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Muzaffarnagar: खंडहर में चल रही तमंचा फैक्ट्री पकड़ी, चाचा-भतीजा गिरफ्तार, बोले- मीरापुर उपचुनाव में...

Wed, 13 Nov 2024 06:28 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Wed, 13 Nov 2024 06:28 PM IST
सार

सिंचाई विभाग के खंडहर हो चुके भवन में तमंचे बनाए जा रहे थे। पुलिस ने भारी मात्रा में बने-अधबने तमंचे और औजार बरामद किए हैं। फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। 

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Muzaffarnagar: Gun factory running in ruins caught, uncle and nephew arrested
तमंचे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपा थाना क्षेत्र के गांव नंगला बुजुर्ग के जंगल में स्थित सिंचाई विभाग के खंडहर भवन में तमंचे बनाने की फैक्टरी चलाई जा रही थी। भोपा थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच टीम ने छापेमारी कर चाचा भतीजे को गिरफ्तार कर लिया। मौके से भारी संख्या में बने अधबने तमंचे व तमंचे बनाने के उपकरण बरामद किए हैं। जबकि चाचा भतीजे सहित तीन आरोपी मौके से फरार हो गए। 
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एसपी देहात आदित्य बंसल ने पुलिस लाइन में पत्रकार वार्ता में जानकारी दी कि एक सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की थी। दो आरोपी भोपा क्षेत्र के नया गांव निवासी अकरम उर्फ कग्गा व उसके भतीजे इसरार को मौके से गिरफ्तार कर लिया। अलीपुर तिस्सा निवासी इरशाद उर्फ बाबू व उसका भतीजा असलम तथा एक अन्य खेड़ी फिरोजाबाद निवासी अली नवाज उर्फ अलिया फरार हो गए।
 
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पुलिस ने मौके से 20 बने तमंचे व मस्कट तथा आठ नाल व तमंचे बनाने के उपकरण बरामद किए। गिरफ्तार अकरम और फरार इरशाद उर्फ बाबू पूर्व में भी तमंचे बनाने के आरोप में जेल जा चुके हैं। एसपी ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया जाएगा। आरोपियों से जब सवाल किया तो उन्होंने कहा कि इन तमंचों को मीरापुर उपचुनाव में खूनखराबा करने के लिए नहीं बनाया गया था। गिरफ्तार आरोपियों का चालान कर दिया गया है। फरार आरोपियों की तलाश के लिए दो टीम बनाई हैं।
 
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पांच हजार रुपये में बेचते थे तमंचा
एसपी देहात ने बताया कि यह गिरोह पांच हजार रुपये में तमंचा बेचता था। काफी समय से यह गिरोह इस धंधे में लगा था। गिरफ्तार व फरार आरोपियों को तमंचे बनाने में महारत हासिल है। 

बरतते थे सावधानी
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह बेहद शातिर है। गिरोह के एक-दो सदस्य ही मोबाइल का इस्तेमाल करते थे। सभी सदस्य मोबाइल नहीं रखते थे। किसी को भी एक बार में तमंचा नहीं बेचते थे। कई बार चक्कर कटाने के बाद तमंचा बेचा जाता था।




 
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