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कुपोषण से जूझ रहा चाचा नेहरू के सपनों का बचपन

Thu, 14 Nov 2019 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 14 Nov 2019 12:12 AM IST
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Malnutrition eclipsed for future of children
बच्चों के भविष्य को लगा कुपोषण का ग्रहण
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बाल दिवस पर विशेष....
गिरिराज सिंह
मुजफ्फरनगर। देश के प्रथम प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू को बच्चों से इतना लगाव था कि उनका जन्मदिवस बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। चाचा नेहरू हमेशा स्वस्थ बचपन का सपना देखते थे, लेकिन उनका यह सपना देखा आज धूमिल हो रहा है। जिले में जन्म लेने वाले बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। स्थिति यह है कि वर्तमान में दो हजार से ज्यादा बच्चे अति कुपोषित और 20 हजार से ज्यादा कुपोषित श्रेणी में हैं।
बच्चे देश का भविष्य होते हैं, लेकिन इस भविष्य को कुपोषण का ग्रहण लग रहा है। बेहतर खानपान नहीं होना, माताओं का स्वास्थ्य ठीक नहीं होना तथा साफ-सफाई एवं शिक्षा का अभाव मासूमों को कुपोषण की ओर ले जा रहा है। अगस्त माह की रिपोर्ट के अनुसार राज्य पोषण मिशन के तहत शून्य से पांच वर्ष तक के 2,51965 बच्चे हैं। इनमें से 227698 बच्चों का वजन किया गया। जिनमें से 2474 बच्चे अति कुपोषित तथा 21028 बच्चे कुपोषित पाए गए। इसके बाद सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया गया। प्रतिदिन जिलेभर में कार्यक्रम हुए। लोगों को कुपोषण के प्रति जागरूक किया गया। इसके बावजूद बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। जितने बच्चे कुपोषण की श्रेणी से बाहर आते हैं उतने ही नए शामिल हो जाते हैं।
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एनआरसी में नहीं भेजे जा रहे बच्चे
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) करीब एक माह से खाली पड़ा है। जिले में अति कुपोषित बच्चों की संख्या दो हजार से ज्यादा होने के बावजूद उन्हें एनआरसी में भर्ती नहीं कराया जा रहा। बुधवार को केंद्र में केवल एक बच्चा भर्ती था, जबकि दस बच्चों को भर्ती कराने की व्यवस्था है। बच्चों को भर्ती कराने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा तथा एएनएम की होती है, लेकिन बच्चों को केंद्र पर नहीं लाया जा रहा। विभागीय अधिकारी भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। केंद्र की प्रभारी डा. आरती नंदनवार ने बताया कि संबंधित विभागों को तीन बार पत्र लिखा जा चुका है। 15 अक्तूबर के बाद से बच्चे केंद्र पर नहीं आ रहे हैं।
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केंद्र पर बच्चों की देखभाल की पूरी व्यवस्था
मुजफ्फरनगर। पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चों की देखभाल की पूरी व्यवस्था है। यहां भर्ती होने वाले बच्चे को भोजन, फूड सप्लीमेंट निशुल्क दिया जाता है। इसके साथ ही उसका उपचार भी किया जाता है। माता को प्रतिदिन 50 रुपये दिए जाते हैं। अति कुपोषित बच्चे को 14 दिन तक भर्ती करने की व्यवस्था है। डिस्चार्ज होने के बाद चार बार बच्चे को लाने पर माता को 100 रुपये तथा बच्चे के लिए 40 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भोजन के लिए दिए जाते हैं।
गंभीर हालत में लाया गया अनस
मुजफ्फरनगर। गांव संभलेहड़ा निवासी दंपती अपने आठ माह के बच्चे अनस को लेकर एनआरसी पर पहुंचा। उसकी हालत बेहद खराब थी। गंभीर हालत में उसे मेरठ रेफर किया गया। एनआरसी प्रभारी डा. आरती नंदनवार ने बताया कि यदि बच्चे को समय पर लाया जाता या गांव की आंगनबाड़ी और आशा उसे समय पर एनआरसी भेजवा देतीं, तो यहीं पर उसका उपचार हो सकता था तथा कुछ ही दिन में वह स्वस्थ हो जाता।

इन्होंने कहा...
- सभी अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन जिले में कुपोषित बच्चे होने के बावजूद एनआरसी में भर्ती नहीं कराया जाना गलत है। वह इस संबंध में जानकारी कर उचित कार्रवाई करेंगे।
- आलोक यादव, सीडीओ।
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