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रामपुर तिराहा कांड: पीड़िता ने 29 साल बाद सामने आते ही पहचान लिए आरोपी, बयान की बर्बरता की कहानी

Tue, 25 Jul 2023 06:32 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 25 Jul 2023 06:32 PM IST
सार

रामपुर तिराहा कांड की पीड़िता को मंगलवार को अदालत में पेश किया गया। बुजुर्ग महिला ने 29 साल बाद दो आरोपियों को पहचान लिया और अदालत के सामने पुलिस की बर्बरता की कहानी बयान की।

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Rampur Tiraha incident: victim identified the accused as he came to the front after 29 years
रामपुर तिराहा कांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड पुलिस की सुरक्षा के बीच रामपुर तिराहा कांड की पीड़िता को अदालत में पेश किया गया। बुजुर्ग महिला ने दो आरोपियों को पहचान लिया और अदालत के सामने पुलिस की बर्बरता की कहानी बयान की। अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अपने परिवार की जान को खतरा बताया। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सुनवाई की। अगली सुनवाई दो अगस्त को होगी।

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शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा,  सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, जोगेंद्र गोयल और उत्तराखंड़ संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि सरकार बनाम मिलाप सिंह की पत्रावली में मंगलवार को सुनवाई हुई।
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उत्तराखंड़ पुलिस पौढ़ी गढ़वाल से पीड़िता को कड़ी सुरक्षा में लेकर अदालत पहुंची। गवाह ने अदालत में आरोपियों को पहचान लिया है। पीड़िता ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसके परिवार को खतरा बना हुआ है। पहले भी दो बार हमले हो चुके हैं। बार-बार धमकी दी जा रही है। अदालत ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के आदेश दिए हैं। 
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पीड़िता पहुंची तो कक्ष में बढ़ा दी सुरक्षा
पीड़िता की गवाही के दौरान न्यायालय कक्ष में पीड़िता, सीबीआई के अधिवक्ता धारा सिंह मीणा, शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा, एडीजीसी परवेंद्र सिंह और आरोपी के अधिवक्ता सुरेंद्र शर्मा को ही प्रवेश दिया गया।  गवाही के दौरान न्यायालय कक्ष में किसी दूसरे व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया गया।
 
जिले की सीमा के बाहर छोडकऱ आई पुलिस
उत्तराखंड पुलिस पीड़िता को लेकर पहुंची थी। गवाही के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस भी पीड़िता को पुरकाजी में उत्तराखंड़ बॉर्डर तक छोडकऱ आई। 

यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें  सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी।

सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। गंभीर धाराओं के सेशल ट्रायल मुकदमों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने जिले के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह  को अधिकृत किया है।
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