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ओडीएफ की कमान संभालेंगी बहू-बेटियां
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 01 Jun 2017 12:41 AM IST
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बैठक में मौजूद महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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गांवों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए बहू-बेटियों समेत परिवार की जिम्मेदार महिलाएं कमान संभालेंगी। प्रशासन ने अभियान की सफलता के लिए महिलाओं का सहयोग मांगा है। इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि घर-घर में इसके लिए जागरूकता आए और आदर्श गांव की नींव रखी जा सके।
जिला पंचायत सभागार में स्वच्छ भारत मिशन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया। जिसमें महिला समाख्या से जुड़ी महिलाओं, विभिन्न संगठनों में कार्यरत महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इन महिलाओं के कंधों पर स्वच्छता अभियान की जिम्मेदारी दी गई है। खुले में शौच से मुक्ति के लिए योगदान देंगी। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने कहा कि देश में सबसे बड़ी कुप्रथा खुले में शौच है।
देश को इस सोच से उबारकर शत-प्रतिशत खुले में शौच मुक्त बनाना होगा। इस अभियान की सफलता बिना महिलाओं के पूरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि परिवार की बहू-बेटियां कमान संभालें, तभी जागरूकता आएगी। परिवार ही नहीं, आसपास पड़ौस के लोगों को भी खुले में शौच से रोकें और इसका विरोध करें।
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डीपीआरओ नूतन शर्मा ने कहा कि इसके लिए सभी को दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कार्य करना होगा। महिलाएं परिवार में मीटिंग कर खुले में शौच की आदत को बदलने का प्रयास करें। गांव में इसके लिए अन्य महिलाओं के साथ अभियान चलाएं। ग्रामीणों को भी मिलकर तय करना है।
खुले में शौच के लिए जाने वाले परिवारों के घरों के सामने बच्चों की टोलियां भेजकर सीटी प्रदर्शन, बहिष्कार करें, ताकि वह लोग भी बदलती सोच को स्वीकार और साथ निभाएं। तभी गांवों को इस कुप्रथा से मुक्ति मिलने के साथ आदर्श गांव का दर्जा मिलेगा। कार्यक्रम में बीएसए चंद्रकेश सिंह यादव, मिशन प्रभारी आयुषि, समाख्या अधिकारी तरन्नुम, अमित कौशिक, नितिन कुमार आदि मौजूद रहे।
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जिला पंचायत सभागार में स्वच्छ भारत मिशन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया। जिसमें महिला समाख्या से जुड़ी महिलाओं, विभिन्न संगठनों में कार्यरत महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इन महिलाओं के कंधों पर स्वच्छता अभियान की जिम्मेदारी दी गई है। खुले में शौच से मुक्ति के लिए योगदान देंगी। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने कहा कि देश में सबसे बड़ी कुप्रथा खुले में शौच है।
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देश को इस सोच से उबारकर शत-प्रतिशत खुले में शौच मुक्त बनाना होगा। इस अभियान की सफलता बिना महिलाओं के पूरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि परिवार की बहू-बेटियां कमान संभालें, तभी जागरूकता आएगी। परिवार ही नहीं, आसपास पड़ौस के लोगों को भी खुले में शौच से रोकें और इसका विरोध करें।
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डीपीआरओ नूतन शर्मा ने कहा कि इसके लिए सभी को दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कार्य करना होगा। महिलाएं परिवार में मीटिंग कर खुले में शौच की आदत को बदलने का प्रयास करें। गांव में इसके लिए अन्य महिलाओं के साथ अभियान चलाएं। ग्रामीणों को भी मिलकर तय करना है।
खुले में शौच के लिए जाने वाले परिवारों के घरों के सामने बच्चों की टोलियां भेजकर सीटी प्रदर्शन, बहिष्कार करें, ताकि वह लोग भी बदलती सोच को स्वीकार और साथ निभाएं। तभी गांवों को इस कुप्रथा से मुक्ति मिलने के साथ आदर्श गांव का दर्जा मिलेगा। कार्यक्रम में बीएसए चंद्रकेश सिंह यादव, मिशन प्रभारी आयुषि, समाख्या अधिकारी तरन्नुम, अमित कौशिक, नितिन कुमार आदि मौजूद रहे।