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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Rampur Tiraha Case: Three Policemen Sentenced to 18 Months in Fake Arms Recovery Case

UP: रामपुर तिराहा कांड में 31 साल बाद फैसला, फर्जी हथियार मामले में तीन पुलिसकर्मियों को डेढ़-डेढ़ साल की सजा

Tue, 30 Jun 2026 06:22 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 30 Jun 2026 06:22 PM IST
सार

Rampur Tiraha Case: मुजफ्फरनगर की सीबीआई अदालत ने रामपुर तिराहा कांड में फर्जी हथियार बरामदगी मामले में तीन पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए डेढ़-डेढ़ साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। मामला 1994 के उत्तराखंड आंदोलन से जुड़ा है।

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Rampur Tiraha Case: Three Policemen Sentenced to 18 Months in Fake Arms Recovery Case
रामपुर तिराहा कांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रामपुर तिराहा कांड से जुड़े फर्जी हथियार बरामदगी मामले में करीब 31 वर्ष बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम एवं विशेष सीबीआई न्यायालय ने तत्कालीन थाना प्रभारी बृज किशोर, सिपाही अनिल कुमार और उमेश कुमार को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में डेढ़-डेढ़ वर्ष तक के कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस मामले के चौथे आरोपी कमल किशोर का ट्रायल के दौरान निधन हो चुका है।

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फर्जी बरामदगी मामले में अदालत का फैसला
मंगलवार को अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देने के बाद सजा पर सुनवाई की। अदालत ने सभी दोषियों को विभिन्न धाराओं में कारावास और जुर्माने से दंडित किया। अधिकांश धाराओं में अधिकतम सजा डेढ़ वर्ष की सुनाई गई है।
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किन धाराओं में कितनी सजा?
अदालत ने दोषियों को निम्न धाराओं में सजा सुनाई-

धारा 120-बी : डेढ़ वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड।
धारा 180 : तीन महीने का कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड।
धारा 211 : एक वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड।
धारा 218 : डेढ़ वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड।
शस्त्र अधिनियम की धारा 25 : डेढ़ वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड।

क्या था पूरा मामला?
एक अक्तूबर 1994 को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान रामपुर तिराहा पर आंदोलनकारियों की बसों की जांच के दौरान तत्कालीन झिंझाना थाना प्रभारी बृज किशोर और अन्य पुलिसकर्मियों ने तमंचे तथा खुखरी बरामद होने का मामला दर्ज कराया था।

बाद में मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई। जांच के दौरान बरामद बताए गए हथियारों और कारतूसों की फोरेंसिक जांच कराई गई, जिसमें पाया गया कि भेजे गए कारतूस उन हथियारों से नहीं चलाए गए थे। इसके बाद फर्जी बरामदगी का मामला दर्ज किया गया।


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तीन आरोपी हुए दोषी, एक की हो चुकी है मौत
इस मामले में प्रारंभिक रूप से चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान आरोपी कमल किशोर का निधन हो गया। इसके बाद बृज किशोर, अनिल कुमार और उमेश कुमार के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई जारी रही और अब अदालत ने तीनों को दोषी करार देते हुए सजा सुना दी।

अन्य मामलों की भी चल रही सुनवाई
रामपुर तिराहा कांड से जुड़े अन्य मामलों में भी अलग-अलग स्तर पर सुनवाई जारी है। इससे पहले 18 मार्च 2024 को एक अन्य पत्रावली में फैसला आ चुका है। वहीं अन्य लंबित मामलों में भी सीबीआई अदालत में सुनवाई चल रही है।

उत्तराखंड आंदोलन का चर्चित मामला
रामपुर तिराहा कांड उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है। इस घटना में कई आंदोलनकारियों की जान गई थी और इसके बाद दर्ज विभिन्न मामलों की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी। वर्षों बाद भी इससे जुड़े कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

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