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किसानों को नोटिस के विरोध में अफसर बंधक, तालाबंदी

Tue, 19 Nov 2019 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Nov 2019 11:21 PM IST
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Pollution control board office locked
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय पर दिए धरने में शामिल राकेश टिकैत, अफसरों से वार्ता क? - फोटो : MUZAFFARNAGAR
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय पर तालाबंदी
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मुजफ्फरनगर। खेतों में कृषि अपशिष्ट जलाने के आरोप में जुर्माने के नोटिस के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय पर तालाबंदी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अधिकारियों की मनमानी के कारण किसान परेशान है। प्रदर्शनकारियों ने विभाग के अधिकारियों को बंधक बनाकर अपने बीच बैठा लिया। प्रशासनिक अफसरों ने किसानों को समझाया कि वे नोटिस का जवाब दें मामले का निस्तारण हो जाएगा। भाकियू नेता राकेश टिकैत ने दस दिन का समय देने के बाद पांच घंटे से जारी धरना समाप्त कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार को ज्ञापन भी दिया गया। किसानों ने प्रदूषण फैलाने पर कारखानों के साथ ही नगरीय निकायों पर कार्यवाही करने की मांग की।
खेतों में पराली जलाकर प्रदूषण फैलाने के आरोप में प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने बड़ी संख्या में किसानों को जुर्माने के नोटिस जारी किए हैं। तहसील स्तर पर भी जिले के 20 किसानों पर खेतों में कृषि अपशिष्ट जलाए जाने पर जुर्माना किया गया है। किसानों पर कार्रवाई से खफा भारतीय किसान यूनियन ने आंदोलन शुरू कर दिया है। मंगलवार को सुबह 11 बजे भाकियू जिलाध्यक्ष धीरज लाटियान के नेतृत्व में काफी संख्या में किसान रेलवे रोड स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय पर पहुंचे और दफ्तर का घेराव करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। भाकियू नेताओं ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में तालाबंदी करते हुए विभागीय अफसरों को भी बंधक बना लिया और अपने धरने पर बैठा लिया। सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने भाकियू नेताओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने बंधक बनाए गए अफसरों को छोड़ने से इंकार कर दिया।
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भाकियू नेताओं ने कहा कि पराली जलाने के नाम पर विभिन्न जनपदों में किसानों के विरुद्ध जुर्माना लगाने के साथ ही मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई तेजी से की जा रही है, जबकि यूपी का किसान पराली नहीं जलाता है। यहां के अफसरों को पराली और फसल अवशेष के बीच का अंतर समझ नहीं आता है। किसान खेती और कृषि वानिकी के सहारे पर्यावरण की रक्षा कर रहा है। इसके लिए किसानों को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है। सरकार ने खेती करना भी अपराध की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण का मुख्य कारण बड़े बड़े कल-कारखाने, निर्माण कार्य और नगरीय निकायों का जलता कूड़ा किसी अधिकारी व सेटेलाइट की पकड़ में नहीं आ रहा है। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत भी धरनास्थल पर पहुंच गए। अफसरों के यह कहने पर कि किसान नोटिसों का जवाब दे निस्तारण किया जाएगा। राकेश ने दस दिन का समय देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दस दिन बाद भाकियू बड़ा आंदोलन करेगी। शाम करीब चार बजे धरना समाप्त किया। भाकियू जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। ज्ञापन में जुर्माना और नोटिस का विरोध किया गया। इस अवसर पर भाकियू नेता धर्मेंद्र मलिक, कपिल सोम, कुशलवीर सिंह, अनुज कुुमार, नीटू दुल्हेरा, सहंसरपाल, मांगेराम त्यागी, सतीश भारद्वाज, राहुल सिंह, रविंद्र प्रधान, जसवीर सिंह पीनना, प्रथम बालियान आदि मौजूद रहे।

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दफ्तर पर धरने में शामिल राकेश टिकैत अफसरों से वार्ता करते हुए।

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दफ्तर पर धरने में शामिल राकेश टिकैत अफसरों से वार्ता करते हुए।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

रेलवे रोड स्थित प्रदूषण विभाग की गई तालाबंदी।

रेलवे रोड स्थित प्रदूषण विभाग की गई तालाबंदी।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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