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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - सहारनपुर के एसई मोहम्मद आरिफ को मिला चार्ज

Wed, 21 Feb 2024 02:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर Updated Wed, 21 Feb 2024 02:16 AM IST
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Saharanpur's SE Mohammad Arif got charge
- एक्सईएन की गिरफ्तारी के बाद ऑफिस में सन्नाटा
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- सहारनपुर के स्टाफ ऑफिसर आरिफ को दिया गया चार्ज
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज सिंह और उनके कैशियर अजय एक लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए थे। घटना के अगले दिन पूरे दफ्तर में सन्नाटा छाया रहा। सहारनपुर के चीफ इंजीनियर ने अपने स्टाफ ऑफिसर एसई मोहम्मद आरिफ को नीरज के स्थान पर कार्यभार सौंप दिया है।
एक्सईएन नीरज सिंह के कार्य व्यवहार को लेकर स्टाफ लंबे समय से नाराज था। बागपत के एक ठेकेदार से काम देने के नाम पर पैसा मांगने में शिकायत के बाद मेरठ की विजीलेंस टीम ने नीरज सिंह और उनके कैशियर अजय को रंगे हाथ पकड़ा है। दोनों आरोपियों को मेरठ जेल भेज दिया गया है। इस घटना के अगले दिन एक्सईएन के कार्यालय पर ताला लटका मिला। कर्मचारियों के बीच चुपचाप यही घटना चर्चा का विषय बनी रही। लोक निर्माण विभाग के सहारनपुर के चीफ इंजीनियर बालेंद्र ने बताया कि नीरज की गिरफ्तारी के बाद अधीक्षण अभियंता मोहम्मद आरिफ को चार्ज दिया गया है। वह सहारनपुर के चीफ के कार्यालय में स्टाफ ऑफिसर थे।
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जिले में कई बड़े अफसर जा चुके जेल
भ्रष्टाचार के आरोप में जनपद में बीते कुछ वर्षो में कई बड़े अफसर जेल जा चुके हैं। इनमें 2007 में उप निदेशक कृषि टीपी चौधरी दस हजार रुपये की रिश्वत में जेल गए थे। जल निगम के एक्सईएन एके भारद्वाज रिश्वत देने के मामले में जेल गए थे। पीके अग्रवाल रिश्वत मांगने की वीडीओ प्रसारित होने के बाद सस्पेंड हुए थे। बांट माप तौल अधिकारी हरीश प्रजापति भी दो वर्ष पूर्व रंगे हाथ पकड़े गए थे और जेल गए। गत वर्ष डीएसओ ब्रिजेश शुक्ला सहित विभाग के कई कर्मचारी भ्रष्टाचार में जेल गए।
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अभियंता के कहने पर बाबू ने लिए थे एक लाख रुपये
विजीलेंस टीम ने शिकायत मिलने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए फुलप्रुफ योजना बनाकर कार्रवाई की थी। लोक निर्माण विभाग खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता नीरज सिंह ने 34 लाख रुपये के कार्य पास होने के बाद बतौर कमीशन एक लाख 35 हजार रुपये मांगे थे। ठेकेदार ने फिलहाल एक लाख रुपये देने तय किए तो अधिशासी अभियंता ने एक लाख रुपये कार्यालय के वरिष्ठ सहायक (बाबू) को देने के लिए कहा था। इसके बाद बाबू को रुपये लेते समय रंगेहाथ पकड़ लिया गया। बाबू ने यह रुपये अधिशासी अभियंता के कहने पर लेना बताया तो विजीलेंस टीम ने अधिशासी अभियंता को भी गिरफ्तार किया गया।

अधिशासी अभियंता ने 34 लाख के काम पर मांगा चार प्रतिशत
ठेकेदार प्रियवृत की कंपनी को अलग-अलग स्थान पर पांच कार्य 34 लाख रुपये के स्वीकृत हुए थे। ठेकेदार को काम शुरू करना था तो उसने अधिशासी अभियंता से बात की। आरोप रहा कि अधिशासी अभियंता ने उससे 34 लाख के चार प्रतिशत के हिसाब से एक लाख 35 हजार रुपये मांगे। इसके बाद ठेकेदार ने विजीलेंस से 15 फरवरी को शिकायत की। इसके बाद विजीलेंस ने घेराबंदी की और 19 फरवरी को योजना के अनुसार ठेकेदार को पांच-पांच सौ की दो गड्डी पर रंग लगा कर व हस्ताक्षर करके दिया और आरोपियों के पास भेज दिया। अधिशासी अभियंता से ठेकेदार ने पूरी रकम की व्यवस्था न होना बताते हुए एक लाख रुपये लेकर आना बताया। तब अधिशासी अभियंता ने बाबू अजय कुमार को बुलाया और रकम लेने को कहा। अजय ने अपने कमरे में जाकर रुपये पकड़े तभी टीम ने उसे रुपये सहित गिरफ्तार कर लिया। अजय कुमार ने अधिशासी अभियंता के कहने पर रुपये लेना बताया तब टीम ने दोनों का आमना-सामना कराया। मामला साफ होने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर नई मंडी कोतवाली ले जाया गया था।




डिवाइस में कैद है रिश्वत मांगने का राज

सूत्रों के अनुसार, अधिशासी अभियंता के रिश्वत मांगने का राज विजीलेंस के पास डिवाइस में कैद है। सूत्र बताते है कि रुपये लेकर जाते समय विजीलेंस ने ठेकेदार के कपड़ाें में डिवाइस रखी थी जिसमें अधिशासी अभियंता के रिश्वत की रकम के बारे में बातचीत व बाबू को बुला कर रकम देने की आवाज रिकार्ड है।
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