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कांग्रेस की सीट पर सपा का भी पर्चा, गठबंधन में कांग्रेस के खाते में चली गई थी सीट
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 25 Jan 2017 12:31 AM IST
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कलक्ट्रेट में तलाशी लेती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा चुनावों में निर्दलीय भी बड़े दलों को टक्कर देने के लिए मैदान में उतरे हैं। शहर सीट पर पुराने राजनीतिक घराने के जाकिर अली राना के आने से मुकाबला और रोमांचक हो गया है। पुरकाजी सीट पर अभी पेंच फंसता नजर आ रहा है। गठबंधन में सीट कांग्रेस के खाते में जाने के बावजूद पूर्व मंत्री उमा किरन ने सपा के सिंबल पर अपना पर्चा भर दिया है।
चुनाव की तिथि नजदीक आते ही सियासी ताप बढ़ता जा रही है। टिकटों की आपाधापी में कई चीजें अभी भी गफलत में हैं। जिले में सपा और कांग्रेस के गठबंधन में पुरकाजी सुरक्षित सीट कांग्रेस के कोटे में गई है। कांग्रेस ने यहां से अपना प्रत्याशी पूर्व मंत्री दीपक कुमार को चुनाव मैदान में उतारा है। सपा से टिकट कटने से पहले ही यहां उमा किरन ने सपा का सिंबल ले लिया था। उमा ने आज अंतिम दिन अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया।
उमा का कहना है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें लखनऊ बुलाकर सिंबल दिया था, इसके बाद उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई कि गठबंधन में सीट छोड़नी है या नहीं। हाईकमान से जो निर्देश मिलेगा, उसके आधार पर काम करेंगी। उमा के इस कदम से दीपक की परेशानी बढ़ गई है। उमा के बेटे विक्रांत सिंह ने भी इसी सीट पर निर्दलीय के रूप में परचा भरा है। इसके अलावा राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने वाले जाकिर राना ने भी शहर सीट से निर्दलीय के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया है।
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शहर सीट पर किसी बड़े दल से कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं है। शहर सीट पर सर्वाधिक एक लाख 15 हजार मुस्लिम वोट हैं, ऐसे में मुस्लिमों के दम पर ताल ठोक रहे सपा और बसपा की मुश्किलें बढ़ना तय है। जाकिर राना पूर्व सांसद कादिर राना के भाई हैं। इस बार चुनाव में इसी परिवार के शाहनवाज राना खतौली से रालोद प्रत्याशी हैं, जबकि विधायक नूरसलीम राना चरथावल से बसपा के टिकट पर दोबारा से चुनाव मैदान में हैं। कादिर राना की पत्नी सईदा बेगम भी बुढ़ाना से चुनाव लड़ रही हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक नकली सिंह के बेटे एवं सपा नेता ठाकुर उदयपाल सिंह की पत्नी उर्मिला सिंह ने भी लोकदल से परचा भरा है। इनकी ठाकुर वोटरों में मजबूत पकड़ मानी जाती है। यह भी दूसरे दलों के लिए परेशानी खड़ी करेंगे।
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चुनाव की तिथि नजदीक आते ही सियासी ताप बढ़ता जा रही है। टिकटों की आपाधापी में कई चीजें अभी भी गफलत में हैं। जिले में सपा और कांग्रेस के गठबंधन में पुरकाजी सुरक्षित सीट कांग्रेस के कोटे में गई है। कांग्रेस ने यहां से अपना प्रत्याशी पूर्व मंत्री दीपक कुमार को चुनाव मैदान में उतारा है। सपा से टिकट कटने से पहले ही यहां उमा किरन ने सपा का सिंबल ले लिया था। उमा ने आज अंतिम दिन अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया।
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उमा का कहना है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें लखनऊ बुलाकर सिंबल दिया था, इसके बाद उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई कि गठबंधन में सीट छोड़नी है या नहीं। हाईकमान से जो निर्देश मिलेगा, उसके आधार पर काम करेंगी। उमा के इस कदम से दीपक की परेशानी बढ़ गई है। उमा के बेटे विक्रांत सिंह ने भी इसी सीट पर निर्दलीय के रूप में परचा भरा है। इसके अलावा राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने वाले जाकिर राना ने भी शहर सीट से निर्दलीय के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया है।
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शहर सीट पर किसी बड़े दल से कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं है। शहर सीट पर सर्वाधिक एक लाख 15 हजार मुस्लिम वोट हैं, ऐसे में मुस्लिमों के दम पर ताल ठोक रहे सपा और बसपा की मुश्किलें बढ़ना तय है। जाकिर राना पूर्व सांसद कादिर राना के भाई हैं। इस बार चुनाव में इसी परिवार के शाहनवाज राना खतौली से रालोद प्रत्याशी हैं, जबकि विधायक नूरसलीम राना चरथावल से बसपा के टिकट पर दोबारा से चुनाव मैदान में हैं। कादिर राना की पत्नी सईदा बेगम भी बुढ़ाना से चुनाव लड़ रही हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक नकली सिंह के बेटे एवं सपा नेता ठाकुर उदयपाल सिंह की पत्नी उर्मिला सिंह ने भी लोकदल से परचा भरा है। इनकी ठाकुर वोटरों में मजबूत पकड़ मानी जाती है। यह भी दूसरे दलों के लिए परेशानी खड़ी करेंगे।