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आबाद हत्या कांड में दो भाइयों को उम्रकैद, अर्थदंड
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मुजफ्फरनगर। 2008 में क्षेत्र के ग्राम सुजडू में पुरानी रंजिश को लेकर आबाद की गोली मारकर हत्या और जानलेवा हमला करने के मामले में आरोपी दो सगे भाइयों सुहेल और हसीन को उम्र कैद व एक-एक लाख व 12-12 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया है ।
हत्याकांड व जानलेवा हमले के इस मामले की सुनवाई एडीजे- एक न्यायाधीश जय सिंह पुंडीर की कोर्ट में हुई। अभियोजन की ओर से मजबूत पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता आशीष त्यागी, मनोज ठाकुर व ललित कुमार ने की। अदालत ने शनिवार को आरोपी सुहेल व हसीन को दफा 302 में उम्रकैद व एक- एक लाख रुपये, 307 में दस वर्ष की सजा व दस -दस हजार रुपये, 25 शस्त्र अधिनियम में दो वर्ष की सजा व दो -दो हजार रुपये के जुर्माना से दंडित किया है। दोनों आरोपियों को इस मामले के वादी कचहरी के मुंशी नासिर की हत्या में उम्र कैद की सजा 2012 में पहले ही हो गई थी। दोनों उम्र कैद की सजा जेल में भुगत रहे हैं, जबकि इस मामले का निस्तारण काफी वर्षों बाद हुआ है।
बताया गया, कि 2008 में ग्राम सुजडू में गोली मारकर आबाद की हत्या कर दी थी। मृतक के पिता नासिर ने शेर अली ,उसके तीन पुत्र सुहेल ,हसीन व बाबर को नामजद किया था। शेर अली की इस मामले की सुनवायी के चलते मौत हो गई थी। जबकि बाबर जुविनाइल घोषित हो चुका है। इस मामले में पैरवी करने पर मुकदमे के वादी नासिर की हत्या कर दी गई थी।
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आपसी रंजिश में हुई थी आबाद की हत्या
गांव के लोग बताते हैं आबाद और सुहेल दोनों अच्छे दोस्त थे। बाद में किसी बात को लेकर उनमें रंजिश बन गई। इसी के चलते आबाद की हत्या की गई। इसके बाद आबाद के पिता नासिर की भी हत्या की गई। नासिर कचहरी में मुंशी थे उनकी हत्या के बाद मामला जिले में चर्चित बन गया था ।शहर कोतवाली मुजफ्फरनगर में उस समय तैनात रहे एसएसआई अनिरुद्ध गौतम ने इस इन दोनों मामलों में बारीकी से जांच पड़ताल कर पुख्ता साक्ष्य एकत्र कर किए थे । तब दोनों मामलों में चार्ज सीट लगाई गई थी।
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हत्याकांड व जानलेवा हमले के इस मामले की सुनवाई एडीजे- एक न्यायाधीश जय सिंह पुंडीर की कोर्ट में हुई। अभियोजन की ओर से मजबूत पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता आशीष त्यागी, मनोज ठाकुर व ललित कुमार ने की। अदालत ने शनिवार को आरोपी सुहेल व हसीन को दफा 302 में उम्रकैद व एक- एक लाख रुपये, 307 में दस वर्ष की सजा व दस -दस हजार रुपये, 25 शस्त्र अधिनियम में दो वर्ष की सजा व दो -दो हजार रुपये के जुर्माना से दंडित किया है। दोनों आरोपियों को इस मामले के वादी कचहरी के मुंशी नासिर की हत्या में उम्र कैद की सजा 2012 में पहले ही हो गई थी। दोनों उम्र कैद की सजा जेल में भुगत रहे हैं, जबकि इस मामले का निस्तारण काफी वर्षों बाद हुआ है।
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बताया गया, कि 2008 में ग्राम सुजडू में गोली मारकर आबाद की हत्या कर दी थी। मृतक के पिता नासिर ने शेर अली ,उसके तीन पुत्र सुहेल ,हसीन व बाबर को नामजद किया था। शेर अली की इस मामले की सुनवायी के चलते मौत हो गई थी। जबकि बाबर जुविनाइल घोषित हो चुका है। इस मामले में पैरवी करने पर मुकदमे के वादी नासिर की हत्या कर दी गई थी।
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आपसी रंजिश में हुई थी आबाद की हत्या
गांव के लोग बताते हैं आबाद और सुहेल दोनों अच्छे दोस्त थे। बाद में किसी बात को लेकर उनमें रंजिश बन गई। इसी के चलते आबाद की हत्या की गई। इसके बाद आबाद के पिता नासिर की भी हत्या की गई। नासिर कचहरी में मुंशी थे उनकी हत्या के बाद मामला जिले में चर्चित बन गया था ।शहर कोतवाली मुजफ्फरनगर में उस समय तैनात रहे एसएसआई अनिरुद्ध गौतम ने इस इन दोनों मामलों में बारीकी से जांच पड़ताल कर पुख्ता साक्ष्य एकत्र कर किए थे । तब दोनों मामलों में चार्ज सीट लगाई गई थी।