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Muzaffarnagar: कर्तव्य पालन में चूक पर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल को गंवानी पड़ी कुर्सी, लखनऊ तक गूंजा था मामला

Tue, 11 Oct 2022 12:16 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 11 Oct 2022 12:16 PM IST
सार

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत वॉल पेंटिंग और अन्य कार्यों की शिकायत के बाद जांच कराई गई थी, जिसमें पालिकाध्यक्ष को वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाया गया था। यह मामला लखनऊ तक गूंजा था। आखिरकार चेयरपर्सन को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।

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Muzaffarnagar: Chairperson Anju Agarwal lost her chair due to lapse in duty
अंजू अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरनगर जनपद में टिपर वाहनों की आपूर्ति, वॉल पेंटिंग और सीएमओ ऑफिस के पास कचरा एकत्र कराने के कक्ष के निर्माण प्रकरण की जांच में घिर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल को पद से हटा दिया गया है। नगर विकास के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने पत्र जारी कर दिया है। 

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सभासद राजीव शर्मा ने इस मामले की शिकायत की थी। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत वॉल पेंटिंग और अन्य कार्यों की शिकायत के बाद जांच कराई गई थी, जिसमें पालिकाध्यक्ष को वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाया गया था। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने जांच के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी थी। राज्यपाल से अनुमति के बाद चेयरपर्सन को पद से हटा दिया गया है। इससे पहले पिछले दिनों चेयरपर्सन ने इस्तीफे का एलान भी किया था, लेकिन इस्तीफा नहीं दिया था।
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इस तरह फंसती चली गईं चेयरपर्सन
दो साल पुराने पालिका के 35 टिपर वाहन खरीद मामले की गूंज लखनऊ तक हुई थी। मई 2020 में नगर पालिका ने 35 गारबेज टिपर वाहन खरीद के लिए टेंडर जारी किए थे। इसके लिए मैसर्स गोल्डन ट्राइंगल सर्विसेज फर्म को टेंडर स्वीकृत हुआ था। फर्म की ओर से केवल 11 वाहनों की डिलीवरी की गई, जबकि पालिका प्रशासन ने 82 लाख रुपये का फर्म को अग्रिम भुगतान कर दिया।

नियमानुसार और टेंडर की शर्त के आधार पर 35 वाहनों की खरीद सुनिश्चित होने के साथ ही पालिका में वाहनों की आपूर्ति हो जाने पर यह भुगतान होना था। कंपनी के खिलाफ शहर कोतवाली में 82 लाख रुपये का गबन करने के मामले में फर्म और ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज है।

शासन ने सरकारी संपत्ति को लेकर लापरवाही माना है। इनमें भी चार या पांच टिपर ही प्रयोग किए जा रहे हैं। कंपनी की ओर से निविदा की सभी शर्तों को पूरा नहीं किया गया है। इसके अलावा वॉल पेंटिंग में पालिकाध्यक्ष का नाम लिखवाना और चित्र बनवाने को शासन ने गलत माना है। विज्ञापनों का प्रकाशन भी राष्ट्रीय समाचार पत्रों के बजाए स्थानीय समाचार पत्रों में कराया गया।
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