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भविष्य में बवाल पीड़ितों को न्याय की उम्मीद जगी

Tue, 18 Aug 2020 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2020 11:48 PM IST
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Rival victims raised hope for justice in future
भविष्य में बवाल पीड़ितों को न्याय की उम्मीद जगी
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मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सूबे के मेरठ व लखनऊ में संपत्ति क्षति दावा अधिकरण का गठन कर दिया है। इसमें किसी भी बवाल में हुई संपत्ति की क्षति के बाद पीड़ित द्वारा उसकी क्षतिपूर्ति भरपाई के लिए दावा किया जा सकेगा। अधिकरण के गठन से भविष्य में बवाल पीड़ितों को न्याय की उम्मीद जगी है।
दरअसल, नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में गत 20 दिसंबर 2019 को शहर क्षेत्र में एक वर्ग के लोगों की भीड़ द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन किया गया था। दोपहर करीब दो बजे मदीना चौक पर सीओ मंडी समेत कई पुलिसकर्मियों की कारें व बाइकें आग के हवाले कर दी गईं। कच्ची सड़क पुलिस चौकी फूंकने का प्रयास किया गया, जिसमें दोनों वर्गों के लोग आमने-सामने आ गए। इसके बाद मीनाक्षी चौक, मेरठ रोड, आर्यसमाज रोड व महावीर चौक तक हिंसा की लपटें जा पहुंचीं। शाम करीब 3.30 बजे हिंसा थमने तक 50 से अधिक वाहन उपद्रवियों द्वारा फूंके जा चुके थे। बवाल में चार लोगों को गोलियां लगीं, जिनमें से मोहल्ला खालापार निवासी नूर मोहम्मद उर्फ नूरा की मेरठ में उपचार के दौरान मौत हो गई। तत्कालीन एडीजी प्रशांत कुमार व एसपी सिटी सतपाल आंतिल समेत 24 अफसर व पुलिसकर्मी भी बवाल में घायल हुए। इस बवाल में कुल 47 मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें से थाना सिविल लाइंस में 39 और शहर कोतवाली में आठ मुकदमे दर्ज हुए। पुलिस द्वारा बवाल में शामिल 76 लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रशासन द्वारा बवाल में करीब 56.87 लाख रुपये की निजी व सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान का आंकलन किया गया। मामले में 48 लोगों ने जिला प्रशासन के समक्ष क्षतिपूर्ति प्रत्यावेदन के आवेदन किए, जिसके बाद प्रशासन द्वारा 46 लोगों को संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए नोटिस भी जारी किए गए। हालांकि बवाल को आठ माह का समय बीतने के बावजूद अब तक न तो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी है और न ही लाखों की संपत्ति का नुकसान उठाने वाले बेकसूरों की इस क्षति की पूर्ति ही हो सकी है। अधिकरण गठन के बाद भी इन पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद नहीं हैं, क्योंकि इसमें पूर्व में हुई हिंसा के पीड़ितों को दावा करने की छूट नहीं दी गई है।
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डीजीसी राजीव शर्मा का कहना है कि नए वाद ही अधिकरण में जाएंगे। पुराने मामले जो जहां और जिस कोर्ट में चल रहे हैं, वे वहीं चलते रहेंगे। यदि दोनों पक्ष सहमत होंगे तो पुराना मामला भी अधिकरण में जा सकता है।
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