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घरों में भोजन करने से परहेज कर रहे हैं पंडित

Wed, 02 Sep 2020 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 11:51 PM IST
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Shraddha Paksha: Pandits not eating at home
घरों में भोजन करने से परहेज कर रहे हैं पंडित
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चरथावल (मुजफ्फरनगर)। श्राद्ध पक्ष में पितृों का तर्पण करने में कोविड की बंदिश आड़े आ रही है। वैश्विक महामारी में पंडित घरों में भोजन करने से परहेज कर रहे हैं। अधिकांश मंदिरों के पुरोहित का कहना है कि श्राद्ध पक्ष में गोग्रास निकालकर पितृों का तर्पण करना सबसे श्रेष्ठ है। कच्चा भोजन निकालकर ब्राह्मण को भिजवाना श्रेयस्कर है। खासकर कुष्ठ रोगियों को भोजन कराने से श्राद्ध पक्ष में पितृ प्रसन्न होते हैं।
सहारनपुर निवासी पंडित हरिओम शास्त्री चरथावल ब्लॉक के गांव दहचंद संकट मोचक सिद्धेश्वर मंदिर के पुरोहित हैं। उन्होंने कहा कि श्राद्ध पक्ष में पंडित घरों में भोजन करने से बच रहे हैं। गाय को भोजन कराना सबसे श्रेष्ठ है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को सहारनपुर में हुई बैठक में तय हुआ कि ब्राह्मण यजमान के घर नहीं जाएंगे। यजमान कच्चा भोजन उनके घर भिजवा सकते है। इनके अलावा गाय, अग्नि, कौआ, श्वान को जिमाने से पितृों की आत्मा को शांति मिलती है।
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चरथावल सिद्धपीठ प्राच्य देवी मंदिर के पुरोहित मुकेश त्रिपाठी बताते हैं कि कोरोना महामारी काल में ब्राह्मणों का श्रद्धालुओं के घरों में भोजन करने से परहेज करना लाजिमी है। गोग्रास निकालना बेहतर होगा। ठाकुरद्वारा मंदिर के पुजारी पंडित अमित शर्मा बताते हैं कि कोरोना काल में गांवों में पूजन कराने पर ब्रेक लगा रखा है। इस बार बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। श्राद्धपक्ष में वह किसी के घरों में भोजन करने से बचेंगे। प्राच्य महादेव मंदिर के सुरेश शर्मा का मंतव्य है कि कोविड में श्राद्धपक्ष में पितृों का तर्पण यादगार बनेगा। गोमाता में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास बताया गया है। उनको जिमाकर तर्पण करना सबसे श्रेष्ठ है।
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श्राद्धपक्ष में खलती है कौओं की कमी
नवीन गर्ग कस्बे में पशु पक्षी प्रेमी हैं। उनका मानना है घने और छायादार पेड़ों की कमी के कारण कौओं की चहचहाहट अब सुनने को नहीं मिलती। यहां तक शहरी क्षेत्रों में कौओं तो नजर ही नहीं आते। खेतों में कीटनाशक दवाओं के बढ़ते प्रयोग से प्रकृति और पर्यावरण को सहेज कर रखने वाले पशु पक्षी असमय खत्म हो रहे हैं। खासकर श्राद्धपक्ष में कौओं की कमी खलना स्वाभाविक है।
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