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चेहल्लुम के जुलूस में किया खूनी मातम
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हनुमान चौक पर खूनी मातम करते शिया सोगवार।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
चेहल्लुम के जुलूस में सोगवारों ने किया मातम
मुजफ्फरनगर। चेहल्लुम पर शिया सोगवारों ने मातमी जुलूस निकालकर नदी पार करबला में ताजिए को दफनाया। इससे पूर्व, आयोजित मजलिस में मौलाना ने इमाम हुसैन की शहादत पर रोशनी डाली। यह दास्तां सुनकर सोगवारों की आंखें नम हो गईं।
रविवार सुबह किदवईनगर स्थित जाहिद हॉल में आयोजित मजलिस में मौलाना नामदार अब्बास ने करबला में इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र किया, जिसे सुनकर सोगवारों की आंखों में आंसू आ गए। मजलिस में इंतजार हुसैन जैदी ने कहा कि चेहल्लुम इंसानियत की खातिर दी गई कुरबानियों को एक बार याद करने का दिन है। यादों का एक सफर और तय हुआ है। उन्होंने कहा कि यह मत पूछिए कि इमाम हुसैन ने करबला में क्या खोया, बल्कि यह पूछिए कि हुसैन ने दास्ताने करबला के बाद क्या पाया। तकरीर के बाद शहीदाने करबला के ताबूत अलम, जुलजुनाह बरामद हुआ। मर्सिया ख्वानी हैदर मेहंदी संधावली ने की। शहर की अंजुमने नोहाख्वानी एवं सीनाजनीं करते हुए शहर के मुख्य बाजार पारसनाथ, अबपुरा, लोहिया बाजार, घासमंडी, हनुमान चौक से नदी रोड होते हुए करबला पहुंची, जहां ताजिए दफनाए गए। अंजुमन दुआए जेहरा के संस्थापक इंतजार हुसैन जैदी ने बताया कि दोपहर एक बजे मजलिसें चेहल्लुम नदी वाला इमामबारगाह प्रेमपुरी पर अदा की गई। संचालन जख्मी मुजफ्फरनगरी ने किया। मातमी जुलूस में शबी हैदर, लारेब, मोहम्मद जमा, असगरी, जामिन अब्बास, सोनू आदि ने सीनाजनीं की। मोहम्मद रजा, हैदर मेहंदी एडवोकेट, कमाल हसनैन, मोहम्मद हुसैन, जबार जैदी आदि का सहयोग रहा।
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मुजफ्फरनगर। चेहल्लुम पर शिया सोगवारों ने मातमी जुलूस निकालकर नदी पार करबला में ताजिए को दफनाया। इससे पूर्व, आयोजित मजलिस में मौलाना ने इमाम हुसैन की शहादत पर रोशनी डाली। यह दास्तां सुनकर सोगवारों की आंखें नम हो गईं।
रविवार सुबह किदवईनगर स्थित जाहिद हॉल में आयोजित मजलिस में मौलाना नामदार अब्बास ने करबला में इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र किया, जिसे सुनकर सोगवारों की आंखों में आंसू आ गए। मजलिस में इंतजार हुसैन जैदी ने कहा कि चेहल्लुम इंसानियत की खातिर दी गई कुरबानियों को एक बार याद करने का दिन है। यादों का एक सफर और तय हुआ है। उन्होंने कहा कि यह मत पूछिए कि इमाम हुसैन ने करबला में क्या खोया, बल्कि यह पूछिए कि हुसैन ने दास्ताने करबला के बाद क्या पाया। तकरीर के बाद शहीदाने करबला के ताबूत अलम, जुलजुनाह बरामद हुआ। मर्सिया ख्वानी हैदर मेहंदी संधावली ने की। शहर की अंजुमने नोहाख्वानी एवं सीनाजनीं करते हुए शहर के मुख्य बाजार पारसनाथ, अबपुरा, लोहिया बाजार, घासमंडी, हनुमान चौक से नदी रोड होते हुए करबला पहुंची, जहां ताजिए दफनाए गए। अंजुमन दुआए जेहरा के संस्थापक इंतजार हुसैन जैदी ने बताया कि दोपहर एक बजे मजलिसें चेहल्लुम नदी वाला इमामबारगाह प्रेमपुरी पर अदा की गई। संचालन जख्मी मुजफ्फरनगरी ने किया। मातमी जुलूस में शबी हैदर, लारेब, मोहम्मद जमा, असगरी, जामिन अब्बास, सोनू आदि ने सीनाजनीं की। मोहम्मद रजा, हैदर मेहंदी एडवोकेट, कमाल हसनैन, मोहम्मद हुसैन, जबार जैदी आदि का सहयोग रहा।
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