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12 साल पहले मिली मान्यता, कक्षाएं नहीं चलीं
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देवबंद (सहारनपुर)। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी और उत्तर प्रदेश शासन से मान्यता मिलने के 12 साल बाद भी देवबंद के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विज्ञान की कक्षाओं का संचालन नहीं हो सका। इसका मुख्य कारण महाविद्यालय में पद सर्जित न होने के साथ बिल्डिंग का निर्माण नहीं होना बताया जा रहा है।
राजकीय स्नातकोत्तर विद्यालय में लंबे समय से विज्ञान संकाय की कक्षाओं के संचालन की मांग चल रही है। इसके लिए महाविद्यालय प्रशासन ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि भी प्रयास कर चुके हैं। महाविद्यालय प्रशासन का तो यहां तक कहना है कि कई बार शासन को पत्र भी लिखा जा चुका है। महाविद्यालय में विज्ञान की कक्षाओं का संचालन नहीं होने से छात्रों को प्राइवेट कॉलेजों का रुख करना पड़ता है। इस बार विज्ञान से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण कर चुके पवन शर्मा, बिलकिस, प्रमोद कुमार, अशोक, शैंकी और विशाल ने बताया कि बीएससी में या तो उन्हें भायला अथवा मुजफ्फरनगर या फिर सहारनपुर दाखिला लेना पडे़गा। वहीं, समाजसेवी राजकिशोर गुप्ता, उद्यमी विजेश कंसल, अधिवक्ता प्रमोद गुप्ता और दीपकराज सिंघल ने प्रदेश सरकार से सभी औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा कराकर महाविद्यालय में विज्ञान संकाय की कक्षाओं का संचालन आरंभ कराने की मांग की है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मोनिका सिंह ने बताया कि विज्ञान संकाय की कक्षाओं के संचालन को कई बार शासन को पत्राचार किया जा चुका है। करीब 12 साल पहले शासन और सीसीएस यूनिवर्सिटी से विज्ञान संकाय की कक्षाओं के संचालन को मान्यता भी मिल गई थी, लेकिन लेक्चरर व प्रोफेसर के पदों के सृजित नहीं होने तथा बिल्डिंग नहीं बनने के कारण कार्य अधर में लटका है। निर्माण निगम से बिल्डिंग बनाने के लिए स्टीमेट मांगा गया है। स्टीमेट मिलते ही शासन को भेज दिया जाएगा। इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक बृजेश सिंह से भी हाल ही में वार्ता हुई है। उनके स्तर से भी प्रयास चल रहे हैं। जिससे कि क्षेत्र के बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
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विज्ञान संकाय की कक्षाओं के लिए जरूरत
1. तीन क्लास
2. 2 लैब हाल
3. मानक के अनुसार बने बिल्डिंग
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राजकीय स्नातकोत्तर विद्यालय में लंबे समय से विज्ञान संकाय की कक्षाओं के संचालन की मांग चल रही है। इसके लिए महाविद्यालय प्रशासन ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि भी प्रयास कर चुके हैं। महाविद्यालय प्रशासन का तो यहां तक कहना है कि कई बार शासन को पत्र भी लिखा जा चुका है। महाविद्यालय में विज्ञान की कक्षाओं का संचालन नहीं होने से छात्रों को प्राइवेट कॉलेजों का रुख करना पड़ता है। इस बार विज्ञान से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण कर चुके पवन शर्मा, बिलकिस, प्रमोद कुमार, अशोक, शैंकी और विशाल ने बताया कि बीएससी में या तो उन्हें भायला अथवा मुजफ्फरनगर या फिर सहारनपुर दाखिला लेना पडे़गा। वहीं, समाजसेवी राजकिशोर गुप्ता, उद्यमी विजेश कंसल, अधिवक्ता प्रमोद गुप्ता और दीपकराज सिंघल ने प्रदेश सरकार से सभी औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा कराकर महाविद्यालय में विज्ञान संकाय की कक्षाओं का संचालन आरंभ कराने की मांग की है।
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महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मोनिका सिंह ने बताया कि विज्ञान संकाय की कक्षाओं के संचालन को कई बार शासन को पत्राचार किया जा चुका है। करीब 12 साल पहले शासन और सीसीएस यूनिवर्सिटी से विज्ञान संकाय की कक्षाओं के संचालन को मान्यता भी मिल गई थी, लेकिन लेक्चरर व प्रोफेसर के पदों के सृजित नहीं होने तथा बिल्डिंग नहीं बनने के कारण कार्य अधर में लटका है। निर्माण निगम से बिल्डिंग बनाने के लिए स्टीमेट मांगा गया है। स्टीमेट मिलते ही शासन को भेज दिया जाएगा। इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक बृजेश सिंह से भी हाल ही में वार्ता हुई है। उनके स्तर से भी प्रयास चल रहे हैं। जिससे कि क्षेत्र के बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
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विज्ञान संकाय की कक्षाओं के लिए जरूरत
1. तीन क्लास
2. 2 लैब हाल
3. मानक के अनुसार बने बिल्डिंग

देवबंद का राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय- फोटो : DEVBAND