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सिद्धार्थ की मौत का दर्द भूल नहीं पाया परिवार

Sat, 14 Dec 2019 01:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 14 Dec 2019 01:12 AM IST
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MBBS student Dr. Siddharth Chaudhary
मुजफ्फरनगर में भोपा रोड पर डॉ सिद्घार्थ चौधरी के चिकित्सक माता-पिता का हॉस्पिटल। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। मृतक एमबीबीएस के छात्र डॉ सिद्धार्थ चौधरी के पिता का शहर में भोपा रोड पर किसान हॉस्पिटल है।
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भोपा क्षेत्र के अथाई गांव के मूल निवासी डॉ सुरेंद्र ग्रेवाल चर्म रोग विशेषज्ञ है। बीते चार दशक से शहर में प्रेक्टिस कर रहे है। डॉ सिद्धार्थ की माता डॉ सुरेंद्र कौर भी गायनोलोजिस्ट है। वर्ष 2004 में बेटे के साथ हुए हादसे से परिवार पूरी तरह टूट गया था, क्योंकि डॉ सिद्धार्थ परिवार के इकलौते बेटे थे। जिन संदिग्ध परिस्थितियों में हॉस्टल में डॉ सिद्धार्थ की लाश मिली थी। उससे परिजनों को शक था कि उनके बेटे की मौत स्वाभाविक नहीं है। डेढ़ दशक लंबी कोर्ट की सुनवाई के बाद बेटे की मौत का सच सामने आया है। मेरठ की अदालत ने गुनहगार तीन चिकित्सकों को हत्या का दोषी माना है तथा उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है। डॉ सिद्धार्थ की बहन डॉ कूमी ग्रेवाल भी मखियाली सीएचसी पर डॉक्टर है। अन्य परिवार अथाई गांव में खेती किसानी से जुड़ा है। बेटे के हत्यारों को कड़ी सजा दिए जाने के बाद देर रात अमर उजाला ने पिता डॉ सुरेंद्र ग्रेवाल से बात करनी चाही, मगर उसने फोन पर संपर्क नहीं हो सका। डॉ सिद्धार्थ के चाचा अजीत ग्रेवाल ने बताया कि बेटे के साथ हुई घटना को परिवार आज तक नहीं भूल पाया है। कोर्ट का फैसला आने पर उन्होंने कहा कि परिवार को ईश्वर पर विश्वास था। अदालत से परिवार को न्याय मिला है, मगर सिद्धार्थ को खोने का गम ताउम्र रहेगा।
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