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बेटे की शहादत पर फूट-फूटकर रोया रुमालपुरी  

Fri, 02 Sep 2016 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Fri, 02 Sep 2016 01:01 AM IST
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Rumalpuri
पति की शहादत पर विलाप करती पत्नी मीनू। - फोटो : अमर उजाला
देशप्रेम के जज्बे ने हौसलेमंद सचिन कुमार को सीआरपीएफ की राह दिखाई। साढ़े तीन साल से वह नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के सुकमा में तैनात था। नक्सली हमले में गांव के लाल की शहादत पर रुमालपुरी के हर शख्स की आंख में आंसू बहते दिखे। शोक में गांव में चूल्हे भी नहीं जले। दोस्तों में सचिन की खूबियों की चर्चाएं होती रही। 
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किसान परिवार में जन्मे शहीद जवान सचिन को देश भक्ति का जज्बा अपने बुजुर्गों से मिला। गुर्जर बहुल यह गांव कैल्लापुर का मजरा है। इस गांव से सचिन के परिवार का इतिहास जुड़ा है। उसके परदादा रुमाल सिंह के नाम पर ही यह गांव बसा है। लगभग सौ साल पहले मेरठ के सकौती-दादरी से यहां आए रुमाल सिंह ने यहां पहली बार अपना बसेरा बनाया था। उस वक्त यहां केवल एक-दो परिवार ही खेतीबाड़ी करते थे। अब यह बस्ती पूरी तरह आबाद है। सचिन के पिता भूषण सिंह ने अपने दोनों बेटों को उनकी इच्छा के अनुरूप सीआरपीएफ में भेजा। तीन बेटों में सचिन और अंकित ने वर्ष 2011 में एकसाथ सीआरपीएफ भर्ती केंद्र रामपुर में नियुक्ति पाई।
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बाद में सचिन की ट्रेनिंग चंडीगढ़ और अंकित की केरल में हुई। बड़ा भाई ध्यान सिंह गांव के प्राथमिक विद्यालय में ही शिक्षामित्र है। परिवार में माता-पिता के अलावा दो बहनें भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। घर के लाडले की शहादत पर उन्हें गर्व भी है, लेकिन कम उम्र में ही भाई के साथ छोड़ जाने का गम भी है। सचिन की शादी वर्ष 2013 में खतौली क्षेत्र के गांव लिसौड़ा की मीनू से हुई। ढाई साल के बेटे सार्थक की मासूमियत देखकर महिलाएं और बुजुर्ग फफक पड़े।
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मासूम बेटे को क्या मालूम कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। रुमालपुरी में सचिन जब भी छुट्टी पर आता था, अपने व्यवहार से सभी का दिल जीत लेता था। ग्रामीण अपने बच्चों को सचिन की तरह रहने की मिशाल दिया करते थे। उसके दिव्यांग दोस्त कपिल ने बताया कि वह इतना हमदर्द था कि उसे इंटर की परीक्षा दिलाने के लिए कंधे पर बैठाकर कालेज ले गया था। युवाओं को देशप्रेम के लिए प्रेरित करना उसकी आदत थी। देश की आन के लिए शहादत देकर उनका दोस्त अमर हो गया है।  

डीआईजी को घेरा, कहा लापरवाही से गई जान 
रुमालपुरी आए सीआरपीएफ रामपुर के डीआईजी जगजीत सिंह को ग्रामीणों ने घेरकर अपनी नाराजगी जताई। अंतिम संस्कार के दौरान रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने कहा कि यदि सचिन को समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। डीआईजी ने कहा कि सुकमा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इलाज मुहैय्या कराने में मुश्किलें आती हैं। सचिन को 400 किमी दूर रायपुर लाना पड़ा था।

शहीद जवान को अंतिम विदाई में शामिल होने आए डीआईजी सीआरपीएफ जगजीत सिंह को ग्रामीणों की नाराजगी झेलनी पड़ी। रिश्तेदारों ने यहां तक आरोप लगा दिए कि उनकी लापरवाही की वजह से सचिन की जान गई है। नक्सली हमले के बाद सीआरपीएफ के अफसरों ने तत्परता दिखाई होती तो उसकी जिंदगी बचाई जा सकती थी। जब वह रायपुर के हॉस्पिटल में दाखिल था तो चिकित्सकों ने उसे तत्काल दिल्ली एम्स ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन विभागीय अधिकारी ना-नुकर करते रहे।  

इन आरोपों पर डीआईजी का कहना था कि छत्तीसगढ़ के सुकमा की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि तत्काल इलाज संभव नहीं हो पाता। वह खुद चार साल वहां तैनात रहे हैं। सचिन को गंभीर हालत में हेलीकॉप्टर से 400 किमी दूर रायपुर इलाज के लिए भेजा गया था। सचिन के पिता भूषण सिंह ने बताया कि रायपुर में उपचार के दौरान डॉक्टरों ने बेटे का एक पैर काट दिया था। श्रीनगर में तैनात छोटे बेटे अंकित को रायपुर भेजा, तब उसकी हालत का पता चला।

वह जिंदगी-मौत से जूझ रहा था। सेहत में कोई सुधार नहीं दिखा तो अंकित की गुहार पर अफसरों ने उसे दिल्ली एम्स भेजने की व्यवस्था की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बारुद विस्फोट का जहर शरीर में फैल चुका था। रुमालपुरी के ग्रामीणों सतपाल, धर्मवीर, अनुज आदि का कहना है कि आतंकी और नक्सली हमले में गंभीर रूप से घायल जवानों के इलाज में लापरवाही नहीं होनी चाहिए थी। सचिन को यदि सीधे एम्स लाया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। 

दो बेटों को वापस बुला लेेंगे
सैनिक सचिन के इलाज में बरती गई लापरवाही को लेकर परिवार के लोग आहत हैं। डीआईजी जगजीत सिंह के सामने ही उन्होंने कहा कि जिस तरह उनके लाडले देश की रक्षा कर रहे हैं, उनके जीवन की रक्षा करना भी देश की जिम्मेदारी है।


सचिन के साथ बरते गए रवैये को देखकर दिल में टीस है कि क्यों न सीआरपीएफ में तैनात अपने परिवार के दो अन्य बेटों को सेवा से वापस बुला लें। डीआईजी ने परिवार को समझाने-बुझाने की कोशिश की। डीएम डीके सिंह ने कहा कि प्रशासन शहीद परिवार के साथ है। शासन स्तर से जो भी मदद होगी, उसे परिवार को उपलब्ध कराया जाएगा। 
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