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हासुदीन की हत्या में दो सगे भाईयों समेत अभियुक्तों को आजीवन कारावास
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मुजफ्फरनगर। सात साल पहले गोयला गांव में मस्जिद के अहाते में बुजुर्ग की छुरी घोंपकर हत्या के मामले में पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-5 के न्यायाधीश बाबूराम ने फैसला सुनाया।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अरुण कुमार शर्मा और सत्येंद्र पुंडीर ने बताया कि शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव गोयला निवासी हासुदीन (60) पांच जून 2015 को मस्जिद से नमाज पढ़कर घर के लिए चले थे। मस्जिद के अहाते में रंजिश के चलते गांव के अशरफ व असगर पुत्र माजिद, खालिद पुत्र असगर, सादिक पुत्र अशरफ और शाकिर पुत्र नसीबुद्दीन ने पकड़कर छुरी घोंपकर उसकी हत्या कर दी थी। मृतक के पुत्र इश्तकार ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने प्रकरण की जांच कर चार्जशीट दाखिल की। प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-5 के न्यायाधीश बाबूराम ने की।
अभियोजन की ओर से आठ गवाह अदालत में पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष ने एक गवाह पेश किया। अदालत ने आरोपियों को हत्या के में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा और 33,500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। धारा 147 में एक-एक साल, धारा 148 में दो-दो साल की सजा सुनाई गई। अभियुक्त शाकिर उर्फ तिल्ली उर्फ डॉन को शस्त्र अधिनियम में एक साल का कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई।
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वारदात से तीन दिन पहले हुई थी कहासुनी
मस्जिद में हत्या की वारदात से तीन दिन पहले हासुदीन की आरोपी अशरफ से कहासुनी हो गई थी। गाली-गलौज हुई। तब आसपास के लोगों ने मामले को किसी तरह निपटा दिया था, लेकिन तीन दिन बाद हमलावरों ने हत्या की वारदात को अंजाम दिया।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अरुण कुमार शर्मा और सत्येंद्र पुंडीर ने बताया कि शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव गोयला निवासी हासुदीन (60) पांच जून 2015 को मस्जिद से नमाज पढ़कर घर के लिए चले थे। मस्जिद के अहाते में रंजिश के चलते गांव के अशरफ व असगर पुत्र माजिद, खालिद पुत्र असगर, सादिक पुत्र अशरफ और शाकिर पुत्र नसीबुद्दीन ने पकड़कर छुरी घोंपकर उसकी हत्या कर दी थी। मृतक के पुत्र इश्तकार ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने प्रकरण की जांच कर चार्जशीट दाखिल की। प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-5 के न्यायाधीश बाबूराम ने की।
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अभियोजन की ओर से आठ गवाह अदालत में पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष ने एक गवाह पेश किया। अदालत ने आरोपियों को हत्या के में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा और 33,500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। धारा 147 में एक-एक साल, धारा 148 में दो-दो साल की सजा सुनाई गई। अभियुक्त शाकिर उर्फ तिल्ली उर्फ डॉन को शस्त्र अधिनियम में एक साल का कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई।
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वारदात से तीन दिन पहले हुई थी कहासुनी
मस्जिद में हत्या की वारदात से तीन दिन पहले हासुदीन की आरोपी अशरफ से कहासुनी हो गई थी। गाली-गलौज हुई। तब आसपास के लोगों ने मामले को किसी तरह निपटा दिया था, लेकिन तीन दिन बाद हमलावरों ने हत्या की वारदात को अंजाम दिया।