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मुजफ्फरनगर में शोक: नहीं रहे मशहूर कव्वाल अहसान भारती, दिल्ली में हुआ निधन

Wed, 12 Jan 2022 07:50 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Wed, 12 Jan 2022 07:50 PM IST
सार

मशहूर कव्वाल अहसान भारती घुंघरू वाले का दिल्ली में निधन हो गया। वह मुजफ्फरनगर के रहने वाले थे। उनके परिजनों ने बताया कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते थे।

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Muzaffarnagar News: Eminent Qawwal Ahsan Bharti passed away in Delhi
मशहूर कव्वाल अहसान भारती - फोटो : amar ujala

विस्तार

गले से घुंघरू बजाकर दुनियाभर को चौंकाने वाले कव्वाल अहसान भारती का बीमारी के चलते दिल्ली में इंतकाल हो गया। परिवार और प्रशंसकों को जैसे ही उनके निधन का समाचार मिला तो उनमें गम की लहर दौड़ गई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले की पहचान बनाई थी।

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मुजफ्फरनगर जनपद के कस्बे में रह रहे अहसान के परिवार के नाजिर अली कादरी ने बताया कि लंबे समय से उनका परिवार पहले मेरठ और इसके बाद दिल्ली में रह रहा था। बुधवार को कस्बे में उनके इंतकाल की खबर आई, यहां से परिवार और परिचित दिल्ली के लिए रवाना हो गए। कव्वाल अहसान भारती घुंघरू वाले के नाम से उनकी पहचान थी। यही नहीं गले से घुंघरू की 84 तरह की आवाज निकालने के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। कस्बे के इस मशहूर कव्वाल के इंतकाल से शोक व्याप्त है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी, स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें सम्मानित किया था।
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अहसान को हुनर देकर गया था फकीर
पिछले दिनों बातचीत में अहसान ने अपने हुनर के बारे में बताया था कि बचपन में जब वह मेरठ स्थित घर में रह रहे थे, तो एक फकीर घर पर आया। फकीर ने पूछा नाम रोशन करना चाहते हो, जवाब में हां कहने पर गले से घुंघरू बजाने का हुनर दिया। पांच साल तक रियाज के बाद वह इस कला को निखारने में कामयाब हुए थे। उन्होंने देश के अलावा बहरीन, दुबई, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान आदि देशों में कव्वाली के गले से घुंघरू की आवाज सुनाकर लोगों को आनंदित किया।

सभी धर्मों का सम्मान करने वाली शख्सियत
वह सभी धर्मों का बेहद सम्मान करते थे और सभी धर्मों आदर करते हुए कव्वाली के माध्यम से सभी को जोड़ने का प्रयास करते थे। उनकी कव्वाली ए राम रहीम के मतवालों, भाषा के लिए क्यों लड़ते हो, अल्लाह भी हिंदी जाने हैं भगवान भी उर्दू जाने हैं, काफी लोकप्रिय हुई। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान भी उनके मुरीद थे। एक मुलाकात के दौरान सलमान को उन्होंने कव्वाली और शेरो शायरी सुनाई तो वह कायल हो गए। मां के ऊपर लिखा शेर ‘जिसकी छांव है सबके लिए, मैं वो मां का आंचल हूं’ को सलमान ने सराहा था।

मेरी कब्र के पत्थर पर हिंदुस्तान लिख देना
अहसान भारती अपने हर कार्यक्रम में शेर सुनाते थे। उनका सुनाया शेर ‘ये किसका मकबरा है दुनिया वाले जान जाएंगे, मेरी कब्र के पत्थर पर हिंदुस्तान लिख देना’। को खूब सराहा गया। वह बॉलीवुड में ब्रेक के लिए वह 10 साल तक संघर्ष करते रहे। इसके बाद उन्हें भोजपुरी फिल्मों में कव्वाली गाने का मौका मिला।

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