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होलिका दहन के साथ ही छाया उल्लास
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
Updated Thu, 01 Mar 2018 10:58 PM IST
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holi
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। होली का पर्व शहर में विधि-विधान के साथ मनाया गया। शाम के समय होलिका की परिक्रमा कर महिलाओं ने पूजन किया। विधि विधान से पूजा अर्चना के साथ होलिका का दहन हुआ। होलिका दहन के बाद प्रसाद वितरित किया गया। साथ ही माहौल में उत्साह छा गया। वसंत पंचमी पर विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती पूजन से होलिका लगाने की शुरूआत हो जाती है। पूजन के दौरान बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। जिले में 1031 जगह होली का दहन हुआ। संवेदनशील स्थलों पर पुलिस की चौकसी रही।
फाल्गुन मास की पूर्णिमा से एक दिन पूर्व तक होलिका को फूंस पत्ती, लकड़ी, उपले लगाकर विशाल रूप दिया जाता है। होली के कई दिन पहले से ही गांव और शहरों में होली के पर्व की धूम प्रारंभ हो जाती है। होली रखते ही महिलाएं रात्रि में होली के गीत भी गाती हैं। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। होली के दिन सुबह से ही अलग-अलग स्थानों पर स्थापित होली का पूजन प्रारंभ हुआ।
महिलाओं ने विधि विधान से होली का पूजन किया। होली पूजन में महिलाओं के साथ बच्चों में भी त्योहार को लेकर अलग ही उत्साह नजर आया। शाम तक होली पूजन का कार्यक्रम चलता रहा। पंडितों द्वारा बताए गए समय के अनुसार शाम को सभी जगह होलिका का दहन हुआ। बड़ी संख्या में लोग होलिका दहन के अवसर पर मौजूद रहे। पूजन के बाद दहन के दौरान लोगों में अलग ही उमंग और उत्साह दिखाई दिया। जिले में 1031 स्थानों पर होलिका दहन किया गया। पुलिस प्रशासन ने 128 स्थानों को संवेदनशील माना था। संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। एसएसपी अनंतदेव तिवारी ने बताया कि होली के पर्व को लेकर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है।
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उधर, मोरना, भोपा, ककरौली क्षेत्र में होली का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। महिलाओं ने होलिका पूजन के साथ कुल देवता व ग्राम देवता की पूजा अर्चना की। होली गीतों का ढोल मजीरों की धुनों पर लोक नृत्य कर होली के त्योहार का आनंद लिया। इसके अलावा भोकरहेड़ी, शुक्रताल, ककरौली, टंढेड़ा, खुजेड़ा बेहड़ा सादात, चौरावाला सहित क्षेत्र के अन्य गांवों में होली का त्योहार मनाया गया।
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फाल्गुन मास की पूर्णिमा से एक दिन पूर्व तक होलिका को फूंस पत्ती, लकड़ी, उपले लगाकर विशाल रूप दिया जाता है। होली के कई दिन पहले से ही गांव और शहरों में होली के पर्व की धूम प्रारंभ हो जाती है। होली रखते ही महिलाएं रात्रि में होली के गीत भी गाती हैं। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। होली के दिन सुबह से ही अलग-अलग स्थानों पर स्थापित होली का पूजन प्रारंभ हुआ।
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महिलाओं ने विधि विधान से होली का पूजन किया। होली पूजन में महिलाओं के साथ बच्चों में भी त्योहार को लेकर अलग ही उत्साह नजर आया। शाम तक होली पूजन का कार्यक्रम चलता रहा। पंडितों द्वारा बताए गए समय के अनुसार शाम को सभी जगह होलिका का दहन हुआ। बड़ी संख्या में लोग होलिका दहन के अवसर पर मौजूद रहे। पूजन के बाद दहन के दौरान लोगों में अलग ही उमंग और उत्साह दिखाई दिया। जिले में 1031 स्थानों पर होलिका दहन किया गया। पुलिस प्रशासन ने 128 स्थानों को संवेदनशील माना था। संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। एसएसपी अनंतदेव तिवारी ने बताया कि होली के पर्व को लेकर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है।
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उधर, मोरना, भोपा, ककरौली क्षेत्र में होली का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। महिलाओं ने होलिका पूजन के साथ कुल देवता व ग्राम देवता की पूजा अर्चना की। होली गीतों का ढोल मजीरों की धुनों पर लोक नृत्य कर होली के त्योहार का आनंद लिया। इसके अलावा भोकरहेड़ी, शुक्रताल, ककरौली, टंढेड़ा, खुजेड़ा बेहड़ा सादात, चौरावाला सहित क्षेत्र के अन्य गांवों में होली का त्योहार मनाया गया।