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Muzaffarnagar News: भगवान शंकर ने शिवभक्त आत्म देव को प्रदान किया था राधा वल्लभ का विग्रह

Wed, 12 Jul 2023 12:41 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jul 2023 12:41 AM IST
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Lord Shankar had provided the idol of Radha Vallabh to the devotee of Lord Shiva
चरथावल में ऐतिहासिक ठाकुरद्वारा मंदिर का मुख्य द्वार
- मुगलकालीन ठाकुरद्वारा मंदिर चरथावल कस्बे की अनूठी धरोहर
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संजय गर्ग

चरथावल। शिवभक्त आत्मदेव की भक्ति से लीन होकर भगवान शंकर ने राधा वल्लभ का अलौकिक विग्रह स्वयं प्रदान किया था। कस्बे में मुगलकालीन ठाकुरद्वारा मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है।
बुजुर्गाें का कहना है एक दिन भगवान शिव ने मंदिर के पुजारी आत्मदेव शर्मा को उनके तप से प्रसन्न होकर दर्शन दिए। कहा जाे मांगना है मांगो। मगर, पुजारी बोले प्रभु मुझे कुछ नहीं चाहिए। इस पर भगवान के पुनः आदेश पर भक्त ने कहा आपको जो सबसे प्रिय हो वह आप मुझे दें। भगवान ने उनके आग्रह पर अपने ईष्ट श्री राधा वल्लभ जी को अपने हृदय से प्रकट कर आत्मदेव जी को भेंट किया।
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चिकित्सक विशाल शर्मा का कहना है उनके बाबा महावीर प्रसाद बताया करते थे मंदिर के पुजारी आत्मदेव का परिवार कई पीढ़ियों से भगवान शंकर की निष्काम भक्ति में लीन था। शिव कृपा से उन्हें मंदिर गर्भ में श्री राधा-कृष्ण विग्रह यानि मूर्ति के दर्शन हुए। ये अद्भुत मूर्ति भक्ति और आस्था का केंद्र बन गईं।
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राधा वल्लभ संप्रदाय के प्रवर्तक हित हरिवंश ने देवबंद को त्यागकर वृंदावन जाते वक्त चरथावल क्षेत्र में रात्रि विश्राम किया था। उन्हें स्वप्न में अपने आराध्य के दर्शन हुए। चरथावल के ठाकुर द्वारा मंदिर के धर्म परायण पुजारी आत्मदेव से मिलन और उनकी दो कन्याओं से विवाह उपरांत मिलने वाले विग्रह को वृंदावन में स्थापित करना बताया गया था। अनन्य भक्त आत्मदेव ने सहर्ष श्री राधा-कृष्ण विग्रह के साथ अपनी पुत्रियों को उन्हें समर्पित कर दिया। चरथावल की पावन भूमि से प्रकट हुआ ये विग्रह महाप्रभु हित हरिवंश ने वृंदावन के राधा वल्लभ मंदिर में स्थापित किया था। आज भी राधा वल्लभ संप्रदाय से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए कस्बे का ठाकुरद्वारा मंदिर अटूट श्रद्धा का केंद्र है। (संवाद)





कल से लगेगा दो दिवसीय कांवड़ शिविर

चरथावल। मंदिर कमेटी से जुड़े डाॅक्टर धीरज त्यागी बताते है कि राधा वल्लभ का अलौकिक विग्रह वृंदावन में चरथावल के नाम से प्रख्यात है। 13 जुलाई से कांवडि़यों की सेवा के लिए मंदिर प्रांगण में शिविर लगेगा। ठाकुरद्वारा मंदिर के भव्य निर्माण को मुगल शासक जहांगीर के काल में बना था। लाला प्रेम राज उनके दरबार में दरोगा थे। उनकी ईमानदारी से कायल जहांगीर ने उन्हें बड़ी संपत्ति दी, जिससे उस जमाने में यह मंदिर, सात कुएं और सात महल बने थे।
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