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कोरोना काल में मंदा रहा मावा बाजार
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शहर के भगत सिंह रोड पर स्थित दुकान से मावा खरीदती महिला।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
कोरोना काल में मंदा रहा मावा बाजार
मुजफ्फरनगर। कोरोना काल के चलते इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर मावा बाजार मंदा है। डिमांड कम होने से कारोबारी हताश है। उनका कहना है कि गत वर्ष के सापेक्ष इस बार 50 प्रतिशत ही बिक्री हो सकी है। इसका कारण वो कोरोना बता रहे हैं।
शहर में भगत सिंह रोड पर मावा मंडी में करीब दो दर्जन दुकानें हैं। यहां थोक और फुटकर का मावेे की बिक्री होती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर इस बार मावा मंडी की रौनक गायब रही। मावा व्यापारी सचिन कुमार ने बताया कि लोग इस बार कम मावा ले रहे हैं। यह पर्व मिठाई के लिए जाना जाता है। मगर, इस बार लोग कम ही मावा ले रहे हैं। शिव कुमार का कहना है कि कोरोना के कारण लोग बाहर का सामान नहीं ले रहे हैं। घर पर बस जरूरत का मावा निकाल रहे हैं। अशोक तायल का कहना है कि काम पचास प्रतिशत रह गया है। गत वर्ष डेढ़ क्विंटल मावा बेचा था, आज 75 किलो भी बेचना कठिन हो रहा है। सचिन सिंघल कहते हैं कि मंदिरों में कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं। सभी त्योहार सांकेतिक रूप से मनाए जा रहे हैं। इसका असर मावा व्यापार पर भी पड़ा है। पंचमुखी के थोक के व्यापारी ललित कुमार कहते हैं कि रेल बंद है, बस भी दिल्ली और उत्तराखंड नहीं जा रही है। रुटीन में गांव में मावा कम बनाया जा रहा है। इसलिए मावे की बिक्री प्रभावित हुई है। थोक में तीन क्विंटल मावा की बिक्री थी जो आज घट कर डेढ़ क्विंटल रह गई है।
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मुजफ्फरनगर। कोरोना काल के चलते इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर मावा बाजार मंदा है। डिमांड कम होने से कारोबारी हताश है। उनका कहना है कि गत वर्ष के सापेक्ष इस बार 50 प्रतिशत ही बिक्री हो सकी है। इसका कारण वो कोरोना बता रहे हैं।
शहर में भगत सिंह रोड पर मावा मंडी में करीब दो दर्जन दुकानें हैं। यहां थोक और फुटकर का मावेे की बिक्री होती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर इस बार मावा मंडी की रौनक गायब रही। मावा व्यापारी सचिन कुमार ने बताया कि लोग इस बार कम मावा ले रहे हैं। यह पर्व मिठाई के लिए जाना जाता है। मगर, इस बार लोग कम ही मावा ले रहे हैं। शिव कुमार का कहना है कि कोरोना के कारण लोग बाहर का सामान नहीं ले रहे हैं। घर पर बस जरूरत का मावा निकाल रहे हैं। अशोक तायल का कहना है कि काम पचास प्रतिशत रह गया है। गत वर्ष डेढ़ क्विंटल मावा बेचा था, आज 75 किलो भी बेचना कठिन हो रहा है। सचिन सिंघल कहते हैं कि मंदिरों में कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं। सभी त्योहार सांकेतिक रूप से मनाए जा रहे हैं। इसका असर मावा व्यापार पर भी पड़ा है। पंचमुखी के थोक के व्यापारी ललित कुमार कहते हैं कि रेल बंद है, बस भी दिल्ली और उत्तराखंड नहीं जा रही है। रुटीन में गांव में मावा कम बनाया जा रहा है। इसलिए मावे की बिक्री प्रभावित हुई है। थोक में तीन क्विंटल मावा की बिक्री थी जो आज घट कर डेढ़ क्विंटल रह गई है।
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