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उम्रकैद से नहीं बचा पाई एसआईसी की ‘क्लीन चिट’

Sat, 09 Feb 2019 11:35 PM IST
Deepak Sharma मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो Published by: Deepak Sharma Updated Sat, 09 Feb 2019 11:35 PM IST
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SIC's 'clean chit' could not be saved from life imprisonment
Kawal Kaand - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड के केस में उम्रकैद की सजा पाए अफजाल और इकबाल को एसआईसी की जांच में क्लीन चिट दे दी गई थी। सचिन और गौरव हत्याकांड में कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में दोनों का नाम नहीं था। तहरीर में गलत वल्दियत लिखी गई थी, जो विवेचना में पकड़ में नहीं आई। कोर्ट में ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों के आधार पर साबित किया कि जिन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है, वे अलग-अलग शख्स हैं और सगे भाई हैं।
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मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव मर्डर केस की विवेचना में झोल रहा। जानसठ कोतवाली में कवाल की घटना के बाद केस के वादी मृतक गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने मुकदमा संख्या 403/2013 पंजीकृत कराया था। तहरीर में अन्य आरोपियों के साथ कवाल निवासी अफजाल पुत्र इकबाल लिखा गया था।
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एसआईसी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल) के विवेचक संपूर्णानंद तिवारी ने केस की विवेचना की। पूरे कवाल गांव में इस नाम और वल्दियत का एक ही शख्स मिला, जिसका दोहरे हत्याकांड से दूर तक भी ताल्लुक नहीं था। जांच में अफजाल पुत्र इकबाल को आरोपी नहीं बनाया गया। अदालत में केवल पांच आरोपियों मुजम्मिल, मुजस्सिम, फुरकान, जहांगीर और नदीम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के तीन साल बीत चुके थे। इसी बीच वादी पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने अफजाल और इकबाल का नाम चार्जशीट में नहीं रखे जाने पर आपत्ति दर्ज की। मामले में वादी रविंद्र और गवाह जगदीश ने अपने बयानों में  बताया कि अफजाल और इकबाल पिता-पुत्र नहीं, बल्कि आपस में सगे भाई है, उनके पिता का नाम बुंदू है। दोनों हत्याकांड में शामिल थे। तहरीर लिखते समय त्रुटि हुई थी। अदालत ने 17 नवंबर 2016 को सीआरपीसी की धारा 319 के अंतर्गत अफजाल और इकबाल पुत्रगण बुंदू को समन जारी कर तलब किया।
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 वर्ष 2017 में 27 मार्च को दोनों भाई न्यायालय में पेश हुए। वारदात में उन्हें आरोपी मानते हुए कोर्ट ने जेल भेज दिया। 26 अप्रैल 2017 को सेशन कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट प्रयागराज में अपील की। उच्च न्यायालय ने दोनों को जून 2017 में जमानत दी।
पांच साल चले केस में अफजाल और इकबाल ढाई माह जेल में रहे, जबकि अन्य पांच मुजरिम सितंबर 2013 से ही सलाखों के पीछे थे। छह फरवरी को एडीजे कोर्ट संख्या-7 ने अफजाल और इकबाल को भी कवाल के दोहरे हत्याकांड का दोषी करार देकर उन्हें भी न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। एसआईसी की चार्जशीट में आरोपी नहीं बनाए जाने के बावजूद दोनों मुजरिम कानून से नहीं बच पाए। केस के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि एडीजे हिमांशु भटनागर की कोर्ट ने अफजाल और इकबाल को भी अन्य पांच अभियुक्तों के साथ उम्रकैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है।

उम्रकैद की सजा के बाद बैरक बदली
मुजफ्फरनगर। कवाल के दोहरे हत्याकांड में उम्र कैद की सजा पाए छह मुजरिमों की रात बेचैनी से कटी। फैसले के बाद से उन पर हताशा हावी है और सभी दिन भर गुमसुम रहे। 27 अगस्त, 2013 में कवाल में हुई सचिन और गौरव की हत्या के बाद से ही पांच मुजरिमों को जमानत तक नहीं मिल पाई थी। एडीजे कोर्ट सप्तम से उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मुजस्सिम, फुरकान, जहांगीर, नदीम, अफजाल और इकबाल बैरक में शुक्रवार की रात बेचैन घूमते रहे। सजा से हुई हताशा उनके चेहरे पर दिखाई दी। शनिवार को उन्हें अलग-अलग बैरकों में भेजा गया। दिनभर सभी गुमसुुम रहे। जेल के दूसरे बंदियों से कम ही बात की। मुजरिमों के व्यवहार में भी सजा का असर दिख रहा है। जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने बताया कि जिला कारागार में उक्त कैदी अब सजायाफ्ता है, उन्हें कारागार नियमों के मुताबिक अलग बैरकों में शिफ्ट किया जाएगा। शासन के आदेश के बाद आगरा या नोएडा जेल भी भेजा जा सकता है। बताते चले कि दोहरे हत्याकांड का एक मुजरिम मुजम्मिल बुलंदशहर जेल में है।

सातों हत्यारों के परिजन बैठे रहे उदास
मुजफ्फरनगर/ जानसठ। कवाल कांड में सजा पाए सातों हत्यारों के घरों में उदासी पसरी रही। परिवार की महिलाएं रुआंसी होकर बैठी रहीं। बच्चों के लिए खाना तो बनाया गया, लेकिन बड़ों के गले से निवाला नहीं उतरा। पुलिस भी कवाल और मलिकपुरा में गश्त करती रही। गांव में सामान्य दिनों की तरह चहल-पहल रही।  

मलिकपुरा के सचिन और गौरव की हत्या के मामले में कवाल के सातों अभियुक्तों को सजा सुनाई गई है। सजा पाए लोगों में तीन परिवारों के सगे भाई भी शामिल हैं। सजा होने के बाद शनिवार को सभी सातों गुनहगारों के परिवार के सदस्य काफी दुखी रहे। घरों से रह-रहकर महिलाओं के रोने की आवाजें आती रहीं। उधर, कवाल और मलिकपुरा गांव में पुलिस भी आती जाती रही। दोनों गांवों में हालात सामान्य रहे। आम दिनों की तरह बाजार भी खुला था तथा सड़कों पर अच्छी-खासी चहल-पहल दिखी। जगह-जगह बैठे लोग सजा को लेकर चर्चा जरूर कर रहे थे। सजा पाए फुरकान पुत्र फजला के घर के पास कुछ लोग जमा थे। सभी सजा को लेकर बातचीत कर रहे थे।


फुरकान के छोटे भाई उस्मान ने बताया कि जिस स्थान पर घटना हुई थी उसके पास फुरकान किराना की दुकान करता था। घटना के बाद से वह बीते साढ़े पांच साल से बंद पड़ी है। छोटा भाई दिव्यांग है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
पूरा परिवार मुफलिसी की जिंदगी जीने के लिए मजबूर है।  

 
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