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सिफारिशों से हार रहे बालकों के अधिकार

Fri, 12 Jun 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2020 11:54 PM IST
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Rights of children losing due to recommendations
सिफारिशों से हार रहे बालकों के अधिकार
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मुजफ्फरनगर। हर साल मनाए जाने वाले विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल श्रम रोकने के लिए दावे किए जाते हैं। इसके लिए जिम्मेदार संस्थाएं एवं विभाग काम भी करते हैं लेकिन समाज में जागरूकता की कमी और सिफारिशों के सामने ये प्रयास बौने हो जाते हैं। श्रम विभाग या बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी जब भी कहीं कार्रवाई करते हैं तो सिफारिशों की बाढ़ आ जाती है। यहां तक कि माता-पिता भी तरह-तरह के बहाने बनाकर बचाव करने लगते हैं।
जिले भर में होटलों, ढाबों, दुकानों व ईंट भट्ठों आदि स्थानों पर काम करते बाल श्रमिक खूब नजर आते हैं। बाल श्रम प्रतिबंधित होने के बावजूद इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही। दरअसल इस क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के सामने बाल श्रम रोकने के लिए कई चुनौतियां खड़ी होती हैं।
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बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कमलेश शर्मा बताती हैं कि समिति के करीब साढ़े तीन साल के कार्यकाल में करीब 200 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग जागरूक नहीं हैं। जब भी बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जाता है तो, नेताओं और अन्य प्रभावशाली लोगों की सिफारिशें आने लगती हैं। दुकानदार, भट्ठा संचालक तर्क देने लगते हैं कि बच्चा उनके यहां काम नहीं कर रहा था। वह तो खाना देने आया था या अन्य कोई कारण बताने लगते हैं। ऐसे में बच्चे के माता-पिता भी उनके पक्ष में खड़े हो जाते हैं। बाल श्रम रोकने के लिए जन जागरूकता बेहद जरूरी है।
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मुक्त कराए 55 बाल श्रमिक
श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में 51 सर्वेक्षण कर 55 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया है। इससे पहले वर्षों में भी कार्रवाई होती रही है। 2018-19 में 31, 2017-18 में 73 और 2016-17 में 27 को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इसके बावजूद जिले में बड़ी तादाद में बालक विभिन्न प्रतिष्ठानों पर काम करते नजर आते हैं।
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