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कुशपुरी के मैदान छोड़ने से एकतरफा रहा चुनाव
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कुशपुरी के मैदान छोड़ने से एकतरफा रहा एमएलसी चुनाव
मुजफ्फरनगर। एमएलसी स्नातक सीट पर हुए चुनाव में जिले में भाजपा की एकतरफा जीत रही। यहां भाजपा प्रत्याशी को कोई अन्य प्रत्याशी टक्कर नहीं दे पाया। भाजपा की एकजुटता ने चुनाव परिणाम दिनेश गोयल के पक्ष में कर दिया।
स्नातक चुनाव में मुजफ्फरनगर जनपद भाजपा के लिए सबसे अच्छा रहा। जनपद में स्थानीय कोई दमदार प्रत्याशी नहीं होने से एकतरफा भाजपा प्रत्याशी का दबदबा हो गया। नामांकन के दौरान जिले के भाजपा नेता कुशपुरी द्वारा नामांकन वापस लेने से यह हालात बने। कुशपुरी ने यहां बड़ी संख्या में वोट बनवाए थे और वह एक साल से प्रचार भी कर रहे थे। भाजपा इस बात को जानती थी कि वह अच्छा चुनाव लड़ेंगे और भाजपा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। यही कारण रहा कि चुनाव से पहले ही भाजपा ने कुशपुरी को मना लिया और उन्होंने नामांकन वापस ले लिया। जनपद में स्नातक में 17 हजार वोट पड़े हैं। इनमें 12 से 14 हजार के बीच भाजपा को जाने की संभावना है। उनके सामने कोई भी प्रत्याशी एक हजार वोट तक नहीं पहुंच पाया होगा। भाजपा की रणनीति यहां पूरी तरह सफल रही। इस चुनाव में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान, राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल, विजय कश्यप, सभी विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों ने दिन रात मेहनत की। पार्टी की एकजुटता भी यहां अन्य सब पर भारी पड़ी।
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मुजफ्फरनगर। एमएलसी स्नातक सीट पर हुए चुनाव में जिले में भाजपा की एकतरफा जीत रही। यहां भाजपा प्रत्याशी को कोई अन्य प्रत्याशी टक्कर नहीं दे पाया। भाजपा की एकजुटता ने चुनाव परिणाम दिनेश गोयल के पक्ष में कर दिया।
स्नातक चुनाव में मुजफ्फरनगर जनपद भाजपा के लिए सबसे अच्छा रहा। जनपद में स्थानीय कोई दमदार प्रत्याशी नहीं होने से एकतरफा भाजपा प्रत्याशी का दबदबा हो गया। नामांकन के दौरान जिले के भाजपा नेता कुशपुरी द्वारा नामांकन वापस लेने से यह हालात बने। कुशपुरी ने यहां बड़ी संख्या में वोट बनवाए थे और वह एक साल से प्रचार भी कर रहे थे। भाजपा इस बात को जानती थी कि वह अच्छा चुनाव लड़ेंगे और भाजपा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। यही कारण रहा कि चुनाव से पहले ही भाजपा ने कुशपुरी को मना लिया और उन्होंने नामांकन वापस ले लिया। जनपद में स्नातक में 17 हजार वोट पड़े हैं। इनमें 12 से 14 हजार के बीच भाजपा को जाने की संभावना है। उनके सामने कोई भी प्रत्याशी एक हजार वोट तक नहीं पहुंच पाया होगा। भाजपा की रणनीति यहां पूरी तरह सफल रही। इस चुनाव में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान, राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल, विजय कश्यप, सभी विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों ने दिन रात मेहनत की। पार्टी की एकजुटता भी यहां अन्य सब पर भारी पड़ी।
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