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हत्या में पति और ससुर को उम्रकैद
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Sat, 15 Sep 2018 12:25 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर। विवाहिता को जलाकर मारने वाले पति और ससुर को अदालत ने आजीवन कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार शामली जिले के थाना थानाभवन में बागपत जनपद के बड़ौत क्षेत्र के गांव शाहपुर बड़ौली निवासी संतराम ने 24 दिसंबर 2011 को अपनी बहन की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
बताया था कि उसकी बहन गजेंद्री की शादी सन 1996 में शामली के मोहल्ला रामनगर निवासी हरपाल के बेटे सुधीर के साथ हुई थी। पांच साल बाद गजेंद्री के ससुराल वाले शामली का मकान बेच कर हरियाणा के पानीपत जनपद के गांव सनौली खुर्द में रहने लगे थे। गजेंद्री का पति सुधीर कुछ काम नहीं करता था और शराबी भी था।
वह उसकी बहन से दहेज के रूप में पैसा की मांग करता था। पैसा न लाने पर वह मारपीट भी करता था। 16 दिसंबर 2011 को उन्हें सूचना मिली कि उसकी बहन लापता है। इस बारे में उसकी सुसराल वालों से पता किया तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। फिर उसकी गुमशुदगी पानीपत सदर थाने में दर्ज कराई थी।
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24 दिसंबर के समाचार पत्रों में थानाभवन क्षेत्र में एक महिला की जली हुई लाश मिलने की जानकारी हुई। मोर्चरी पर जाकर लाश को देखा तो उसकी पहचान गजेंद्री के रूप में की गई। मुकदमे में मृतका के पति सुधीर और ससुर को आरोपी बनाया गया था। सुनवाई एडीजे गौरव कुमार श्रीवास्तव की अदालत संख्या-1 में हुई। एडीजीसी जितेंद्र कुमार त्यागी ने कोर्ट में आठ गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त पति सुधीर और ससुर हरपाल को हत्या करने और लाश छुपाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद पिता-पुत्र को जेल भेज दिया गया।
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बताया था कि उसकी बहन गजेंद्री की शादी सन 1996 में शामली के मोहल्ला रामनगर निवासी हरपाल के बेटे सुधीर के साथ हुई थी। पांच साल बाद गजेंद्री के ससुराल वाले शामली का मकान बेच कर हरियाणा के पानीपत जनपद के गांव सनौली खुर्द में रहने लगे थे। गजेंद्री का पति सुधीर कुछ काम नहीं करता था और शराबी भी था।
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वह उसकी बहन से दहेज के रूप में पैसा की मांग करता था। पैसा न लाने पर वह मारपीट भी करता था। 16 दिसंबर 2011 को उन्हें सूचना मिली कि उसकी बहन लापता है। इस बारे में उसकी सुसराल वालों से पता किया तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। फिर उसकी गुमशुदगी पानीपत सदर थाने में दर्ज कराई थी।
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24 दिसंबर के समाचार पत्रों में थानाभवन क्षेत्र में एक महिला की जली हुई लाश मिलने की जानकारी हुई। मोर्चरी पर जाकर लाश को देखा तो उसकी पहचान गजेंद्री के रूप में की गई। मुकदमे में मृतका के पति सुधीर और ससुर को आरोपी बनाया गया था। सुनवाई एडीजे गौरव कुमार श्रीवास्तव की अदालत संख्या-1 में हुई। एडीजीसी जितेंद्र कुमार त्यागी ने कोर्ट में आठ गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त पति सुधीर और ससुर हरपाल को हत्या करने और लाश छुपाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद पिता-पुत्र को जेल भेज दिया गया।