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केजीएमयू के वीसी ने बढ़ाया मान, गांव चांदपुर में प्रोफेसर के घर में छाई खुशियां    

Thu, 30 Mar 2017 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Thu, 30 Mar 2017 12:40 AM IST
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KGMU's VC Professor Ravikant
कुलपति प्रोफेसर श्रीकांत को सम्मानित करते राष्ट्रपति। - फोटो : अमर उजाला
मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट शिक्षण के लिए केजीएमयू के वीसी प्रोफेसर रविकांत को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने डॉक्टर बीसी रॉय अवार्ड से अलंकृत किया है। नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में देश के प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजे जाने के बाद उनके गांव चांदपुर में खुशियां छा गई हैं। वर्ष 2016 में  उन्हें पद्मश्री और यश भारती से सम्मानित किया गया था।  
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सदर ब्लॉक के गांव चांदपुर में प्रोफेसर रविकांत के परिवार के सदस्य अपने को काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। 28 मार्च को राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें मेडिकल एजूकेशन के प्रतिष्ठित डॉ बीसी रॉय अवार्ड से अलंकृत किया। तीन दशक से ज्यादा वक्त से मेडिकल शिक्षा में उच्च अध्यापन के लिए उनका चयन किया गया। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ में प्रो रविकांत ने अप्रैल 2014 में कुलपति का दायित्व संभाला था।
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उनके निर्देशन में केजीएमयू में 61 चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति एमसीआई मानकों के अनुरूप की गई। विश्व की अन्य मेडिकल की यूनिवर्सिटियों से अनुबंध कर प्रशिक्षु चिकित्सकों को उच्च फैकल्टी दी गई। सत्र 2015-16 के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम की सीटें 185 से बढ़ाकर 250 सीटों की अनुमति लेने में प्रो रविकांत का अथक प्रयास रहा। उनके नेतृत्व में केजीएमयू में प्रथम ऑर्गन ट्रांसप्लांट सफल हुआ।
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कम्यूनिटी नेत्र बैंक की विश्वविद्यालय में स्थापना की गई, जहां एक हजार से ज्यादा जरूरतमंदों की आंखों को कॉर्निया उपलब्ध कराया जा चुका है। मेडिकल शिक्षा के मूल्यों को समर्पित प्रो रविकांत ने अथक परिश्रम और समर्पण भाव से जीवन में उपलब्धियों का मुकाम हासिल किया है। मेडिकल सर्जरी में देश के श्रेष्ठ सर्जन में उनकी गिनती है।

राष्ट्रपति से अवार्ड पाने  के बाद बातचीत में प्रो रविकांत ने कहा कि शिक्षा अमूल्य है। पढ़ाई के प्रति दादा और पिता की प्रेरणा ने ऊंचाइयां छूने की ललक पैदा की। सवा सौ करोड़ के मुल्क में अभी बेहतर मेडिकल कॉलेजों की जरूरत है। मेडिकल टूरिज्म में विश्व भारत की पहचान बढ़ गई है। यूपी में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज और अधिक खुलने चाहिए, ताकि प्रदेश को योग्य चिकित्सक मिलें।  शिक्षा में किया गया इन्वेस्टमेंट श्रेष्ठ है।        

सरकारी स्कूल से प्राप्त की प्रारंभिक पढ़ाई
मुजफ्फरनगर। चांदपुर गांव की पगडंडी से राष्ट्रीय धरोहर बने प्रो रविकांत का जन्म 14 सितंबर 1956 को इंजीनियर स्व. चरण सिंह वर्मा के परिवार में हुआ। प्राथमिक शिक्षा सरकारी स्कूल में हुई। पिता की नौकरी के साथ प्रदेश के कई शहरों में रहते हुए उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा वर्ष 1971 और इंटरमीडिएट वर्ष 1973 में पूर्ण की।

डीएवी कॉलेज में तीन माह की कोचिंग के बाद वर्ष 1977 में उनका केजीएमयू में एमबीबीएस में चयन हुआ। वर्ष 1982 में लखनऊ से ही प्रो रविकांत ने जर्नल सर्जरी में एमएस किया। वह देश के उन चुनिंदा चिकित्सकों में शामिल है, जिन्होंने 4 बार एफआरसीएस की उपाधि हासिल की है।       

पति की कामयाबी  पर गर्व : बीना रवि      
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रपति भवन के अवार्ड समारोह की साक्षी बनी प्रो रविकांत की पत्नी डॉ बीना रवि की मेडिकल शिक्षा में विशिष्ट पहचान है। वह केजीएमयू लखनऊ की स्टूडेंट रही हैं। उन्होंने कई दशक नई दिल्ली के लेडी हार्डिंन मेडिकल कालेज में शिक्षण किया है। वर्तमान में डॉ बीना हिंद मेडिकल कालेज सीतापुर में प्राचार्या का दायित्व निभा रही हैं।


डॉ बीना रवि कहती हैं कि मेडिकल शिक्षण के प्रति प्रो रविकांत का समर्पण उल्लेखनीय है। उनकी कामयाबी से फक्र होता है। दंपति की एक मात्र बेटी डेंटिस्ट हैं, जो यूके में अपना क्लीनिक चलातीं हैं। शहर के नईमंडी में संजय मार्ग पर भी उनका आवास है।       
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