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रक्षाबंधन पर सना और आयुषि बनीं पांच घंटे के लिए थानेदार
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:15 AM IST
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छात्रा को थाना प्रभारी का चार्ज देते एसएसपी।
- फोटो : अमर उजाला
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बीएड की छात्रा सना थानवी व डायट की छात्रा आयुषि के लिए रक्षाबंधन का पर्व कभी न भूलने वाले पल लेकर आया। एसएसपी अनंतदेव व अन्य अफसरों को राखी बांधने के लिए थाने पहुंची दोनों छात्राओं को पांच-पांच घंटे का नई मंडी कोतवाली व सिविल लाइंस थाने का प्रभार दिया गया तो उनकी खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। कार्यवाहक थानेदार रहीं सना थानवी ने जहां तीन फरियादियों की समस्याएं सुनीं, वहीं आयुषि ने चार फरियादियों की समस्याओं का निस्तारण किया।
डीजीपी के निर्देश पर रविवार को जनपद के थानों में भी रक्षाबंधन पर्व मनाया गया, जहां मोहल्ला खालापार निवासी बीएड की छात्रा सना थानवी व पुलिस लाइन निवासी आयुषि भी पहुंची थीं। कार्यक्रम में एसएसपी अनंतदेव ने अचानक वहां उपस्थित युवतियों से थानेदार बनने के लिए पूछा तो दोनों ने कौतूहलवश हाथ उठा दिए।
दोनों के आश्चर्य का तब ठिकाना नहीं रहा, जब एसएसपी के आदेश पर आयुषि को थाना सिविल लाइंस व सना थानवी को नई मंडी कोतवाली का कार्यवाहक थानाप्रभारी का कार्यभार सौंप दिया गया। एसएसपी ने खुद दोनों को कार्यभार ग्रहण कराया, जिसके बाद दोनों छात्राओं ने थानेदार के रूप में थाने आने वाले फरियादियों की समस्याएं सुनीं। नई मंडी थाने में बतौर कार्यवाहक थानेदार सना थानवी ने जहां तीन फरियादियों को सुनकर उनकी समस्याओं का हल कराया।
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इनमें एक केस गांव रथेड़ी में हुए झगड़े का था, जिसमें सना थानवी ने दोनों पक्षों का मेडिकल कराने के निर्देश दिए। हालांकि मेडिकल के लिए निकले दोनों पक्ष इसके बाद थाने नहीं पहुंचे। दूसरा केस भी एक झगड़े का आया, जिसमें फरियादी को सुनकर सना ने मामला दर्ज करने के निर्देश दिए, जबकि तीसरे केस में पूर्व में चोरी हुई बाइक को बरामदगी के बाद पीड़ित के पक्ष में थाने से रिलीज कराया गया।
उधर, सिविल लाइंस थाने में मौजूद कार्यवाहक थानेदार आयुषि के समक्ष चार फरियादी आए, जिनमें दो केस मोबाइल व पर्स गायब होने के थे, जिनमें उसने गुमशुदगी दर्ज कराई। जबकि तीसरा केस जनकपुरी में झगड़े का था, जिसमें आयुषि ने पीड़ित पक्ष का मेडिकल कराया। वहीं चौथा केस भी मारपीट का था, जो जांच में फर्जी पाया गया, जिसके कथित पीड़ित खुद को फंसता देख चुपके से थाने से निकल गए।
गश्त पर रहे सिविल लाइंस थाना प्रभारी
आयुषि के सिविल लाइंस कार्यवाहक थानाप्रभारी बनकर काम करने तक एसएचओ डीके त्यागी टीम के साथ क्षेत्र में गश्त में मशगूल रहे। उन्होंने आयुषि के कामकाज को काफी अच्छा बताते हुए इसके लिए एसएसपी अनंतदेव की भी तारीफ की।
नई मंडी एसएचओ ने दी सना को पूरी जानकारी
सना थानवी के कार्यवाहक थानाप्रभारी बनने पर वर्तमान एसएचओ हरशरण शर्मा उसके पास ही बैठे रहे। इस दौरान उन्होंने थाने पहुंचे तीनों मामले देखने में न केवल सना थानवी की मदद की, बल्कि उसे पुलिस कार्यप्रणाली के साथ ही एफआईआर व जीडी के बारे में भी जानकारी दी। यही नहीं, रिलीव होने के बाद इंस्पेक्टर ने सना को गुलदस्ता भी भेंट करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पहले पुलिस से लगता था डर, अब समझी हकीकत
मुजफ्फरनगर। नई मंडी थाने की कार्यवाहक थानाप्रभारी रही सना थानवी थाने से रिलीव होने पर काफी भावुक नजर आई। तीन फरियादियों को सुनने वाली सना ने बताया कि पहले वह पुलिस के नाम से ही डरती थी, लेकिन अब थानाप्रभारी बनकर उसे पुलिस के काम करने के तरीकों के साथ ही यह भी पता चला कि पुलिस किन दबावों में और कैसे काम करती है ? खासकर अपने समक्ष आए गांव रथेड़ी में मारपीट के मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद सना का कहना था कि दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर झूठे आरोप लगाते रहे, लेकिन जब उसने क्रॉस क्वेश्चन किए तो वे वहां से बिना कार्रवाई के ही भाग खड़े हुए। इससे साफ है कि पुलिस का काम कितना मुश्किल होता है।
शामली रोड पर क्लीनिक चलाने वाले पिता डॉक्टर शमीम अहमद थानवी की सबसे बड़ी बेटी सना थानवी के परिवार में मां हाउस वाइफ हैं। एक भाई आसिफ थानवी आईटीआई कर रहा है और दूसरा काशिफ थानवी कक्षा छह का छात्र है। वहीं, तीन बहनों में सबा थानवी ताराचंद वैदिक पुत्री कॉलेज से बीएड कर रही है, जबकि उसकी छोटी बहन शबा थानवी बीएससी व जेबा थानवी हाईस्कूल की छात्रा है। सना थानवी के अनुसार, बड़ी होकर वह अब तक शिक्षिका बनना चाहती थी, लेकिन अब मौका मिलने पर वह पुलिस विभाग में ज्वाइन करना चाहेगी।
शिक्षिका बनना चाहती है आयुषि
सिविल लाइंस थाने की कार्यवाहक आयुषि थाने से रिलीव होने पर काफी उत्साहित नजर आई। आयुषि का कहना था कि उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पिता के एचसीपी होने के चलते पुलिस विभाग से जुड़ी हुई है। हालांकि इससे पहले उसे कभी पुलिस विभाग को इतना नजदीक से जानने समझने का मौका नहीं मिला। पुलिस विभाग में काम करके काफी अच्छा लगा, जिसने उसे कभी न भूलने वाला तोहफा दिया है। आयुषि के अनुसार वह शिक्षिका बनना चाहती है, हालांकि पुलिस विभाग से जुड़ने के बाद अब मौका मिलने पर वह एसएससी की भी तैयारी करेगी।
पुलिस विभाग में एचसीपी के रूप में शामली जनपद में तैनात लोकेश कुमार शर्मा की बेटी आयुषि के परिवार में मां कुसुमलता शर्मा के साथ ही बड़ा भाई हिमांशु है, जो एसएससी की तैयारी कर रहा है। वहीं, छोटी बहन अंजलि श्रीराम कॉलेज में बीबीए की छात्रा है। आयुषि खुद डायट से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन कर रही है।
रक्षाबंधन पर सना थानवी व आयुषि को पांच घंटे की थानेदार बनाने वाले एसएसपी अनंतदेव तिवारी का कहना है कि डीजीपी के निर्देश आए थे कि रक्षाबंधन पर थानों में कार्यक्रम कर महिलाओं व युवतियों को पुलिस के करीब लाएं और उन्हें सुरक्षा का अहसास दिलाएं। इसी के तहत कार्यक्रम किए गए, लेकिन युवतियों को पुलिस विभाग के कामकाज से रूबरू कराने और उनमें सुरक्षा की भावना के साथ ही महिला सुरक्षा के प्रति पुलिस के संकल्प से अवगत कराने के लिए यह कदम उठाया गया।
उन्होंने बताया कि इससे साफ तौर पर संदेश दिया गया कि महिलाएं व युवतियां अपनी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त रहें। इसके साथ ही युवतियां यह जानकारी लें कि पुलिस का उनके प्रति रवैया और कम संसाधनों में पुलिस का सुरक्षा तंत्र क्या और कैसे काम करता है। उन्होंने कहा कि सांकेतिक रूप से दोनों युवतियों को थाने की कमान सौंपी गई थी, जिसके लिए किसी विशेष नियम की आवश्यकता नहीं होती है।
आठ दिसंबर 2017: छात्रा कोमल चौधरी को एक दिन के लिए शामली कोतवाली का प्रभारी बनाया गया।
22 अगस्त 2017: 10वीं की छात्रा सौम्या को एक दिन के लिए थाना सिविल लाइन इलाहाबाद का प्रभारी बनाया। 14 दिसंबर 2017:आईपीएस आनंद कुलकर्णी ने सीतापुर के सभी थानों का प्रभारी एक दिन के लिए छात्राओं को बनाया।
13 फरवरी 2015: कैंसर से पीड़ित सात साल के महक सिंह (प्रतापगढ़) को भोईवाड़ा थाने में एक दिन का चार्ज दिया।
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डीजीपी के निर्देश पर रविवार को जनपद के थानों में भी रक्षाबंधन पर्व मनाया गया, जहां मोहल्ला खालापार निवासी बीएड की छात्रा सना थानवी व पुलिस लाइन निवासी आयुषि भी पहुंची थीं। कार्यक्रम में एसएसपी अनंतदेव ने अचानक वहां उपस्थित युवतियों से थानेदार बनने के लिए पूछा तो दोनों ने कौतूहलवश हाथ उठा दिए।
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दोनों के आश्चर्य का तब ठिकाना नहीं रहा, जब एसएसपी के आदेश पर आयुषि को थाना सिविल लाइंस व सना थानवी को नई मंडी कोतवाली का कार्यवाहक थानाप्रभारी का कार्यभार सौंप दिया गया। एसएसपी ने खुद दोनों को कार्यभार ग्रहण कराया, जिसके बाद दोनों छात्राओं ने थानेदार के रूप में थाने आने वाले फरियादियों की समस्याएं सुनीं। नई मंडी थाने में बतौर कार्यवाहक थानेदार सना थानवी ने जहां तीन फरियादियों को सुनकर उनकी समस्याओं का हल कराया।
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इनमें एक केस गांव रथेड़ी में हुए झगड़े का था, जिसमें सना थानवी ने दोनों पक्षों का मेडिकल कराने के निर्देश दिए। हालांकि मेडिकल के लिए निकले दोनों पक्ष इसके बाद थाने नहीं पहुंचे। दूसरा केस भी एक झगड़े का आया, जिसमें फरियादी को सुनकर सना ने मामला दर्ज करने के निर्देश दिए, जबकि तीसरे केस में पूर्व में चोरी हुई बाइक को बरामदगी के बाद पीड़ित के पक्ष में थाने से रिलीज कराया गया।
उधर, सिविल लाइंस थाने में मौजूद कार्यवाहक थानेदार आयुषि के समक्ष चार फरियादी आए, जिनमें दो केस मोबाइल व पर्स गायब होने के थे, जिनमें उसने गुमशुदगी दर्ज कराई। जबकि तीसरा केस जनकपुरी में झगड़े का था, जिसमें आयुषि ने पीड़ित पक्ष का मेडिकल कराया। वहीं चौथा केस भी मारपीट का था, जो जांच में फर्जी पाया गया, जिसके कथित पीड़ित खुद को फंसता देख चुपके से थाने से निकल गए।
गश्त पर रहे सिविल लाइंस थाना प्रभारी
आयुषि के सिविल लाइंस कार्यवाहक थानाप्रभारी बनकर काम करने तक एसएचओ डीके त्यागी टीम के साथ क्षेत्र में गश्त में मशगूल रहे। उन्होंने आयुषि के कामकाज को काफी अच्छा बताते हुए इसके लिए एसएसपी अनंतदेव की भी तारीफ की।
नई मंडी एसएचओ ने दी सना को पूरी जानकारी
सना थानवी के कार्यवाहक थानाप्रभारी बनने पर वर्तमान एसएचओ हरशरण शर्मा उसके पास ही बैठे रहे। इस दौरान उन्होंने थाने पहुंचे तीनों मामले देखने में न केवल सना थानवी की मदद की, बल्कि उसे पुलिस कार्यप्रणाली के साथ ही एफआईआर व जीडी के बारे में भी जानकारी दी। यही नहीं, रिलीव होने के बाद इंस्पेक्टर ने सना को गुलदस्ता भी भेंट करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पहले पुलिस से लगता था डर, अब समझी हकीकत
मुजफ्फरनगर। नई मंडी थाने की कार्यवाहक थानाप्रभारी रही सना थानवी थाने से रिलीव होने पर काफी भावुक नजर आई। तीन फरियादियों को सुनने वाली सना ने बताया कि पहले वह पुलिस के नाम से ही डरती थी, लेकिन अब थानाप्रभारी बनकर उसे पुलिस के काम करने के तरीकों के साथ ही यह भी पता चला कि पुलिस किन दबावों में और कैसे काम करती है ? खासकर अपने समक्ष आए गांव रथेड़ी में मारपीट के मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद सना का कहना था कि दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर झूठे आरोप लगाते रहे, लेकिन जब उसने क्रॉस क्वेश्चन किए तो वे वहां से बिना कार्रवाई के ही भाग खड़े हुए। इससे साफ है कि पुलिस का काम कितना मुश्किल होता है।
शामली रोड पर क्लीनिक चलाने वाले पिता डॉक्टर शमीम अहमद थानवी की सबसे बड़ी बेटी सना थानवी के परिवार में मां हाउस वाइफ हैं। एक भाई आसिफ थानवी आईटीआई कर रहा है और दूसरा काशिफ थानवी कक्षा छह का छात्र है। वहीं, तीन बहनों में सबा थानवी ताराचंद वैदिक पुत्री कॉलेज से बीएड कर रही है, जबकि उसकी छोटी बहन शबा थानवी बीएससी व जेबा थानवी हाईस्कूल की छात्रा है। सना थानवी के अनुसार, बड़ी होकर वह अब तक शिक्षिका बनना चाहती थी, लेकिन अब मौका मिलने पर वह पुलिस विभाग में ज्वाइन करना चाहेगी।
शिक्षिका बनना चाहती है आयुषि
सिविल लाइंस थाने की कार्यवाहक आयुषि थाने से रिलीव होने पर काफी उत्साहित नजर आई। आयुषि का कहना था कि उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पिता के एचसीपी होने के चलते पुलिस विभाग से जुड़ी हुई है। हालांकि इससे पहले उसे कभी पुलिस विभाग को इतना नजदीक से जानने समझने का मौका नहीं मिला। पुलिस विभाग में काम करके काफी अच्छा लगा, जिसने उसे कभी न भूलने वाला तोहफा दिया है। आयुषि के अनुसार वह शिक्षिका बनना चाहती है, हालांकि पुलिस विभाग से जुड़ने के बाद अब मौका मिलने पर वह एसएससी की भी तैयारी करेगी।
पुलिस विभाग में एचसीपी के रूप में शामली जनपद में तैनात लोकेश कुमार शर्मा की बेटी आयुषि के परिवार में मां कुसुमलता शर्मा के साथ ही बड़ा भाई हिमांशु है, जो एसएससी की तैयारी कर रहा है। वहीं, छोटी बहन अंजलि श्रीराम कॉलेज में बीबीए की छात्रा है। आयुषि खुद डायट से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन कर रही है।
रक्षाबंधन पर सना थानवी व आयुषि को पांच घंटे की थानेदार बनाने वाले एसएसपी अनंतदेव तिवारी का कहना है कि डीजीपी के निर्देश आए थे कि रक्षाबंधन पर थानों में कार्यक्रम कर महिलाओं व युवतियों को पुलिस के करीब लाएं और उन्हें सुरक्षा का अहसास दिलाएं। इसी के तहत कार्यक्रम किए गए, लेकिन युवतियों को पुलिस विभाग के कामकाज से रूबरू कराने और उनमें सुरक्षा की भावना के साथ ही महिला सुरक्षा के प्रति पुलिस के संकल्प से अवगत कराने के लिए यह कदम उठाया गया।
उन्होंने बताया कि इससे साफ तौर पर संदेश दिया गया कि महिलाएं व युवतियां अपनी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त रहें। इसके साथ ही युवतियां यह जानकारी लें कि पुलिस का उनके प्रति रवैया और कम संसाधनों में पुलिस का सुरक्षा तंत्र क्या और कैसे काम करता है। उन्होंने कहा कि सांकेतिक रूप से दोनों युवतियों को थाने की कमान सौंपी गई थी, जिसके लिए किसी विशेष नियम की आवश्यकता नहीं होती है।
आठ दिसंबर 2017: छात्रा कोमल चौधरी को एक दिन के लिए शामली कोतवाली का प्रभारी बनाया गया।
22 अगस्त 2017: 10वीं की छात्रा सौम्या को एक दिन के लिए थाना सिविल लाइन इलाहाबाद का प्रभारी बनाया। 14 दिसंबर 2017:आईपीएस आनंद कुलकर्णी ने सीतापुर के सभी थानों का प्रभारी एक दिन के लिए छात्राओं को बनाया।
13 फरवरी 2015: कैंसर से पीड़ित सात साल के महक सिंह (प्रतापगढ़) को भोईवाड़ा थाने में एक दिन का चार्ज दिया।