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भूमि पर कोई भी वस्तु दोष रहित नहीं: सत्य कृष्ण शास्त्री
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शाहपुर में चल रही श्री मद्भागवत कथा में मौजूद श्रोता व कथा करते कथा व्यास
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर, शाहपुर। कथा व्यास आचार्य सत्य कृष्ण शास्त्री ने कहा कि संत को जानने में भूल नहीं करनी चाहिए। यदि संत को जानने में भूल की गई तो परिणाम भी गंभीर होते हैं। इस भूमि पर कोई भी वस्तु दोष रहित नहीं है।
कस्बे की मंगलापुरी मंडी धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य सत्य कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मानव धन इकट्ठा करने के लिए मानवता को भूलता जा रहा है। समाज में रहकर अनाप-शनाप कार्य करता है। ऐसे व्यक्ति का दिया हुआ धन दान धर्म में भी अच्छा नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने एक संत को और उसकी समाधि को जानने की चेष्टा की थी। जो उनको गलत लग रहा था, लेकिन वह बात सत्य निकली, तो उन्हें श्राप झेलना पड़ा। कभी भी संत के बारे में जानने में भूल नहीं करनी चाहिए। यदि संत असली है और आपने नकली समझा, तो आपको श्राप मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित के श्राप के समाधान के निस्तारण को ऋषि-मुनियों को भूमि पर आना पड़ा था। भूमि पर कोई भी वस्तु दोष रहित नहीं है। सभी वस्तुओं में दोष है, चाहे कपड़ा हो, अन्न हो कोई भी भोज्य पदार्थ हो, इसलिए घरों में भोजन बनाने के बाद उस भोजन को पहले भगवान को अर्पण करें और प्रसाद स्वरूप खाएं तो वह दोष मुक्त हो जाता है।
कथा के यजमान राजेंद्र कुमार गुप्ता सपत्नीक रहे। कथा में राधा मित्तल, ऊमा गर्ग, कविता गर्ग, पिंकी गोयल, ऊषा मित्तल, उषा गुप्ता, बबीता चौधरी, मणिकांत मित्तल, ब्रज मोहन गर्ग, राजेश गिरी महाराज ,प्रदीप बालियान, अतुल सिंघल, रामपाल नामदेव मौजूद रहे।
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कस्बे की मंगलापुरी मंडी धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य सत्य कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मानव धन इकट्ठा करने के लिए मानवता को भूलता जा रहा है। समाज में रहकर अनाप-शनाप कार्य करता है। ऐसे व्यक्ति का दिया हुआ धन दान धर्म में भी अच्छा नहीं होता है।
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उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने एक संत को और उसकी समाधि को जानने की चेष्टा की थी। जो उनको गलत लग रहा था, लेकिन वह बात सत्य निकली, तो उन्हें श्राप झेलना पड़ा। कभी भी संत के बारे में जानने में भूल नहीं करनी चाहिए। यदि संत असली है और आपने नकली समझा, तो आपको श्राप मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित के श्राप के समाधान के निस्तारण को ऋषि-मुनियों को भूमि पर आना पड़ा था। भूमि पर कोई भी वस्तु दोष रहित नहीं है। सभी वस्तुओं में दोष है, चाहे कपड़ा हो, अन्न हो कोई भी भोज्य पदार्थ हो, इसलिए घरों में भोजन बनाने के बाद उस भोजन को पहले भगवान को अर्पण करें और प्रसाद स्वरूप खाएं तो वह दोष मुक्त हो जाता है।
कथा के यजमान राजेंद्र कुमार गुप्ता सपत्नीक रहे। कथा में राधा मित्तल, ऊमा गर्ग, कविता गर्ग, पिंकी गोयल, ऊषा मित्तल, उषा गुप्ता, बबीता चौधरी, मणिकांत मित्तल, ब्रज मोहन गर्ग, राजेश गिरी महाराज ,प्रदीप बालियान, अतुल सिंघल, रामपाल नामदेव मौजूद रहे।

शाहपुर में चल रही भामद्भागवत कथा में मौजूद श्रोता- फोटो : MUZAFFARNAGAR