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अहिंसा, प्रेम और मैत्री से महान बनता है जीवन : जयकीर्ति
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फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। जैन संत जयकीर्ति महाराज ने बताया कि अहिंसा, प्रेम और मैत्री के माध्यम से जीवन को महान बनाया जा सकता है। आत्मिक शांति, आत्मिक शक्ति और आत्मा की सेवा ऐसे मूल मंत्र हैं, जो जीवन को महान बनाने में सर्वोपरि हैं।
आचार्य ने जक्की वाला जैन मंदिर से दौराला के लिए पद विहार किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में संतोष धारण करना जरूरी है। संतोष धारण करने से जीवन में शांति बनी रहती है। तृष्णा से भरा जीवन संकटों से घिर जाता है। मानव जीवन में सहनशीलता, समता का भाव धारण करना चाहिए। समता धारण करने वाले व्यक्ति जीवन में महान बनते हैं।
सदा प्रभु का ध्यान करो, चाहे वह सुख के क्षण हों या दुख के। जीवन में संयम नियम अनुशासन का पालन करो। जीवन में आई हुई समस्याओं का साहस के साथ सामना करना है। धर्म संस्कार जीवन के विकास के लिए आवश्यक है। संत ने दौराला के लिए पद विहार शुरू कराया। इस दौरान सुशील जैन, संजय जैन, मनोज, वीरेश, महेश, अनुज, शीलचंद, सुनील ठेकेदार, अरविंद, जिनेंद्र, विजय, राजकुमार, अशोक, पीयूष, पारस, सुबोध, प्रीति, संगीता, वर्षा का सहयोग रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। जैन संत जयकीर्ति महाराज ने बताया कि अहिंसा, प्रेम और मैत्री के माध्यम से जीवन को महान बनाया जा सकता है। आत्मिक शांति, आत्मिक शक्ति और आत्मा की सेवा ऐसे मूल मंत्र हैं, जो जीवन को महान बनाने में सर्वोपरि हैं।
आचार्य ने जक्की वाला जैन मंदिर से दौराला के लिए पद विहार किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में संतोष धारण करना जरूरी है। संतोष धारण करने से जीवन में शांति बनी रहती है। तृष्णा से भरा जीवन संकटों से घिर जाता है। मानव जीवन में सहनशीलता, समता का भाव धारण करना चाहिए। समता धारण करने वाले व्यक्ति जीवन में महान बनते हैं।
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सदा प्रभु का ध्यान करो, चाहे वह सुख के क्षण हों या दुख के। जीवन में संयम नियम अनुशासन का पालन करो। जीवन में आई हुई समस्याओं का साहस के साथ सामना करना है। धर्म संस्कार जीवन के विकास के लिए आवश्यक है। संत ने दौराला के लिए पद विहार शुरू कराया। इस दौरान सुशील जैन, संजय जैन, मनोज, वीरेश, महेश, अनुज, शीलचंद, सुनील ठेकेदार, अरविंद, जिनेंद्र, विजय, राजकुमार, अशोक, पीयूष, पारस, सुबोध, प्रीति, संगीता, वर्षा का सहयोग रहा।
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