीं, तब तक आप मूल्यवान हैं। मोरारी बापू ने कहा कि मुझे किसी ने खरीदा नहीं मैं तो स्वयं हरि के चरणों में बिक चुका हूं। धर्म की स्थापना के लिए श्रीराम भगवान महापुरुष प्रकट होते हैं। फकीरों से मांगो तो आशीर्वचन में बहुत कुछ मिलेगा। अभिमान की जंग में हार होती है। आत्मनिर्भरता विश्वास पैदा करती है। कुछ लोग स्याने होते हैं, जो हर परिस्थिति को परिपूर्ण करें , उसे स्याना कहते हैं। अति स्याना वह होता है, जो सामने वाले का भी शुभ सोचे। आंतरिक संपदा वाला मानव ही मूल्यवान होता है। प्रभु हमें ऐसी माला पहनाए हार की जो हमें जीत लगे। सूपुर्णखा ने रावण को हरि से न उलझने के लिए समझाया था, लेकिन जब मती मारी जाती है तो कुल का विनाश होना तय है। विनम्रता न हो तो गुण नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि चिंता करने वाले को कम निंद्रा आती है, जो प्रभु की भक्ति करते है वह दुखों से दूर रहते हैं।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में कथा मर्मज्ञ मोरारी बापू ने अमृत वर्षा करते हुए कहा कि निरोग रहना है तो स्वाद को भूल जाओ। जो कड़वा अन्न और वचनों को शांत मन से ग्रहण करेगा वो ही निरोगी रहेगा। अभिमान से गुणों का, शराब पीने से कुल का विनाश होता है। साधु जन को स्वाद नहीं भाता, वह तो हरिनाम को रस चखकर ही प्रभु भक्ति में लीन हो जाता है। श्रीराम कथा का श्रवण करो, सांसारिक व्यसन स्वयं दूर हो जाएंगे।
शुकतीर्थ में पतित पावनी मां गंगा के तट पर चल रही कथा में मोरारी बापू ने कहा कि भक्ति के प्रेम को अनपढ़ भी समझता है। भगवान से मांगने की इच्छा रखो। जब तक आप बिके नहीं, तब तक आप मूल्यवान हैं। मोरारी बापू ने कहा कि मुझे किसी ने खरीदा नहीं मैं तो स्वयं हरि के चरणों में बिक चुका हूं। धर्म की स्थापना के लिए श्रीराम भगवान महापुरुष प्रकट होते हैं। फकीरों से मांगो तो आशीर्वचन में बहुत कुछ मिलेगा। अभिमान की जंग में हार होती है। आत्मनिर्भरता विश्वास पैदा करती है। कुछ लोग स्याने होते हैं, जो हर परिस्थिति को परिपूर्ण करें , उसे स्याना कहते हैं। अति स्याना वह होता है, जो सामने वाले का भी शुभ सोचे। आंतरिक संपदा वाला मानव ही मूल्यवान होता है। प्रभु हमें ऐसी माला पहनाए हार की जो हमें जीत लगे। सूपुर्णखा ने रावण को हरि से न उलझने के लिए समझाया था, लेकिन जब मती मारी जाती है तो कुल का विनाश होना तय है। विनम्रता न हो तो गुण नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि चिंता करने वाले को कम निंद्रा आती है, जो प्रभु की भक्ति करते है वह दुखों से दूर रहते हैं।
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