देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम फारुकिया में वार्षिक जलसे का आयोजन किया गया। जिसमें कुरान पाक हिफ्ज (कंठस्थ) करने वाले 15 छात्रों की उलमा के हाथों दस्तारबंदी हुई। इस दौरान छात्रों ने सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर तकरीरें की और विभिन्न कार्यक्रम भी पेश किए।
शनिवार की रात ईदगाह मार्ग स्थित दारुल उलूम फारुकिया में आयोजित हुए वार्षिक कार्यक्रम में विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक संभली ने कहा कि दुनिया और आखिरत में कामयाबी पाने के लिए कुरान की तालीम को जिंदगी में उतारना होगा। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों से कुरान की शिक्षा को दूसरों तक पहुंचाने का आह्वान किया। प्रसिद्ध बुजुर्ग आलिम-ए-दीन मौलाना मुकर्रम हुसैन संसारपुरी ने कहा कि कुरान को अपने सीनों में महफूज करने वालों को अल्लाह दुनिया और आखिरत में इसका इनाम देते हैं। संस्था के मोहतमिम मौलाना नुरुलहुदा कासमी ने कहा कि इस्लामी तालीम अमन और भाईचारे का पैगाम देती है। इसलिए सभी छात्रों को चाहिए कि वह इल्म हासिल कर उसकी रोशनी दूसरों तक पहुंचाएं और इस्लाम की सही तस्वीर दुुनिया के सामने रखे। कार्यक्रम में अंजुमन बज्म-ए- तहजीब व अदम की ओर से सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर भाषण दिए तथा विभिन्न कार्यक्रम भी पेश किए। भाषण में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले छात्रों को दारुल उलूम के उस्ताद मौलान मुफ्ती आदिल कासमी ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मौलाना रहमतुल्ला नूर, मौलाना मुफ्ती इफ्तेखार कैरानवी, मौलाना नफीस कासमी, मुफ्ती अरशद, कारी मोहसिन, मौलाना नसीबुर्रमान, शेख अतीक, मुफ्ती शब्बीर सहित काफी संख्या में मदरसा छात्र मौजूद रहे।

मदरसा दारूल उलूम फारूकिया में वार्षिक कार्यक्रम में विचार रखते उलमा- फोटो : DEVBAND