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Muzaffarnagar News: लैंड बैंक बनाने में एमडीए नाकाम, आवासीय योजना से खींचे हाथ
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मुजफ्फरनगर। स्थापना के लगभग तीन दशक पूर्ण होने के बावजूद एमडीए का लैंड बैंक शून्य है। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत नई कॉलोनी बसाने के लिए पीनना और रुकनपुर में भूमि अर्जन का प्रस्ताव तैयार किया गया लेकिन किसानों से सहमति नहीं मिल पाने के कारण एमडीए को यहां भी योजना से हाथ खींचने पड़े।
शासन की ओर से 2005 में शहरों में सुनियोजित आवासीय काॅलोनी विकसित करने के लिए इंटीग्रेटेड टाउनशिप योजना लागू की गई थी। शहर से सटे गांव शेरनगर और बीबीपुर में एमडीए ने कॉलोनी बसाने के लिए भूमि की तलाश शुरू की लेकिन निर्धारित समय में भूमि अधिग्रहण न कर पाने के कारण योजना एमडीए के हाथोंं से निकल गई। निजी क्षेत्र की कंपनी द्वारिका बालाजी कंसोर्टियम कंपनी की ओर से करीब 100 एकड़ भूमि में इंटीग्रेटेड टाउनशिप का खाका तैयार किया गया, जिस पर विकास प्राधिकरण ने 20 मई 2009 को लाइसेंस प्रदान किया। इसके बाद एमडीए ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत पीनना और रुकनपुर में नई आवासीय कॉलोनी बसाने के लिए भूमि अर्जन का प्रस्ताव तैयार किया लेकिन किसानों की सहमति न मिल पाने के कारण उसे पीछे हटना पड़ा।
करीब तीन दशक के दौरान एमडीए शहर में एक भी सरकारी कॉलोनी बसाने में नाकाम रहा। पीनना और रुकनपुर के किसानों की अहसमती के बाद एमडीए ने अब सिलाजुड्डी और बीबीपुर में भूमि अर्जन का प्रस्ताव तैयार किया है जिसे बोर्ड बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई।
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पुनर्वासन मद में सिक्योरिटी के रूप में अदा किए 4.46 करोड़
प्राधिकरण का लैंड बैंक स्थापना के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष में 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी लेकिन 31 अक्तूबर 2025 तक केवल 4.46 करोड़ रुपये ही इस मद में खर्च हुए, जो निर्धारित लक्ष्य का 8.92 प्रतिशत है। यह व्यय टीपी नगर भूमि अर्जन से संबंधित हाईकोर्ट में योजित वाद पर दिए गए आदेश के तहत भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण मेरठ में सिक्योरिटी जमा कराने पर हुआ।
इन्होंने कहा..
एमडीए सचिव कुंवर बहादुर सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत एमडीए भूमि अर्जन का प्रस्ताव लाया है। प्राधिकरण का प्रयास है कि शीघ्र ही भूमि अर्जित कर नई कॉलोनी बसाई जाए।
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शासन की ओर से 2005 में शहरों में सुनियोजित आवासीय काॅलोनी विकसित करने के लिए इंटीग्रेटेड टाउनशिप योजना लागू की गई थी। शहर से सटे गांव शेरनगर और बीबीपुर में एमडीए ने कॉलोनी बसाने के लिए भूमि की तलाश शुरू की लेकिन निर्धारित समय में भूमि अधिग्रहण न कर पाने के कारण योजना एमडीए के हाथोंं से निकल गई। निजी क्षेत्र की कंपनी द्वारिका बालाजी कंसोर्टियम कंपनी की ओर से करीब 100 एकड़ भूमि में इंटीग्रेटेड टाउनशिप का खाका तैयार किया गया, जिस पर विकास प्राधिकरण ने 20 मई 2009 को लाइसेंस प्रदान किया। इसके बाद एमडीए ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत पीनना और रुकनपुर में नई आवासीय कॉलोनी बसाने के लिए भूमि अर्जन का प्रस्ताव तैयार किया लेकिन किसानों की सहमति न मिल पाने के कारण उसे पीछे हटना पड़ा।
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करीब तीन दशक के दौरान एमडीए शहर में एक भी सरकारी कॉलोनी बसाने में नाकाम रहा। पीनना और रुकनपुर के किसानों की अहसमती के बाद एमडीए ने अब सिलाजुड्डी और बीबीपुर में भूमि अर्जन का प्रस्ताव तैयार किया है जिसे बोर्ड बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई।
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पुनर्वासन मद में सिक्योरिटी के रूप में अदा किए 4.46 करोड़
प्राधिकरण का लैंड बैंक स्थापना के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष में 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी लेकिन 31 अक्तूबर 2025 तक केवल 4.46 करोड़ रुपये ही इस मद में खर्च हुए, जो निर्धारित लक्ष्य का 8.92 प्रतिशत है। यह व्यय टीपी नगर भूमि अर्जन से संबंधित हाईकोर्ट में योजित वाद पर दिए गए आदेश के तहत भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण मेरठ में सिक्योरिटी जमा कराने पर हुआ।
इन्होंने कहा..
एमडीए सचिव कुंवर बहादुर सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत एमडीए भूमि अर्जन का प्रस्ताव लाया है। प्राधिकरण का प्रयास है कि शीघ्र ही भूमि अर्जित कर नई कॉलोनी बसाई जाए।