{"_id":"64bfc4ec63f1c4eb760c4089","slug":"what-is-the-provision-for-marriage-of-a-muslim-woman-without-divorce-this-is-what-mufti-says-2023-07-25","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अंजू-सीमा विवाद: बिना तलाक लिए मुस्लिम महिला की शादी को लेकर क्या है प्रावधान? सवाल पर मुफ्तियों ने दिया जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंजू-सीमा विवाद: बिना तलाक लिए मुस्लिम महिला की शादी को लेकर क्या है प्रावधान? सवाल पर मुफ्तियों ने दिया जवाब
Tue, 25 Jul 2023 06:19 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर/देवबंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर/देवबंद
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 25 Jul 2023 06:19 PM IST
सार
बिना तलाक के मुस्लिम महिला के दूसरी शादी करने को लेकर इस्लाम में क्या प्रावधान है इसे लेकर अमर उजाला संवाददाता ने मुफ्तियों से बात की। इस सवाल पर मुफ्तियों ने क्या कहा पढ़ें ये रिपोर्ट -
विज्ञापन
मुफ्ती अरसद फारुकी मुफ्ती असद कासमी
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
इस्लाम धर्म में बिना तलाक लिए दूसरी शादी का क्या प्रावधान है? इस सवाल पर मुफ्तियों का कहना है कि बिना तलाक लिए महिला दूसरी शादी नहीं कर सकती। इसके लिए उसे शरई अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। काजी के जरिये उसे पहली शादी खत्म करनी होगी। तभी वह किसी दूसरे शख्स से शादी कर सकती है।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि जब तक शौहर तलाक नहीं देगा तब तक महिला दूसरी शख्स के साथ निकाह नहीं कर सकती। अगर शौहर के साथ निभाओ नहीं हो रहा है और वह बहुत ज्यादा परेशान कर रहा है तो शरीयत ने औरत को खुला का हक दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि जब तक शौहर तलाक नहीं देगा तब तक महिला दूसरी शख्स के साथ निकाह नहीं कर सकती। अगर शौहर के साथ निभाओ नहीं हो रहा है और वह बहुत ज्यादा परेशान कर रहा है तो शरीयत ने औरत को खुला का हक दिया है।
विज्ञापन
मुफ्ती असद ने कहा कि हमारे जो इमारतें शरीया (शरई अदालतें) होते हैं। उनमें कोर्ट की तरह ही प्रक्रिया होती है। इमारतें शरीया के जो काजी होते हैं, वो लड़के वालों को नोटिस भेजकर बुलवाते हैं। जिसके बाद दोनों पक्षों को बैठाकर उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं। यदि उसके बाद भी मसले का हल नहीं होता काजी निकाह को खत्म करा देते हैं। दिया है।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि दोनों (पति-पत्नी) के बीच जब तक शरई जुदाई न हो तब तक दूसरा निकाह नहीं किया जा सकता। कहा कि जुदाई के भी कई तरीके हैं।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि दोनों (पति-पत्नी) के बीच जब तक शरई जुदाई न हो तब तक दूसरा निकाह नहीं किया जा सकता। कहा कि जुदाई के भी कई तरीके हैं।
पहला तरीका यह है कि मर्द की मौत हो जाए, दूसरा तरीका है कि वो तलाक दे दे और तीसरा तरीका यह है कि औरत खुला ले ले। यानि काजी दोनों के दरमियान निकाह को तुड़वा दे। जब तक शरई तौर पर पहला निकाह खत्म नहीं होता दूसरा निकाह नहीं हो सकता।
मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि अगर किसी लड़की ने इस्लाम धर्म छोड़कर दूसरा धर्म अपना लिया और उसी धर्म की परंपराओं के मुताबिक उसने शादी कर ली तो अब वह जो चाहे करे यह उसकी मर्जी है।
मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि अगर किसी लड़की ने इस्लाम धर्म छोड़कर दूसरा धर्म अपना लिया और उसी धर्म की परंपराओं के मुताबिक उसने शादी कर ली तो अब वह जो चाहे करे यह उसकी मर्जी है।