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चर्चित रामपुर तिराहा कांड: तीन दशक तक इंतजार, दो कदम दूर इंसाफ, महिला ने हिम्मत दिखाकर CBI को सुनाई थी आपबीती

Sat, 16 Mar 2024 10:35 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 16 Mar 2024 10:35 AM IST
सार

Rampur Tiraha incident : रामपुर तिराहा कांड में सामूहिक दुष्कर्म, लूट, छेड़छाड़ और साजिश रचने के मामले में तीन दशक बाद आखिरकार दो सिपाहियों पर दोष सिद्ध हुआ। जानिए आखिर पूरा मामला क्या है?

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Muzaffarnagar Rampur Tiraha incident: Two PAC constables convicted after 30 years
आरोपियों को लेकर जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरनगर के चर्चित रामपुर तिराहा कांड में सामूहिक दुष्कर्म, लूट, छेड़छाड़ और साजिश रचने के मामले में पीएसी के दो सिपाहियों पर तीन दशक बाद दोष सिद्ध हुआ। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-7 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सुनवाई की। सजा के प्रश्न पर सुनवाई के लिए 18 मार्च नियत की गई। दोनों दोषी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

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अकेली महिला आंदोलनकारी ने हिम्मत दिखाकर सीबीआई को आपबीती सुनाई थी। लड़ाई लंबी जरूर चली, लेकिन अब इंसाफ सिर्फ दो कदम दूर है। अदालत ने दोनों अभियुक्तों पर दोष सिद्ध कर दिया है, 18 मार्च को फैसला आएगा।

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एक अक्तूबर 1994 को रामपुर तिराहा पर मानवता कलंकित हुई थी। पीड़िता वाली बस में 30 यात्री सवार थे, जिनमें 18 महिलाएं थीं। सुबह करीब साढ़े पांच बजे पुलिसकर्मियों ने आंसू गैस छोड़ी। गोला खिड़की के माध्यम से बस में जा गिरा। बस में पीएसी के जवान चढ़े और महिला के साथ क्रूरता की गई थी। पुलिस ने आंदोलनकारियों पर ही मुकदमे दर्ज किए थे। उत्तराखंड संघर्ष समिति हाईकोर्ट पहुंची। इसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की। 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे। लंबी कानूनी लड़ाई चलती रही।

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मार्च 2023 में एडीजे-7 को सुनवाई के लिए अधिकृत किया गया। तीन मार्च 2023 को एक साथ 17 पुलिसकर्मी अदालत में हाजिर हुए थे। अब 18 मार्च को सीबीआई बनाम मिलाप सिंह की पत्रावली में सजा के प्रश्न पर सुनवाई होगी। इस दौरान सीबीआई की ओर से एसआई पुरुषोत्तम कुमार, हरप्रीत और एसआई महेश यादव मौजूद रहे।

दोष सिद्ध सुनते ही उड़ने लगी हवाइयां
रामपुर तिराहा कांड की पत्रावली में दोनों अभियुक्तों पर दोष सिद्ध किया गया। दोनों अभियुक्तों के चेहरे पर हवाई उड़ती रही। पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों को जेल भेज दिया।

आरोपियों की मौत के बाद बंद हुई फाइल
रामपुर तिराहा कांड में जीडी (जनरल डायरी) फाड़कर उसके स्थान पर झूठा साक्ष्य गढ़ने के आरोप के मामले में दो अलग-अलग मुकदमों की फाइल बंद हो चुकी है। एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में सीबीआई बनाम राजेंद्र सिंह की फाइल चल रही थी। आरोपी तत्कालीन एसओ राजबीर सिंंह, पुलिसकर्मी प्रीतम सिंह, दाताराम और राजेंद्र सिंह की मौत हो चुकी है। पिछले साल ही सीबीआई ने मृत्यु आख्या अदालत में पेश की थी। इसके बाद दोनों पत्रावलियां बंद कर दी गई थीं।

अब इन मामलों में चल रही सुनवाई
रामपुर तिराहा कांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या सात में सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी की पत्रावली में सुनवाई चल रही है। सीबीआई बनाम मिलाप सिंह की पत्रावली में दोष सिद्ध हो चुका है। जबकि एसीजेएम प्रथम में सीबीआई बनाम बृज किशोर और सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा की पत्रावली में सुनवाई चल रही है।

यह अभियुक्त हो चुके हाजिर
अब तक अदालत में अभियुक्त राधा मोहन, कृपाल सिंह, सुमेर सिंह, देवेंद्र सिंह, तमकीन अहमद, मिलाप सिंह, सुरेंद्र सिंह, बृजेश कुमार, कुंवरपाल सिंह, प्रबल प्रकाश, रणपाल सिंह, वीरेंद्र कुमार, संजीव कुमार भारद्वाज, राकेश कुमार सिंह, सतीश चंद शर्मा, कुशलपाल सिंह, वीरेंद्र प्रताप, विजय पाल सिंह, नरेश त्यागी पेश होकर अपने वारंट रिकॉल करा चुके हैं।

विक्रम सिंह तोमर भगोड़ा घोषित
लंबे समय से गायब चल रहे दरोगा विक्रम सिंह तोमर की पत्रावली पर सुनवाई हुई। सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परविंद्र सिंह ने बताया कि विक्रम सिंह को भगौड़ा घोषित कर दिया गया है।

इन अभियुक्तों की हो चुकी मौत
रामपुर तिराहा कांड में आरोपी झम्मन सिंह, राजपाल सिंह, महेश चंद शर्मा और नेपाल सिंह की मृत्यु हो चुकी है। सीबीआई ने इसकी आख्या अदालत में पेश कर दी थी।

शुक्रवार को इन पत्रावलियों में भी हुई सुनवाई
एसीजेएम प्रथम में सीबीआई बनाम बृज किशोर की पत्रावली में सुनवाई हुई। आरोपी अनिल हाजिर हुए। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा की पत्रावली में 30 मार्च सुनवाई के लिए नियत की गई।

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मानवता को किया था शर्मसार : डॉ. सुभाष शर्मा
भाजपा नेता पूर्व पालिकाध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद शर्मा बताते हैं कि वह रामपुर तिराहा पर हुई घटना के बाद मौके पर पहुंचने वाले सबसे पहले लोगों में से एक थे। मानवता को शर्मसार करने वाली घटना थी। तब उनके पास भाजपा के नगर महामंत्री का दायित्व था। दिल्ली से और इधर-उधर से आने वाले मीडियाकर्मी और अन्य लोगों की मदद की।

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