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देशभर में 344वें पायदान पर नगर पालिका, 2000 में से 703 अंक
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 05 May 2017 12:50 AM IST
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नगर पालिका मुजफ्फरनगर।
- फोटो : अमर उजाला
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देशभर के 41 शहरों के स्वच्छ सर्वेक्षण के बाद रिपोर्ट कार्ड जारी किया गया है, जिसमें शहर की नगर पालिका को बेहतर अंकों से नवाजा गया है। सफाई के मामले में पालिका बेस्ट रही है, जबकि ओडीएफ स्तर पर पिछड़ेपन ने अंकों में गिरा दिया। नगर पालिका को रैगिंग के हिसाब से 344वां पायदान मिला है, जबकि अंकों में 2000 में से 703 अंक मिले हैं। नगर पालिका अधिकारियों ने इससे अधिक की उम्मीद लगाई थी, जिसके लिए कई स्तर पर जोर-शोर से पहल की गई। रिजल्ट देखकर जितनी खुशी है, उतनी ही मायूसी भी है।
अब तक प्रदेश स्तर पर पिछड़ने वाली नगर पालिका देशभर में नाम रोशन करने में सफल रही है। केंद्र सरकार द्वारा कराए गए सफाई और ओडीएफ को लेकर सर्वेंक्षण में 41 शहरों की नगर पालिकाओं की लिस्ट जारी की गई है, जिसमें शहर की नगर पालिका को 344वां स्थान मिला है, जबकि स्कोर अंक 2000 थे। इनमें भी 703 अंक मिले हैं।
यह शहर के लिए सुखद रहा, लेकिन थोड़े पिछडऩेपन का मलाल भी है। शामली नगर पालिका को सूची में 326वीं रैंक मिली है। केंद्र सरकार ने नगर पालिकाओं में नालों की सफाई, सड़कों के निर्माण, लाइट, शौचालयों, वार्डों में ओडीएफ के साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण सफाई के बिंदुओं पर सर्वेक्षण कराया था, जिसकी बृहस्पतिवार को रैकिंग सूची जारी की गई है। सूची में नगर पालिका ने पश्चिम के कई शहरों की पालिकाओं को मात दी है।
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हर महीने सफाई पर 25 लाख रुपये खर्च
मुजफ्फरनगर। शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए पालिका स्तर से हर माह मोटी रकम सफाई पर खर्च होती है। शहर में सफाई के लिए पूरी तरह से क्रमबद्ध पालिका हर माह 25 लाख इसके लिए खर्च करती है, जिसमें कर्मचारियों के साथ ही वाहनों के रखरखाव और अन्य उपकरणों पर पैसा लगता है। इसमें ही नालों की सफाई का भी कार्य शामिल है।
दो अधिकारी और 750 हैं कर्मचारी
मुजफ्फरनगर। शहर की सफाई के लिए नगर पालिका में मुख्य रुप से नगर स्वास्थ्य अधिकारी के साथ एक सफाई निरीक्षक भी है। शहर में सुबह और शाम सफाई का शेड्यूल बना हुआ है। इस कार्य को अंजाम देने के लिए 750 कर्मचारियों की लंबी फौज मौजूद है।
यहां पिछड़ी नगर पालिका
स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट में नगर पालिका ओडीएफ (खुले में शौच) के मामले में पिछड़ गई। रिपोर्ट जाने तक शहर के करीब 22 वार्डों को ही ओडीएफ मुक्त का दर्जा मिला था, जबकि शहर में 45 वार्ड हैं। ऐसे में 23 वार्डों में सफाई का कमजोर पडऩा ही पालिका के अंकों को कम कर गया है।
यह बोले अधिकारी:
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि जिस समय सर्वे हुआ था, उस वक्त शहर में ओडीएफ का कार्य चल रहा था। केवल 18 वार्ड खुले में शौच से मुक्त हुए थे। वर्तमान में हम काफी आगे हैं। पूरा शहर ओडीएफ होने की ओर है। आने वाली रैकिंग में और ऊंचे पायदान पर पहुंचेंगे।
विकास की ओर बढ़ा शहर: पंकज
नगर पालिका चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने बताया कि जिस समय पांच साल पूर्व वह अध्यक्ष बने थे, उस समय पालिका का देश और प्रदेश में कहीं कोई स्थान नहीं था। शहर धीरे-धीरे स्वच्छता और विकास की ओर बढ़ा है। उसी का परिणाम है कि शहर रेटिंग में 344वें स्थान पर पहुंचने में सफल हुए हैं।
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अब तक प्रदेश स्तर पर पिछड़ने वाली नगर पालिका देशभर में नाम रोशन करने में सफल रही है। केंद्र सरकार द्वारा कराए गए सफाई और ओडीएफ को लेकर सर्वेंक्षण में 41 शहरों की नगर पालिकाओं की लिस्ट जारी की गई है, जिसमें शहर की नगर पालिका को 344वां स्थान मिला है, जबकि स्कोर अंक 2000 थे। इनमें भी 703 अंक मिले हैं।
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यह शहर के लिए सुखद रहा, लेकिन थोड़े पिछडऩेपन का मलाल भी है। शामली नगर पालिका को सूची में 326वीं रैंक मिली है। केंद्र सरकार ने नगर पालिकाओं में नालों की सफाई, सड़कों के निर्माण, लाइट, शौचालयों, वार्डों में ओडीएफ के साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण सफाई के बिंदुओं पर सर्वेक्षण कराया था, जिसकी बृहस्पतिवार को रैकिंग सूची जारी की गई है। सूची में नगर पालिका ने पश्चिम के कई शहरों की पालिकाओं को मात दी है।
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हर महीने सफाई पर 25 लाख रुपये खर्च
मुजफ्फरनगर। शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए पालिका स्तर से हर माह मोटी रकम सफाई पर खर्च होती है। शहर में सफाई के लिए पूरी तरह से क्रमबद्ध पालिका हर माह 25 लाख इसके लिए खर्च करती है, जिसमें कर्मचारियों के साथ ही वाहनों के रखरखाव और अन्य उपकरणों पर पैसा लगता है। इसमें ही नालों की सफाई का भी कार्य शामिल है।
दो अधिकारी और 750 हैं कर्मचारी
मुजफ्फरनगर। शहर की सफाई के लिए नगर पालिका में मुख्य रुप से नगर स्वास्थ्य अधिकारी के साथ एक सफाई निरीक्षक भी है। शहर में सुबह और शाम सफाई का शेड्यूल बना हुआ है। इस कार्य को अंजाम देने के लिए 750 कर्मचारियों की लंबी फौज मौजूद है।
यहां पिछड़ी नगर पालिका
स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट में नगर पालिका ओडीएफ (खुले में शौच) के मामले में पिछड़ गई। रिपोर्ट जाने तक शहर के करीब 22 वार्डों को ही ओडीएफ मुक्त का दर्जा मिला था, जबकि शहर में 45 वार्ड हैं। ऐसे में 23 वार्डों में सफाई का कमजोर पडऩा ही पालिका के अंकों को कम कर गया है।
यह बोले अधिकारी:
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि जिस समय सर्वे हुआ था, उस वक्त शहर में ओडीएफ का कार्य चल रहा था। केवल 18 वार्ड खुले में शौच से मुक्त हुए थे। वर्तमान में हम काफी आगे हैं। पूरा शहर ओडीएफ होने की ओर है। आने वाली रैकिंग में और ऊंचे पायदान पर पहुंचेंगे।
विकास की ओर बढ़ा शहर: पंकज
नगर पालिका चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने बताया कि जिस समय पांच साल पूर्व वह अध्यक्ष बने थे, उस समय पालिका का देश और प्रदेश में कहीं कोई स्थान नहीं था। शहर धीरे-धीरे स्वच्छता और विकास की ओर बढ़ा है। उसी का परिणाम है कि शहर रेटिंग में 344वें स्थान पर पहुंचने में सफल हुए हैं।