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ऑन लाईन पढाई से बढा मानसिक अवसाद

Sat, 02 Apr 2022 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2022 12:12 AM IST
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Mental depression increased due to online studies
प्रधानाचार्य जीसी -- आजाद महावीर। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। कोरोना महामारी के बीच ऑन लाईन पढ़ाई और घर की चहारदीवारी के बीच रहने से बच्चे अवसाद ग्रस्त हो गए है। उन्हें न खेलने का मौका मिला और न ही मनोरंजन का। स्कूलों में जो जीवन चक्र पटरी पर चढ़ा था वह पूरी तरह उतर गया।
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स्कूलों को छोड़े बच्चों को दो साल हो गए है। वह दो कक्षाएं आगे आ गए हैं, और जो कक्षाएं पास की हैं। उन्हें लेकर उनमें आत्मविश्वास नहीं है। बच्चों की स्थिति है कि वह क्या करें और क्या न करें। लगातार घर में ही रहने से स्कूल में होने वाले खेलों, मनोरंजन के कार्यक्रमों से एकदम अलग हो गए है। जीवन की भिन्नता उनसे दूर हो गई। ऐसे में अब वह अपने आपको खोये से महसूस कर रहे हैं। जिन परिवारों में कोरोना में ट्रेजडी हुई है, उनमें बच्चे मानसिक अवसाद से ग्रस्त हो गए है। दो साल ऑनलाइन से ऑफलाइन पढ़ाई के लिए लौटने के बाद विद्यार्थियों में बदलाव आ गया है। उनकी मनोदशा बदल गई है। ऐसे में बच्चों के अनुकूल स्कूलों का वातावरण बनाने में स्कूल संचालक लगे हैं।
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सामाजिक परिवेश भी बड़ा कारण: संजय
डीएवी कॉलेज के मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉ संजय कुमार कहते हैं कि दो साल में बच्चों का जीवन चक्र बदल गया है। वर्तमान सामाजिक परिवेश में हम अपने बच्चों को खेलने के लिए घर से बाहर नहीं भेजते हैं। स्कूल जा नहीं पाए इस कारण उनके खेल, मनोरंजन का रास्ता बंद हो गया। स्कूलों में पढाई का जो सिस्टम चल रहा था बच्चें उससे उतर गए हैं। अब समझ नहीं पा रहे क्या करें। इन बच्चों को दोबारा पटरी पर आने में वक्त लगेगा। सरकार से पास इसके लिए कोई नीति नहीं हैं।
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बच्चों की स्थिति देख बना रहे नीति: आजादवीर
जीसी पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य आजादवीर कहते हैं कि दो साल घर के अंदर रहने से बच्चों पर जो मानसिक फर्क पड़ा है, उससे बाहर आने में समय लगेगा। ऑनलाइन क्लास से विषय के प्रति रुचि पैदा नहीं हो पाती। छात्र नियमित पुस्तकों का अध्ययन नहीं करते। अब बच्चों को विषय वस्तु की किताबों का अधिक से अधिक अध्ययन करना होगा। प्रश्न-उत्तरों को याद कर बार-बार लिख कर देखना होगा। स्कूलों को सुधार के लिए अलग से कक्षाएं लगानी होगी। न्यूमेरिकल विषय की प्रैक्टिस करनी होगी। टाइम टेबिल बनाकर पढ़ाई करनी होगी। स्कूलों में खेल और मनोरंजन के कार्यक्रम बढ़ाने होंगे।
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