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बुरे कामों से तौबा करने का मौका देता है रमजान माह: उलमा
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मौलाना कारी इस्हाक गोरा
- फोटो : DEVBAND
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देवबंद(सहारनपुर)। कोरोना संक्रमण को लेकर पिछले दो वर्षों से रमजान में काफी बंदिशें रहीं, लेकिन इस बार लोगों में रमजान को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है। रमजान माह पर उलमा का कहना है कि रमजान इबादत का महीना है। इस्लाम में इस माह का बहुत महत्व है। इसी माह में अल्लाह का पवित्र कलाम कुरआन पाक नाजिल हुआ।
जमीयत दावतुल मुसलिमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा का कहना है कि रमजान का पवित्र महीना इंसान को मौका देता है कि वह अपने बुरे कामों से तौबा करें और अच्छे काम करने का अहद (वचन) करें। शरीयत के हवाले से कारी इस्हाक ने कहा कि अल्लाह ने मुसलमानों पर रोजे इसलिए फर्ज फरमाए हैं, जिससे वह अपने अंदर तकवा और परहेजगारी पैदा कर सकें। अल्लाह हर साल रमजान में प्रत्येक इंसान को मौका देता है कि वह अपने बुरे कामों से तौबा करे और अच्छे काम करे। कहा कि रमजान माह का एक-एक मिनट बहुत कीमती होता है।
रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना रमजान
देवबंद। मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने बताया कि रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। पूरे माह में मुसलमान भूखा प्यासा रहता है और बुरे कामों से तौबा कर हर अच्छे से अच्छे कार्य करने के साथ रोजा रखता है, साथ ही खुदा की इबादत में ज्यादा से ज्यादा समय बिताता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ भूखा प्यासा रहना रोजा नहीं है। बल्कि हर बुरे कामों से रुकने का नाम रोजा है। यदि कोई व्यक्ति रोजा तो रखता है और बुरे कामों को नहीं छोड़ता तो उसका रोजा महज फाका होगा और अल्लाह को ऐसे लोगों के रोजे पसंद नहीं हैं।
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रमजान में हर काम का 70 गुना सवाब
देवबंद। मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने का कहना है कि रमजान की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस माह में हर नेक काम का बदला 70 गुना अधिक होता है। रमजान में मुसलमानों को अपने पूरे साल की माल व दौलत की जकात निकालने के साथ साथ ज्यादा से ज्यादा गरीब, असहाय और जरूरतमंद रिश्तेदारों की मदद करनी चाहिए।
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जमीयत दावतुल मुसलिमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा का कहना है कि रमजान का पवित्र महीना इंसान को मौका देता है कि वह अपने बुरे कामों से तौबा करें और अच्छे काम करने का अहद (वचन) करें। शरीयत के हवाले से कारी इस्हाक ने कहा कि अल्लाह ने मुसलमानों पर रोजे इसलिए फर्ज फरमाए हैं, जिससे वह अपने अंदर तकवा और परहेजगारी पैदा कर सकें। अल्लाह हर साल रमजान में प्रत्येक इंसान को मौका देता है कि वह अपने बुरे कामों से तौबा करे और अच्छे काम करे। कहा कि रमजान माह का एक-एक मिनट बहुत कीमती होता है।
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रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना रमजान
देवबंद। मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने बताया कि रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। पूरे माह में मुसलमान भूखा प्यासा रहता है और बुरे कामों से तौबा कर हर अच्छे से अच्छे कार्य करने के साथ रोजा रखता है, साथ ही खुदा की इबादत में ज्यादा से ज्यादा समय बिताता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ भूखा प्यासा रहना रोजा नहीं है। बल्कि हर बुरे कामों से रुकने का नाम रोजा है। यदि कोई व्यक्ति रोजा तो रखता है और बुरे कामों को नहीं छोड़ता तो उसका रोजा महज फाका होगा और अल्लाह को ऐसे लोगों के रोजे पसंद नहीं हैं।
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रमजान में हर काम का 70 गुना सवाब
देवबंद। मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने का कहना है कि रमजान की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस माह में हर नेक काम का बदला 70 गुना अधिक होता है। रमजान में मुसलमानों को अपने पूरे साल की माल व दौलत की जकात निकालने के साथ साथ ज्यादा से ज्यादा गरीब, असहाय और जरूरतमंद रिश्तेदारों की मदद करनी चाहिए।