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कवाल कांड को पांच साल पूरे, पीड़ितों के जख्म ताजा

Mon, 27 Aug 2018 12:21 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Updated Mon, 27 Aug 2018 12:21 AM IST
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Kawal Kand to complete five years
सचिन के माता-पिता। - फोटो : अमर उजाला
27 अगस्त 2013 कवाल कांड को आज पूरे पांच साल बीत चुके हैं। वो दिन है और आज का दिन, जिसको कोई भूल नहीं पाएगा। ममेरे भाइयों सचिन और गौरव के मरने के बाद इनके परिवारों ने सबकुछ गंवाया। इन परिवारों के हत्याकांड को लेकर जख्म आज भी भरे नहीं, ताजा ही हैं। पांच साल पहले चौराहे पर कुछ युवकों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें शाहनवाज को चाकू लगने से मौत हो गई।
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इसके बाद भीड़ ने मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की घेरकर बेरहमी से पीट पीटकर हत्या कर डाली थी। कवाल की इस जघन्य वारदात से मचे बवाल ने दंगे का रूप ले लिया था। सात सितंबर को ममेरे भाइयों को श्रद्धांजलि देने के लिए नंगला मंदौड़ में भीड़ जुटी। पंचायत खत्म होते ही जनपद में दंगा भड़क उठा था। खूनखराबे में 64 से अधिक बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी। जनपद के दंगों के गूंज देश ही नहीं विदेशों तक पहुंची थी।
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गांव मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव हत्याकांड को लेकर परिजनों के जख्म उनके दिलों में आज भी ताजा हैं। पिता बिशन व मां मुनेश देवी की बेटे सचिन की याद आते ही आंखों से आंसू टपकनेे लगते हैं। गौरव के परिजनों का भी यही हाल है। पिता रविंद्र व मां सुरेश का इकलौता बेटा गौरव भी मारा गया था। उसके पिता रविंद्र ने बताया कि गौरव के मरने के बाद शासन की ओर से परिजनों को आर्थिक मदद में 12 लाख और बहन शैली को शिक्षा विभाग में नौकरी मिली थी।
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बिशन ने बताया कि सचिन की हत्या के बाद, बहू स्वाति पोते गगन को लेकर पुरबालियान में अपने मायके चली गई थी। सचिन की मौत के बाद परिवार का सबकुछ चला गया। शासन की ओर से बेटे की मौत के बाद स्वाति को कलक्ट्रेट में सरकारी नौकरी और 12 लाख रुपये आर्थिक मदद को मिले थे।  स्वाति को पूरी जिंदगी काटने और मासूम गगन की परवरिश के लिए देवर राहुल के साथ शादी करनी चाही, लेकिन स्वाति ने उनकी उम्मीद पर भी पानी फेर दिया था।

वह सचिन की आखिरी निशानी पोते गगन को भी अपने साथ ले गई। दादा दादी कहते हैं कि पोते को देखने के लिए आंखें तरस गई हैं। बिशन ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते बेटी रीतू के तीन वर्ष पूर्व हाथ पीले कर दिए थे। पुत्र राहुल की अभी तक शादी नहीं हो सकी है। वह मुजफ्फरनगर में एक निजी वाहन की एजेंसी पर 6-7 हजार रुपये की नौकरी करता है। रविंद्र ने बताया कि सचिन व गौरव हत्याकांड के बाद शासन से उन्होंने सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस की मांग की थी। आज तक उनको शस्त्र लाइसेंस नहीं मिला है।  

पांचवीं पुण्यतिथि 28 अगस्त को मनाई जाएगी
गांव मलिकापुरा में 28 अगस्त को सचिन और गौरव की पांचवीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी। पिछली चार पुण्यतिथि में भी स्वाति नहीं आई थी। सिर्फ पहली पुण्यतिथि में गगन को उसके मामा मलिकपुरा में लेकर आए और पुण्यतिथि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वे गगन को वापस लेकर चले गए थे। गांव में पुण्यतिथि पर हवन यज्ञ का आयोजन किया गया जाएगा। पुण्यतिथि में भाजपा सांसद डॉक्टर संजीव बालियान के अलावा भाजपा के कई विधायक व नेतागण भी शामिल होंगे।

28 अगस्त को हत्यारोपियों की गवाही होगी
जानसठ। मलिकपुरा के मृतक गौरव का पिता रविंद्र  हत्याकांड का वादी भी है और इस पूरे मुकदमे की  पैरवी भी कर रहे हैं। रविंद्र ने बताया कि हत्याकांड में वादी और मौके के चश्मदीद गवाहों की कोर्ट में गवाही पूरी हो चुकी है। 28 अगस्त को सेक्शन 313 के तहत कोर्ट में अब जेल में बंद नामजद पांच हत्यारोपियों की गवाही होगी। कोर्ट में जज उनकी गवाही लेंगे। शाहनवाज की हत्या में उनको भी अगले महीने दो सितंबर को कोर्ट ने तलब किया है।


सलीम बोला, बेटे की तनख्वाह से चलता है घर
जानसठ। कवाल के मृतक शाहनवाज के पिता सलीम का कहना है कि बेटे की हत्या के बाद शासन से 12 लाख रुपये की आर्थिक मदद और पुत्र शहजाद को लोक निर्माण विभाग में नौकरी मिली थी। शाहनवाज की हत्या के बाद परिवार में सात पुत्र व तीन पुत्रियां हैं। शासन से जो आर्थिक मदद मिली थी वह बच्चों की परवरिश में खत्म हो गए। इन्हीं पैसों में से सुरक्षा को लेकर बनाए गए शस्त्र लाइसेंस में रिवाल्वर खरीदा। अब बेटे शहजाद की जो तनख्वाह आती है, उसी से घर का खर्च चलता है।
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