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Muzaffarnagar News: मरीजों को डॉक्टरों का इंतजार, बीमारी की पगडंडी पर हिचकोले ले रही स्वास्थ्य सुविधा

Sun, 06 Sep 2026 12:43 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 12:43 AM IST
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Patients await doctors; healthcare services falter along the rocky path of illness.
मुजफ्फरनगर। चिकित्सकों की कमी के चलते जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल है। सीएचसी और पीएचसी पर उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को चिकित्सक नहीं मिल रहे। हालात ये हैं कि सृजित 135 पदों के सापेक्ष जनपद में मात्र 68 सरकारी चिकित्सक तैनात है। जबकि 60 पदों के सापेक्ष जनपद में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या मात्र सात है। हालात ये हैं कि मामूली बीमारियों में भी उपचार के लिए जिला मुख्यालय की ओर से दौड़ लगानी पड़ती है।
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चिकित्सकों की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो मामूली बीमारियों के मामलों में भी वास्तव में रेफरल सेंटर ही बनकर रह गए हैं। सर्वाधिक चिंताजनक स्थिति विशेषज्ञ चिकित्सकों की है।
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जिला चिकित्सालय में इलाज की आस, डॉक्टरों का इंतजार
सरकारी अस्पतालों में सबसे ज्यादा दबाव सामान्य मरीजों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों का रहता है। सीएचसी-पीएचसी पर चिकित्सकों की कमी के चलते जिला चिकित्सालय पर मरीजों को लंबी कतार लगती है। लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते वहां भी मरीजों को इंतजार का सामना करना पड़ता है। स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों के 33 पद स्वीकृत हैं, जबकि 25 चिकित्सकों की ही तैनाती है।
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खालापार निवासी बुजुर्ग खलीफा का कहना है कि कई दिन से सीने में दर्द महसूस कर रहा हूं। जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए आया था। यहां पर हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। सामान्य फिजिशियन को दिखाना पड़ रहा है। जानकारी मिली है कि जिला चिकित्सालय में कई वर्ष से कोई हृदय रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। समझ नहीं आ रहा उपचार कहां कराऊं।
जनपद के स्वास्थ्य केंद्रों पर सरकारी चिकित्सकों की स्थिति
लेवल स्वीकृत पद तैनाती रिक्त
एक 43 38 05
दो 14 10 04
तीन 09 08 01
चार 09 05 04
विशेषज्ञ 60 07 53
135 68 67
वर्जन-
सृजित पदों के सापेक्ष चिकित्सकों की काफी कमी है। शासन को पत्र लिखा गया है। नवीन तैनाती होने तक चिकित्सकों की अलग-अलग सीएचसी और पीएचसी पर ड्यूटी लगाकर काम चलाया जा रहा है। शासन से चिकित्सक मिलने पर रिक्त पदों के सापेक्ष तैनाती की जाएगी। - डॉ.सुनील तेवतिया, सीएमओ
खतौली सीएचसी पर चिकित्सकों की कमी, रेफर किए जा रहे मरीज
खतौली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी के चलते गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों को जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जाता है। नाक, कान, गला रोग, बाल रोग, सर्जन चिकित्सक न होने से लोगों को प्राइवेट अस्पताल में उपचार कराना पड़ता रहा है।
सीएचसी पहुंचे मोहल्ला जमना विहार निवासी सुरेश चंद्रा ने बताया कि उनके घुटनों में दर्द है। वह अस्पताल में दवाई लेने के लिए दूसरी बार आए हैं। यहां पर आर्थोपेडिक सर्जन नहीं मिले। अब उनको जिला चिकित्सालय जाने की सलाह दी गई है। बताया कि उनकी आयु 70 वर्ष से अधिक है, ठीक से चल भी नहीं सकते। जिला चिकित्सालय जाकर उपचार कराना उनके लिए कठिन है।
मोहल्ला जैन नगर निवासी जगवीर सिंह ने बताया कि वह सांस और गदूद की बीमारी से ग्रसित हैं। वह सीएचसी में उपचार कराने के लिए आए थे। इस बीमारी से संबंधित चिकित्सक न होने से उनको जिला चिकित्सालय जाकर उपचार कराने की सलाह दी गई है। जिला चिकित्सालय में जाकर उपचार कराने की उनमें हिम्मत नहीं है। वहां पर जाने के लिए पैसा और समय चाहिए। जबकि 75 वर्ष की आयु में वह चल भी नहीं सकते हैं। वह चाहते हैं उपचार की सुविधा सीएचसी में ही मिल जाए।


इन चिकित्सकों की है कमी
सीएचसी खतौली में बाल रोग, नेत्र रोग, नाक, कान, गला रोग, सर्जन चिकित्सकों की कमी है। काफी समय से लोग इन विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की मांग करते चले आ रहे हैं। सीएचसी में चिकित्सक न होने से मरीजों को जिला चिकित्सालय जाने की सलाह दी जाती है।




वर्जन-
अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए चार वार्ड में 30 बेड हैं। इसके अलावा सीएचसी में डेंगू, मलेरिया, टायफाइड, शुगर, हेपेटाइटिस बी तथा सी, सीबीसी की जांच तथा उनके उपचार की सुविधा है। अस्पताल में ईएनटी, बाल रोग, नेत्र रोग के अलावा सर्जन चिकित्सक की तैनाती के लिए पत्र भेजा गया है। - डॉ. कपिल कुमार, चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी खतौली
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