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किराएदारों के सत्यापन को भुला बैठी पुलिस
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किराएदारों के सत्यापन को भुला बैठी पुलिस
मुजफ्फरनगर। एक ओर जहां प्रदेश में लगातार बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं के अवैध रूप से रहने के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं जनपद पुलिस बेहद जरूरी किराएदारों के सत्यापन अभियान को भुलाए बैठी है। लंबे समय से जनपद में यह अभियान नहीं चला है, जिसके चलते इसका रिकॉर्ड भी फिलहाल फाइलों के ढेर तले दबा पड़ा है।
सूबे में लगातार बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं के अवैध रूप से रहने के मामले सामने आ रहे हैं। लखनऊ एटीएस द्वारा इस संबंध में कई बार अवैध रूप से रहने वाले देश विरोधी तत्वों को गिरफ्तार कर चुकी है, जो फर्जी नाम-पते से रहकर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे। जनपद में अब तक इस तरह के मामले सामने नहीं आए हैं, जिसके चलते यहां किराएदारों के सत्यापन के अभियान को भी पुलिस पूरी तरह से भुला बैठी है। अंतिम बार किराएदार सत्यापन का यह अभियान करीब साढे़ तीन साल पूर्व तत्कालीन एसएसपी दीपक कुमार द्वारा चलाया गया था, जिसमें हजारों लोगों को किराएदार के रूप में चिह्नित कर उनका डाटा संकलित किया गया था।
हालांकि, बाद में एसएसपी का स्थानांतरण होने के साथ ही यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया, जिसके रिकॉर्ड की भी फिलहाल पुलिस-प्रशासन के पास कोई जानकारी नहीं है। एसएसपी अभिषेक यादव का कहना है कि जनपद में अवैध रूप से विदेशी लोगों के रहने का कोई मामला नहीं है। किराएदारों का सत्यापन समय-समय पर कराते हुए मकान मालिकों को भी इसके लिए जागरूक किया जाता है। जल्द ही एक बार फिर से जिले में सत्यापन अभियान शुरू किया जाएगा।
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मुजफ्फरनगर। एक ओर जहां प्रदेश में लगातार बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं के अवैध रूप से रहने के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं जनपद पुलिस बेहद जरूरी किराएदारों के सत्यापन अभियान को भुलाए बैठी है। लंबे समय से जनपद में यह अभियान नहीं चला है, जिसके चलते इसका रिकॉर्ड भी फिलहाल फाइलों के ढेर तले दबा पड़ा है।
सूबे में लगातार बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं के अवैध रूप से रहने के मामले सामने आ रहे हैं। लखनऊ एटीएस द्वारा इस संबंध में कई बार अवैध रूप से रहने वाले देश विरोधी तत्वों को गिरफ्तार कर चुकी है, जो फर्जी नाम-पते से रहकर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे। जनपद में अब तक इस तरह के मामले सामने नहीं आए हैं, जिसके चलते यहां किराएदारों के सत्यापन के अभियान को भी पुलिस पूरी तरह से भुला बैठी है। अंतिम बार किराएदार सत्यापन का यह अभियान करीब साढे़ तीन साल पूर्व तत्कालीन एसएसपी दीपक कुमार द्वारा चलाया गया था, जिसमें हजारों लोगों को किराएदार के रूप में चिह्नित कर उनका डाटा संकलित किया गया था।
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हालांकि, बाद में एसएसपी का स्थानांतरण होने के साथ ही यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया, जिसके रिकॉर्ड की भी फिलहाल पुलिस-प्रशासन के पास कोई जानकारी नहीं है। एसएसपी अभिषेक यादव का कहना है कि जनपद में अवैध रूप से विदेशी लोगों के रहने का कोई मामला नहीं है। किराएदारों का सत्यापन समय-समय पर कराते हुए मकान मालिकों को भी इसके लिए जागरूक किया जाता है। जल्द ही एक बार फिर से जिले में सत्यापन अभियान शुरू किया जाएगा।
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