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कवाल क्लिपिंग पर यूएसए में माथापच्ची

Thu, 17 Dec 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Thu, 17 Dec 2015 12:24 AM IST
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Kawal clipping permutations in USA
मुजफ्फरनगर। दंगे की वजह बताई जा रही भड़काऊ वीडियो क्लिपिंग का राज यूएसए में तलाशा जा रहा है। एसआईटी ने कवाल कांड की रिकार्डिंग की सच्चाई जानने के लिए सीबीआई की मदद ली है। एसआईटी के एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए बताया कि सीबीआई ने फेसबुक नेटवर्किंग सेवा के कैलिफोर्निया मुख्यालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संपर्क साधा है। सरधना के भाजपा विधायक संगीत सोम इस वीडियो को शेयर करने के आरोप में जेल काट चुके हैं।
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कवाल कांड के बाद वायरल हुए भड़काऊ वीडियो क्लिपिंग को जांच एजेंसियों ने मुजफ्फरनगर दंगे की मुख्य वजह माना है। 26 अगस्त 2013 को जानसठ कोतवाली के कवाल गांव में शाहनवाज, सचिन और गौरव के हत्याकांड से जुड़ा तथाकथित वीडियो पूरे देश में शेयर हो गया था। शिवम कुमार नाम की आईडी से अपलोड किए गए वीडियो को भाजपा विधायक संगीत सोम ने शेयर किया।
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वीडियो के साथ यह टिप्पणी लिखी थी, भाई साहब देखो क्या हुआ कवाल में। नंगला मंदौड़ की पंचायतों में भी माहौल को गरमाने के लिए वीडियो को दिखाया गया। वीडियो अपलोड करने वाले शिवम कुमार, शेयर करने वाले विधायक संगीत सोम और उसे लाइक करने वाले 229 लोगों के खिलाफ पुलिस ने 420, 153ए, 120बी, 66 आईपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
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सात सितंबर 2013 को हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर नेताओं की गिरफ्तारी की थी। भाजपा विधायक संगीत सोम को सरधना में गिरफ्तार कर जिला कारागार में बंद कर दिया गया था। शासन ने सोम पर रासुका तामील करा दी थी। बाद में एडवाजरी कमेटी की रिपोर्ट पर सोम से रासुका हटा दी गई और उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। एसआईटी मामले की जांच कर रही है। वीडियो अपलोड करने वाले शिवम कुमार का पता भी एसआईटी आज तक नहीं लगा पाई।


मामले के तूल पकड़ने के बाद शिवम ने अपना एकाउंट डिलीट कर दिया था। वीडियो क्लिपिंग की गहनता से जांच के बाद सीबीआई ने यूएसए के मेलो पार्क कैलिफोर्निया स्थित फेसबुक मुख्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संपर्क साधा है। सीबीआई का सवाल है कि किस आईपी एड्रेस से शिवम का एकाउंट बना था, उसकी डेट और समय क्या है? फेसबुक नेटवर्किंग सर्विस के अधिकारियों ने कहा है कि वह मामले की जांच करेंगे। अगर स्वतंत्रता के अधिकार का हनन नहीं होगा तो वह क्लिपिंग की जानकारी सीबीआई को उपलब्ध करा देंगे।

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