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माफिया के जाल में फंसा रहा मेरिट का मोह
Sun, 28 Apr 2019 11:46 PM IST
Deepak Sharma
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
Published by: Deepak Sharma
Updated Sun, 28 Apr 2019 11:46 PM IST
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मुजफ्फरनगर। सरकारी नौकरियों में मेरिट से भर्ती होने को प्राइवेट परीक्षार्थी नकल माफिया के चंगुल में फंस रहे हैं। इंटरमीडिएट में विज्ञान वर्ग में 75 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर कोई नीट की परीक्षा में शामिल होना चाहता है तो कोई बीटेक की तमन्ना रखता है। उच्च अंक प्राप्त कर कई अभ्यर्थी देश के टॉप कॉलेजों में प्रवेश ले चुके हैं। आयु कम दर्शाने के लिए भी हाईस्कूल की परीक्षा ठेके पर उत्तीर्ण कराई जा रही है।
मुजफ्फरनगर में बोर्ड परीक्षा में शर्तिया कामयाबी के करोड़ों के खेल में शिक्षा का पूरा तंत्र घिरा हुआ है। जिले में हाईस्कूल के 961 तथा इंटरमीडिएट के 3218 छात्र-छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा का व्यक्तिगत आवेदन किया था। सूबे में सबसे ज्यादा 4179 विद्यार्थियों ने जिले से प्राइवेट फार्म भरे, जिनमें गैर राज्य एवं गैर बोर्ड के साथ पत्राचार के अभ्यर्थी शामिल हैं।
योजनाबद्ध तरीके से गठजोड़ में शामिल कॉलेजों से यह फार्म भरवाए गए। डीआईओएस दफ्तर से मिली जानकारी में यह पुष्टि होती है। जिले में कुल 13 हाईस्कूल और इंटर कॉलेज से प्राइवेट फार्म की प्रक्रिया पूरी हुई थी। नकल माफिया ने चयनित विद्यालयों को ही खेल में शामिल किया। चरथावल के रोनी हरजीपुर राजकीय हाईस्कूल से 623 तथा मुथरा के जीआईसी से 297, राजकीय हाईस्कूल जंधेडी से 850, जनता इंटर कॉलेज गंगधाड़ी से 721 तथा एसडी इंटर कॉलेज मीरापुर से 657 छात्र-छात्राओं के व्यक्तिगत फार्म भरवाकर परीक्षा दिलाई गई। राजकीय हाई स्कूल रई से 100 तथा पुरकाजी के राजकीय हाई स्कूल कासमपुर से 337 विद्यार्थियों ने फार्म भरे थे।
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ग्रामीण अंचल की राजकीय शिक्षण संस्थाओं से ये समस्त आवेदन कराए गए। खासकर जिले में जो नए राजकीय स्कूल खुले हैं, उन पर नकल माफिया का फोकस रहा। प्रयागराज और लखनऊ से लेकर क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ तक बोर्ड की व्यक्तिगत परीक्षा में उच्च अंक दिलाने का धंधा बड़ी कमाई का जरिया बन गया है। कई बार फेल होने के बाद बढ़ती उम्र को कम दर्शाने के लिए हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कराई जाती है, क्योंकि दसवीं की अंक तालिका पर ही जन्मतिथि अंकित होती है। जिले से इंटर में 2169 विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थियों ने तथा आर्ट और कॉमर्स के 1049 विद्यार्थियों ने व्यक्तिगत एग्जाम दिया। साइंस से 12वीं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक दिलाने का वायदा नकल माफिया पूरा कराते हैं। कई सरकारी भर्तियों के मेरिट बेस पर होने के कारण उच्च अंकों का सीधा लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार के बोर्ड परीक्षा नकलविहीन कराने के तमाम इंतजामों को सिस्टम में फैले नकल माफियाओं ने कैप्चर कर लिया है। फिजिक्स के पेपर में 573 प्राइवेट विद्यार्थियों को एक समान अंक मिलना इस बात को सच साबित करता है।
ये संस्थाएं, जहां से भरे गए कम फार्म
मुजफ्फरनगर। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में जीआईसी मुजफ्फरनगर से केवल 128, जीआईसी कन्या भैंसी से 104, राजकीय हाई स्कूल कुटबी से 51, राजकीय हाईस्कूल बडसू से 40, राजकीय हाईस्कूल हुसैनपुर से 169, जीआईसी कन्या सिसौली से 63 छात्र-छात्राओं ने ही प्राइवेट बोर्ड परीक्षा के फार्म भरे थे। आखिर इन शिक्षण संस्थाओं में क्यों अधिक परीक्षार्थियों ने व्यक्तिगत फार्म नहीं भरे?
दस करोड़ से ज्यादा का नकल कारोबार
मुजफ्फरनगर। जिले में प्राइवेट फार्म भरवाकर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में विशेष योग्यता दिलाने का कारोबार प्रतिवर्ष दस करोड़ से ज्यादा का होने का अनुमान है। शिकायतकर्ता रविंद्र सिंह बताते हैं कि हाईस्कूल के लिए 25 हजार तथा इंटरमीडिएट उत्तीर्ण कराने को 35 हजार रुपये तक प्रति विद्यार्थी लिए जाते हैं। बीते 15 साल में ठेके पर पास कराने का यह कारोबार दस करोड़ रुपये सलाना से ज्यादा का हो चुका है।
फिजिक्स के पेपर में 573 अभ्यर्थियों के एक समान 52 अंक आने का मामला संज्ञान में है। शासन के निर्देश पर गैर राज्य और गैर बोर्ड के इन परीक्षार्थियों के प्रकरण की जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
- अर्चना वर्मा, प्रभारी डीएम, मुजफ्फरनगर।
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मुजफ्फरनगर में बोर्ड परीक्षा में शर्तिया कामयाबी के करोड़ों के खेल में शिक्षा का पूरा तंत्र घिरा हुआ है। जिले में हाईस्कूल के 961 तथा इंटरमीडिएट के 3218 छात्र-छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा का व्यक्तिगत आवेदन किया था। सूबे में सबसे ज्यादा 4179 विद्यार्थियों ने जिले से प्राइवेट फार्म भरे, जिनमें गैर राज्य एवं गैर बोर्ड के साथ पत्राचार के अभ्यर्थी शामिल हैं।
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योजनाबद्ध तरीके से गठजोड़ में शामिल कॉलेजों से यह फार्म भरवाए गए। डीआईओएस दफ्तर से मिली जानकारी में यह पुष्टि होती है। जिले में कुल 13 हाईस्कूल और इंटर कॉलेज से प्राइवेट फार्म की प्रक्रिया पूरी हुई थी। नकल माफिया ने चयनित विद्यालयों को ही खेल में शामिल किया। चरथावल के रोनी हरजीपुर राजकीय हाईस्कूल से 623 तथा मुथरा के जीआईसी से 297, राजकीय हाईस्कूल जंधेडी से 850, जनता इंटर कॉलेज गंगधाड़ी से 721 तथा एसडी इंटर कॉलेज मीरापुर से 657 छात्र-छात्राओं के व्यक्तिगत फार्म भरवाकर परीक्षा दिलाई गई। राजकीय हाई स्कूल रई से 100 तथा पुरकाजी के राजकीय हाई स्कूल कासमपुर से 337 विद्यार्थियों ने फार्म भरे थे।
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ग्रामीण अंचल की राजकीय शिक्षण संस्थाओं से ये समस्त आवेदन कराए गए। खासकर जिले में जो नए राजकीय स्कूल खुले हैं, उन पर नकल माफिया का फोकस रहा। प्रयागराज और लखनऊ से लेकर क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ तक बोर्ड की व्यक्तिगत परीक्षा में उच्च अंक दिलाने का धंधा बड़ी कमाई का जरिया बन गया है। कई बार फेल होने के बाद बढ़ती उम्र को कम दर्शाने के लिए हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कराई जाती है, क्योंकि दसवीं की अंक तालिका पर ही जन्मतिथि अंकित होती है। जिले से इंटर में 2169 विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थियों ने तथा आर्ट और कॉमर्स के 1049 विद्यार्थियों ने व्यक्तिगत एग्जाम दिया। साइंस से 12वीं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक दिलाने का वायदा नकल माफिया पूरा कराते हैं। कई सरकारी भर्तियों के मेरिट बेस पर होने के कारण उच्च अंकों का सीधा लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार के बोर्ड परीक्षा नकलविहीन कराने के तमाम इंतजामों को सिस्टम में फैले नकल माफियाओं ने कैप्चर कर लिया है। फिजिक्स के पेपर में 573 प्राइवेट विद्यार्थियों को एक समान अंक मिलना इस बात को सच साबित करता है।
ये संस्थाएं, जहां से भरे गए कम फार्म
मुजफ्फरनगर। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में जीआईसी मुजफ्फरनगर से केवल 128, जीआईसी कन्या भैंसी से 104, राजकीय हाई स्कूल कुटबी से 51, राजकीय हाईस्कूल बडसू से 40, राजकीय हाईस्कूल हुसैनपुर से 169, जीआईसी कन्या सिसौली से 63 छात्र-छात्राओं ने ही प्राइवेट बोर्ड परीक्षा के फार्म भरे थे। आखिर इन शिक्षण संस्थाओं में क्यों अधिक परीक्षार्थियों ने व्यक्तिगत फार्म नहीं भरे?
दस करोड़ से ज्यादा का नकल कारोबार
मुजफ्फरनगर। जिले में प्राइवेट फार्म भरवाकर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में विशेष योग्यता दिलाने का कारोबार प्रतिवर्ष दस करोड़ से ज्यादा का होने का अनुमान है। शिकायतकर्ता रविंद्र सिंह बताते हैं कि हाईस्कूल के लिए 25 हजार तथा इंटरमीडिएट उत्तीर्ण कराने को 35 हजार रुपये तक प्रति विद्यार्थी लिए जाते हैं। बीते 15 साल में ठेके पर पास कराने का यह कारोबार दस करोड़ रुपये सलाना से ज्यादा का हो चुका है।
फिजिक्स के पेपर में 573 अभ्यर्थियों के एक समान 52 अंक आने का मामला संज्ञान में है। शासन के निर्देश पर गैर राज्य और गैर बोर्ड के इन परीक्षार्थियों के प्रकरण की जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
- अर्चना वर्मा, प्रभारी डीएम, मुजफ्फरनगर।